12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चुनाव पर बवाल मचा हुआ है. खास कर बीएलओ की मौत पर राजनीति गरमाया हुआ है. नवंबर 2025 से शुरू हुए SIR अभियान के अब तक के 28 दिनों में देशभर में 32 BLOs की मौत हो चुकी है. इसी मामले में पर लोकसभा में विपक्ष बवाल मचाया है, तो मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार की याचिका पर इलेक्शन कमिशन (EC) को नोटिस जारी किया है. वहीं, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी की याचिका पर भी बहस होगी.
चुनाव आयोग को नियम के अधिकार नहीं है- अभिषेक मनु सिंघवी
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच के समक्ष वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अपना पक्ष रखा. सिंघवी ने एसआईआर मामले पर चुनाव आयोग पर तीखा प्रहार किया, ‘EC को नियम बनाने का कोई अधिकार ही नहीं! यह संसदीय कानूनों से संचालित व्यवस्था है. अगले साल SIR के दस्तावेज लेने से कोई रोक नहीं सकता. कल को जाति, दादा-नानी का प्रमाण-पत्र मांग लेगी!’ एसआईआर का पूरा ढांचा द्विपक्षीय और चतुर्भुज (बाइलेटरल) है, न कि प्रत्येक राज्य की 6-7 करोड़ आबादी के हिसाब से तय होता है. यह एक ऐसी व्यवस्था है जो संसदीय कानूनों से संचालित होती है. चुनाव आयोग का पावर कांस्टीट्यूएंसी-लेवल तक सीमित है, न कि पूरे राज्य या देश स्तर पर. यह प्रक्रिया ROPA (रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट) के दायरे से बाहर है. EC को प्रक्रियागत सुधार का नाम देकर सबस्टैंटिव चेंजेस करने का हक नहीं.’ सिंघवी ने उदाहरण दिया कि 2003 के बाद नामांकित वोटर्स को अब ‘प्रिजम्प्टिव गेस्ट’ मान लिया गया है- जब तक प्रमाण न दें, नाम कट जाएंगे.
SIR पर विपक्ष की ओर पक्ष रख रहे अभिषेक मनु सिंघवी
चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच के समक्ष केरल सरकार की याचिका पर सुनवाई शुरू हुई. वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अपना पक्ष रखना शुरू किया और EC पर तीखे हमले किए. सिंघवी ने कहा कि EC को नियम बनाने का कोई अधिकार नहीं है और SIR से लाखों वोटरों का नाम कटने का खतरा है. कोर्ट ने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की याचिकाओं पर भी चर्चा की, जहां EC को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का समय दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट में आज महत्वपूर्ण सुनवाई हो रही है. चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच के समक्ष केरल सरकार की याचिका पर EC को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. सुनवाई के दौरान SC ने EC से 1 दिसंबर तक काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया था. केरल ने SIR को स्थगित करने की मांग की है, जबकि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की याचिकाओं पर भी बहस जारी है. विपक्षी दलों ने इसे वोटर लिस्ट से लाखों नाम काटने की साजिश बताया है. वहीं, विपक्ष के आरोप पर EC ने इसे ‘चुनावी प्रक्रिया की सफाई’ कहा है.
केरल सरकार का तर्क है कि SIR से लोकल बॉडी इलेक्शन (21 दिसंबर तक) प्रभावित होंगे. वहीं तमिलनाडु में DMK, CPI(M) और अन्य पार्टियों ने SIR को ‘असंवैधानिक’ बताया है. पश्चिम बंगाल में TMC सांसद डोला सेन और कांग्रेस ने याचिका दाखिल की है, जहां BLOs की कथित आत्महत्याओं का मुद्दा उठा है. पुडुचेरी में भी स्थानीय पार्टियां SIR का विरोध कर रही हैं.







