बिहार में विधानसभा चुनाव खत्म भी नहीं हुए कि पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है. इस बार के त्रि स्तरीय पंचायत चुनावों में आरक्षण का चक्र बदलने वाला है. आपको मालूम होगा कि पंचायत चुनावों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को अधिकतम 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया है. इस बार ऐसा तीसरा मौका होगा, जब आरक्षण के चक्र में बदलाव किया जाएगा. पंचायती राज अधिनियम में यह प्रावधान किया गया है कि लगातार दो चुनावों के बाद आरक्षण का चक्र बदला जाएगा. 2006 में पहली बार सभी पदों का आरक्षण तय हुआ था और यह 2011 तक लागू रहा था. 2016 में नए आरक्षण चक्र के हिसाब से पंचायत चुनाव कराया और यह 2021 तक लागू रहा. अब इस बार फिर से आरक्षण चक्र बदलेगा और यह 2031 तक लागू रह सकता है.
यानी जिन पदों पर पिछली दो बार (2016 और 2021) किसी विशेष श्रेणी (जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, या महिला) के लिए आरक्षण लागू था, अब वे पद उस आरक्षण से मुक्त हो जाएंगे।
2011 की जनगणना के आधार पर नई व्यवस्था
2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर अब नए सिरे से पदों का रोस्टर (बारी) तैयार किया जाएगा। आरक्षण चक्र के इस बड़े बदलाव से ग्रामीण राजनीति में नए समीकरण उभरेंगे और कई मौजूदा दिग्गज नेताओं की सीटें प्रभावित होंगी।
10 तक आरक्षित सीटें होगी सामान्य
राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह तीसरी बार होगा जब पूरे राज्य में आरक्षण चक्र बदला जाएगा। ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के हजारों पदों पर आरक्षित श्रेणी बदल जाएगी। जिन सीटों पर पिछले 10 वर्षों से एक ही वर्ग को आरक्षण मिल रहा था, वहां अब सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार चुनाव लड़ सकेंगे। वहीं, जो सीटें सामान्य वर्ग के लिए थीं, वहाँ अब आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार मैदान में उतर सकेंगे।
जनसंख्या अनुपात: अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण मिलेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में एससी-एसटी आबादी 25 प्रतिशत है, तो 25प्रतिशत पद उसी श्रेणी के लिए आरक्षित होंगे।
आरक्षण की सीमा: अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) को लगभग 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। सभी श्रेणियों को मिलाकर कुल आरक्षण किसी भी स्तर पर 50% से अधिक नहीं होगा। महिला आरक्षण: हर श्रेणी में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी।







