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ब्‍लूजेट की फ्लाइट में हुए पिचडाउन की घटना के बाद एयरबस ने 55 साल के इतिहास में सबसे बड़ा किया रिकॉल………………..

UB India News by UB India News
November 30, 2025
in परिवहन
0
ब्‍लूजेट की फ्लाइट में हुए पिचडाउन की घटना के बाद एयरबस ने  55 साल के इतिहास में सबसे बड़ा किया रिकॉल………………..
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यूरोप की विमान निर्माता कंपनी एयरबस ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर बताया कि वह अपने ए320 बेड़े के विमानों को वापस बुला रही है। दरअसल विमानों में सॉफ्टवेयर बदलाव के चलते कंपनी ने यह फैसला किया है। हालांकि कंपनी के इस फैसले का असर पूरी दुनिया पर होगा और हवाई यातायात बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है।

6000 विमान वापस बुलाएगी कंपनी
एयरबस के मौजूदा समय में करीब 11,300 ए320 विमान संचालित हो रहे हैं, जिनमें से कंपनी करीब 6000 ए320 परिवार के विमानों को रिकॉल कर रही है। यह पूरी दुनिया के विमानों के बेड़े की करीब आधी संख्या है। अब जब क्रिसमस के आसपास हवाई यातायात बढ़ जाता है, तो उस समय एयरबस का अपने विमानों को वापस बुलाना पूरी दुनिया में हवाई यातायात को प्रभावित करेगा। इसके चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

एयरबस के 55 साल के इतिहास में इसे सबसे बड़ा रिकॉल बताया जा रहा है। इस समय एयरबस के ए320 विमान दुनियाभर की एयरलाइंस द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। स्थिति ये है कि जब कंपनी ने विमानों को वापस बुलाने का बयान जारी किया, उस वक्त दुनियाभर के 350 से ज्यादा ऑपरेटर्स के 3000 ए320 विमान उड़ान भर रहे थे।

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विमानों में सॉफ्टवेयर में बदलाव किया जाना है, जो बहुत ज्यादा मुश्किल काम नहीं है, लेकिन इसके लिए विमानों को रिपेयर सेंटर में रिपोजिशन करके की जरूरत होगी जिसमें हर विमान में कम से कम दो घंटे का समय लग सकता है। अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, चीन, यूरोप, भारत और न्यूजीलैंड समेत दुनिया के कई देशों में इसके चलते उड़ान सेवाएं बाधित हो सकती हैं या उनमें देरी हो सकती है।

अमेरिका और चीन की एयरलाइंस बड़े पैमाने पर ए320 विमानों का इस्तेमाल करती हैं
एयरबस पहले ही बड़े पैमाने पर विमानों की मरम्मत कर रही है, जिससे उसका मेंटिनेंस विभाग पहले ही दबाव में है। साथ ही कंपनी के पास कर्मचारियों की भी कमी है। यही वजह है कि हवाई यातायात के सामान्य होने में लंबा वक्त लग सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी अमेरिकन एयरलाइंस के पास ए320 बेड़े के विमानों की संख्या सबसे ज्यादा है। अमेरिकन एयरलाइंस अभी ए319 मॉडल के 129 विमानों, ए320 मॉडल के 47 विमानों और ए321 मॉडल के 299 विमानों का संचालन करती है। इस तरह कंपनी के पास ए320 फैमिली के 475 विमान हैं। भारत की इंडिगो एयरलाइंस के पास 312 विमान हैं।

एअर इंडिया ने कहा- हमारे इंजीनियर चौबीसों घंटे काम कर रहे
एअर इंडिया ने भी बयान जारी कर कहा कि ‘एअर इंडिया में सुरक्षा सबसे जरूरी है। दुनिया भर में A320 वर्ग के विमानों में जरूरी सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर रीअलाइनमेंट के लिए EASA और एयरबस के निर्देशों के बाद, हमारे इंजीनियर इस काम को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। हमने अपने 40% से ज़्यादा विमानों की मरम्मत का काम पहले ही पूरा कर लिया है। हमें भरोसा है कि EASA द्वारा तय समयसीमा के अंदर पूरे बेड़े को कवर कर लेंगे। एअर इंडिया पुष्टि करती है कि इस काम की वजह से कोई उड़ान रद्द नहीं हुई है और हमारे पूरे नेटवर्क में शेड्यूल पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। हालांकि, हमारी कुछ फ़्लाइट्स थोड़ी लेट हो सकती हैं या रीशेड्यूल हो सकती हैं। जमीन पर हमारे कर्मचारी साथी यात्रियों की मदद के लिए मौजूद हैं।’

डीजीसीए ने जारी किया नोटिफिकेशन
नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) ने भी एयरबस A318, A319, A320 और A321 विमानों के लिए जरूरी सुरक्षा निर्देश जारी किया है। नोटिफिकेशन में लिखा है, ‘यह पक्का किया जाना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति ऐसे उत्पाद को संचालित न करे जो जरूरी मॉडिफिकेशन के तहत आते हैं।’

Airbus Planes & Solar Radiation Risk: 30 अक्‍टूबर 2025 को कैनकून से न्यूयार्क जा रही ब्‍लूजेट का A320 प्‍लेन कुछ सेकेड्स के लिए पिच-डाउन हुआ. इस घटना में प्‍लेन में सवार करीब 15 पैसेंजर घायल हो गए. फ्रेंच एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (BEA) ने अपनी जांच इस घटना के लिए एलीवेटर एंड एइलरॉन कंप्यूटर (ELAC) को जिम्‍मेदार ठहराया. वहीं, एयरबस ने अपनी एनालिसिस में ELAC को सोलर रेडिएशन से जोड़ दिया. इसके बाद, यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने एक इमरजेंसी एयरवर्दिनेस डायरेक्टिव (ईएडी) जारी कर सभी एयरलाइंस को निर्देश दिया कि A320 फैमिली के प्‍लेन्‍स को ELAC सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन के बिना उड़ने न दिया जाए.
वहीं, ईएडी को आधार बनाते हुए एयरबस ने भी एयरलाइंस ऑपरेटर्स के लिए अलर्ट ऑपरेटर्स ट्रांसमिशन जारी कर दिया. नतीजा यह हुआ कि एयरबस ने A320 फेमली के प्‍लेन को ग्राउंड कर दिया गया. इस डेवलपमेंट की वजह से भारत सहित पूरी दुनिया में फ्लाइट्स कैंसिलेशन का सिललिसा शुरू हो गया. अब इस घटना को लेकर पैसेंजर्स के दिमाग मे पहला सवाल यह है कि सोलर रेडिएशन फ्लाइट सेफ्टी के लिए खतरा कैसे हो सकती है. साथ ही, कौतूहल इस बात को लेकर मचा हुआ है कि रेडिएशन से सिर्फ एयरबस के प्‍लेन्‍स को ही खतरा क्‍यों है? सोलर एडिएशन हमेशा से मौजूद रही हैं तो अब वह खतरनाक कैसे हो गई.
  • सोलर रेडिएशन तो हमेशा से पर्यावरण का हिस्‍सा रहा है, अब ऐसा क्‍या हुआ कि वह इतना खतरनाक हो गईं?

    सोलर रेडिएशन हमेशा से पर्यावरण का हिस्‍सा भी रहा है और एविएशन के लिए यह पुरानी और ज्ञात हकीकत है. एयरबस A320 का मौजूदा मामला एक स्पेसिफिक सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की वल्नरेबिलिटी को लेकर है, जिसकी पहचान 30 अक्‍टूबर को हुई घटना के बाद की गई है, जो सोलर स्टॉर्म्स की वजह से ट्रिगर हुई है. आपको बता दें कि सूरज की एक्टिविटी 11 साल के सोलर साइकल के पीक पर है; नवंबर 2025 में X5.1 क्लास की शक्तिशाली सोलर फ्लेयर और उससे जुड़ी S2‑लेवल सोलर रेडिएशन स्टॉर्म, G4 लेवल की जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म और ग्राउंड‑लेवल एनहांसमेंट जैसे इवेंट हाल में दर्ज किए गए, जिनसे हाई‑ ऐल्टिट्यूड और पोलर रूट्स पर रेडिएशन और रेडियो डिसरप्शन बढ़ा है.
  • सूरज के रेडिएशन की वजह से एयरबस के A-320 प्‍लेन्‍स को ही खतरा क्‍यों है?
    एयरबस A320 फैमिली में समस्या एलीवेटर एंड एइलरॉन कंप्यूटर (ELAC) के कुछ पुराने वर्जन की वजह से है. दरअसल, एयरबस A-320 फैमिली के जिन एयरक्राफ्ट में L104 या इससे नीचे के सॉफ्टवेयर में है, उनमें इंटेंस सोलर रेडिएशन की वजह से डेटा करप्शन हो सकता है. यह करप्‍शन अनकमांडेड एलेवेटर मूवमेंट पैदा कर सकता है, जिसमें पिच डाउन की संभावना भी शामिल है. हालांकि इसे ऑटोपायलट से सुधारा जा सकता है, पर खराब परिस्थितियों में आपदा की स्थिति हो सकती है. जहां तक फ्लाइट सेफ्टी का सवाल है तो एयरबस A320 फैमिली और सूरज के रेडिएशन का मामला खासतौर पर कम्प्यूटर डेटा करप्शन से जुड़ा है. इससे प्‍लेन के स्ट्रक्चरल सेफ्टी को कोई खतरा नहीं है.
  • क्‍या पहले भी सोलर रेडिएशन की वजह से फ्लाइट ऑपरेशन में किसी तरह की दिक्‍कत देखी गई है?
    कॉस्मिक और सोलर रेडिएशन से जुड़ी घटनाएं पहले भी दर्ज की गई हैं. 2008 में क्‍वांटस एयरलाइंस की फ्लाइट 72 के लिए एयरबस A330 को तैनात किया गया था. फ्लाइट के दौरान अचानक दो बार तेज पिच‑डाउन हुआ, जिसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हुए. इस घटना की जांच में पाया गया कि एयर डेटा इनर्शियल रेफरेंस यूनिट में संभावित कॉस्‍मिक रे बिट फ्लिप की वजह से यह घटना हुई. बाद में फ्लाइट सेफ्टी को ध्‍यान में रखते हुए सॉफ्टवेयर और प्रोसीजर में महत्‍वपूर्ण बदलाव किए गए थे. इसके बाद, Boeing 737 MAX के री‑सर्टिफिकेशन के समय भी रेगुलेटर्स ने कॉस्मिक रे बिट फ्लिप सिमुलेशन टेस्ट किए. जांच में पाया कि अगर मेमोरी बिट्स बदल जाएं तो पायलट सिमुलेटेड कंट्रोल खो सकते हैं.

यूरोप की विमान निर्माता कंपनी एयरबस ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर बताया कि वह अपने ए320 बेड़े के विमानों को वापस बुला रही है। दरअसल विमानों में सॉफ्टवेयर बदलाव के चलते कंपनी ने यह फैसला किया है। हालांकि कंपनी के इस फैसले का असर पूरी दुनिया पर होगा और हवाई यातायात बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है।

6000 विमान वापस बुलाएगी कंपनी
एयरबस के मौजूदा समय में करीब 11,300 ए320 विमान संचालित हो रहे हैं, जिनमें से कंपनी करीब 6000 ए320 परिवार के विमानों को रिकॉल कर रही है। यह पूरी दुनिया के विमानों के बेड़े की करीब आधी संख्या है। अब जब क्रिसमस के आसपास हवाई यातायात बढ़ जाता है, तो उस समय एयरबस का अपने विमानों को वापस बुलाना पूरी दुनिया में हवाई यातायात को प्रभावित करेगा। इसके चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

एयरबस के 55 साल के इतिहास में इसे सबसे बड़ा रिकॉल बताया जा रहा है। इस समय एयरबस के ए320 विमान दुनियाभर की एयरलाइंस द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। स्थिति ये है कि जब कंपनी ने विमानों को वापस बुलाने का बयान जारी किया, उस वक्त दुनियाभर के 350 से ज्यादा ऑपरेटर्स के 3000 ए320 विमान उड़ान भर रहे थे।

विमानों में सॉफ्टवेयर में बदलाव किया जाना है, जो बहुत ज्यादा मुश्किल काम नहीं है, लेकिन इसके लिए विमानों को रिपेयर सेंटर में रिपोजिशन करके की जरूरत होगी जिसमें हर विमान में कम से कम दो घंटे का समय लग सकता है। अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, चीन, यूरोप, भारत और न्यूजीलैंड समेत दुनिया के कई देशों में इसके चलते उड़ान सेवाएं बाधित हो सकती हैं या उनमें देरी हो सकती है।

अमेरिका और चीन की एयरलाइंस बड़े पैमाने पर ए320 विमानों का इस्तेमाल करती हैं
एयरबस पहले ही बड़े पैमाने पर विमानों की मरम्मत कर रही है, जिससे उसका मेंटिनेंस विभाग पहले ही दबाव में है। साथ ही कंपनी के पास कर्मचारियों की भी कमी है। यही वजह है कि हवाई यातायात के सामान्य होने में लंबा वक्त लग सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी अमेरिकन एयरलाइंस के पास ए320 बेड़े के विमानों की संख्या सबसे ज्यादा है। अमेरिकन एयरलाइंस अभी ए319 मॉडल के 129 विमानों, ए320 मॉडल के 47 विमानों और ए321 मॉडल के 299 विमानों का संचालन करती है। इस तरह कंपनी के पास ए320 फैमिली के 475 विमान हैं। भारत की इंडिगो एयरलाइंस के पास 312 विमान हैं।

एअर इंडिया ने कहा- हमारे इंजीनियर चौबीसों घंटे काम कर रहे
एअर इंडिया ने भी बयान जारी कर कहा कि ‘एअर इंडिया में सुरक्षा सबसे जरूरी है। दुनिया भर में A320 वर्ग के विमानों में जरूरी सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर रीअलाइनमेंट के लिए EASA और एयरबस के निर्देशों के बाद, हमारे इंजीनियर इस काम को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। हमने अपने 40% से ज़्यादा विमानों की मरम्मत का काम पहले ही पूरा कर लिया है। हमें भरोसा है कि EASA द्वारा तय समयसीमा के अंदर पूरे बेड़े को कवर कर लेंगे। एअर इंडिया पुष्टि करती है कि इस काम की वजह से कोई उड़ान रद्द नहीं हुई है और हमारे पूरे नेटवर्क में शेड्यूल पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। हालांकि, हमारी कुछ फ़्लाइट्स थोड़ी लेट हो सकती हैं या रीशेड्यूल हो सकती हैं। जमीन पर हमारे कर्मचारी साथी यात्रियों की मदद के लिए मौजूद हैं।’

डीजीसीए ने जारी किया नोटिफिकेशन
नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) ने भी एयरबस A318, A319, A320 और A321 विमानों के लिए जरूरी सुरक्षा निर्देश जारी किया है। नोटिफिकेशन में लिखा है, ‘यह पक्का किया जाना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति ऐसे उत्पाद को संचालित न करे जो जरूरी मॉडिफिकेशन के तहत आते हैं।’

Airbus Planes & Solar Radiation Risk: 30 अक्‍टूबर 2025 को कैनकून से न्यूयार्क जा रही ब्‍लूजेट का A320 प्‍लेन कुछ सेकेड्स के लिए पिच-डाउन हुआ. इस घटना में प्‍लेन में सवार करीब 15 पैसेंजर घायल हो गए. फ्रेंच एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (BEA) ने अपनी जांच इस घटना के लिए एलीवेटर एंड एइलरॉन कंप्यूटर (ELAC) को जिम्‍मेदार ठहराया. वहीं, एयरबस ने अपनी एनालिसिस में ELAC को सोलर रेडिएशन से जोड़ दिया. इसके बाद, यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने एक इमरजेंसी एयरवर्दिनेस डायरेक्टिव (ईएडी) जारी कर सभी एयरलाइंस को निर्देश दिया कि A320 फैमिली के प्‍लेन्‍स को ELAC सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन के बिना उड़ने न दिया जाए.
वहीं, ईएडी को आधार बनाते हुए एयरबस ने भी एयरलाइंस ऑपरेटर्स के लिए अलर्ट ऑपरेटर्स ट्रांसमिशन जारी कर दिया. नतीजा यह हुआ कि एयरबस ने A320 फेमली के प्‍लेन को ग्राउंड कर दिया गया. इस डेवलपमेंट की वजह से भारत सहित पूरी दुनिया में फ्लाइट्स कैंसिलेशन का सिललिसा शुरू हो गया. अब इस घटना को लेकर पैसेंजर्स के दिमाग मे पहला सवाल यह है कि सोलर रेडिएशन फ्लाइट सेफ्टी के लिए खतरा कैसे हो सकती है. साथ ही, कौतूहल इस बात को लेकर मचा हुआ है कि रेडिएशन से सिर्फ एयरबस के प्‍लेन्‍स को ही खतरा क्‍यों है? सोलर एडिएशन हमेशा से मौजूद रही हैं तो अब वह खतरनाक कैसे हो गई.
  • सोलर रेडिएशन तो हमेशा से पर्यावरण का हिस्‍सा रहा है, अब ऐसा क्‍या हुआ कि वह इतना खतरनाक हो गईं?

    सोलर रेडिएशन हमेशा से पर्यावरण का हिस्‍सा भी रहा है और एविएशन के लिए यह पुरानी और ज्ञात हकीकत है. एयरबस A320 का मौजूदा मामला एक स्पेसिफिक सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की वल्नरेबिलिटी को लेकर है, जिसकी पहचान 30 अक्‍टूबर को हुई घटना के बाद की गई है, जो सोलर स्टॉर्म्स की वजह से ट्रिगर हुई है. आपको बता दें कि सूरज की एक्टिविटी 11 साल के सोलर साइकल के पीक पर है; नवंबर 2025 में X5.1 क्लास की शक्तिशाली सोलर फ्लेयर और उससे जुड़ी S2‑लेवल सोलर रेडिएशन स्टॉर्म, G4 लेवल की जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म और ग्राउंड‑लेवल एनहांसमेंट जैसे इवेंट हाल में दर्ज किए गए, जिनसे हाई‑ ऐल्टिट्यूड और पोलर रूट्स पर रेडिएशन और रेडियो डिसरप्शन बढ़ा है.
  • सूरज के रेडिएशन की वजह से एयरबस के A-320 प्‍लेन्‍स को ही खतरा क्‍यों है?
    एयरबस A320 फैमिली में समस्या एलीवेटर एंड एइलरॉन कंप्यूटर (ELAC) के कुछ पुराने वर्जन की वजह से है. दरअसल, एयरबस A-320 फैमिली के जिन एयरक्राफ्ट में L104 या इससे नीचे के सॉफ्टवेयर में है, उनमें इंटेंस सोलर रेडिएशन की वजह से डेटा करप्शन हो सकता है. यह करप्‍शन अनकमांडेड एलेवेटर मूवमेंट पैदा कर सकता है, जिसमें पिच डाउन की संभावना भी शामिल है. हालांकि इसे ऑटोपायलट से सुधारा जा सकता है, पर खराब परिस्थितियों में आपदा की स्थिति हो सकती है. जहां तक फ्लाइट सेफ्टी का सवाल है तो एयरबस A320 फैमिली और सूरज के रेडिएशन का मामला खासतौर पर कम्प्यूटर डेटा करप्शन से जुड़ा है. इससे प्‍लेन के स्ट्रक्चरल सेफ्टी को कोई खतरा नहीं है.
  • क्‍या पहले भी सोलर रेडिएशन की वजह से फ्लाइट ऑपरेशन में किसी तरह की दिक्‍कत देखी गई है?
    कॉस्मिक और सोलर रेडिएशन से जुड़ी घटनाएं पहले भी दर्ज की गई हैं. 2008 में क्‍वांटस एयरलाइंस की फ्लाइट 72 के लिए एयरबस A330 को तैनात किया गया था. फ्लाइट के दौरान अचानक दो बार तेज पिच‑डाउन हुआ, जिसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हुए. इस घटना की जांच में पाया गया कि एयर डेटा इनर्शियल रेफरेंस यूनिट में संभावित कॉस्‍मिक रे बिट फ्लिप की वजह से यह घटना हुई. बाद में फ्लाइट सेफ्टी को ध्‍यान में रखते हुए सॉफ्टवेयर और प्रोसीजर में महत्‍वपूर्ण बदलाव किए गए थे. इसके बाद, Boeing 737 MAX के री‑सर्टिफिकेशन के समय भी रेगुलेटर्स ने कॉस्मिक रे बिट फ्लिप सिमुलेशन टेस्ट किए. जांच में पाया कि अगर मेमोरी बिट्स बदल जाएं तो पायलट सिमुलेटेड कंट्रोल खो सकते हैं.
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PM मोदी आज लॉन्च करेंगे देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन

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January 19, 2026
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मोदी कैबिनेट ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 3400 करोड़ रुपये किये मंजूर,UPI पर इंसेंटिव देने की योजना को भी ,इली मंजूरी

मोदी सरकार ला रही नई स्कीम, राहवीरों को मिलेंगे 25 हजार……….

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January 9, 2026
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