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प्रधानमंत्री मोदी आज कर्नाटक और गोवा के दौरे पर , उडुपी स्थित श्री कृष्ण मठ और जीवोत्तम मठ के दर्शन किये ……….

UB India News by UB India News
November 29, 2025
in अध्यात्म, केंद्रीय राजनीती
0
प्रधानमंत्री मोदी आज कर्नाटक और गोवा के दौरे पर , उडुपी स्थित श्री कृष्ण मठ और जीवोत्तम मठ के दर्शन किये  ……….
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 28 नवंबर को कर्नाटक और गोवा का दौरा करेंगे। सुबह लगभग 11:30 बजे प्रधानमंत्री कर्नाटक के उडुपी स्थित श्री कृष्ण मठ के दर्शन करेंगे। इसके बाद, वे गोवा जाएंगे, जहां दोपहर लगभग 3:15 बजे वे श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ के 550वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सार्ध पंचशतामनोत्सव’ में भाग लेंगे।

उडुपी में प्रधानमंत्री

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प्रधानमंत्री उडुपी में श्री कृष्ण मठ का दौरा करेंगे और लक्ष कंठ गीता पारायण कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसमें छात्रों, भिक्षुओं, विद्वानों और विभिन्न क्षेत्रों के नागरिकों सहित एक लाख प्रतिभागी भाग लेंगे, जो एक स्वर में श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करेंगे।

प्रधानमंत्री कृष्ण गर्भगृह के सामने स्थित सुवर्ण तीर्थ मंडप का भी उद्घाटन करेंगे और पवित्र कनकना किंदी के लिए कनक कवच (स्वर्ण कवच) समर्पित करेंगे। कनकना किंदी एक पवित्र द्वार है। ऐसा माना जाता है कि संत कनकदास ने इसी द्वार से भगवान कृष्ण के दिव्य दर्शन किए थे। उडुपी स्थित श्री कृष्ण मठ की स्थापना 800 वर्ष पूर्व वेदांत के द्वैत दर्शन के संस्थापक श्री माधवाचार्य ने की थी।

गोवा में प्रधानमंत्री

श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ के 550वें वर्ष के उत्सव ‘सार्ध पंचशतामनोत्सव’ के अवसर पर प्रधानमंत्री दक्षिण गोवा के कैनाकोना स्थित मठ के दर्शन करेंगे।

प्रधानमंत्री श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ में प्रभु श्री राम की 77 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे और मठ द्वारा विकसित ‘रामायण थीम पार्क गार्डन’ का भी उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री इस अवसर पर विशेष डाक टिकट और एक स्मारक सिक्का भी जारी करेंगे और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करेंगे।

श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ, पहला गौड़ सारस्वत ब्राह्मण वैष्णव मठ है। यह द्वैत संप्रदाय का अनुसरण करता है, जिसकी स्थापना जगद्गुरु माधवाचार्य ने 13वीं शताब्दी में की थी। इस मठ का मुख्यालय कुशावती नदी के तट पर, दक्षिण गोवा के एक छोटे से कस्बे पर्तगाली में स्थित है।

‘गीता ने सिखाया- अत्याचारियों का अंत भी जरूरी’, कर्नाटक के उडुपी में बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने एकदिवसीय कर्नाटक दौरे पर पहुंच गए हैं। जहां उडुपी में जगद्गुरु श्री श्री सुगुनेंद्र तीर्थ स्वामीजी ने विश्व गीता पर्याय- लक्ष्य कंठ गीता परायण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन किया।

‘उडुपी जनसंघ और भाजपा के सुशासन मॉडल की कर्मभूमि’
इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘उडुपी आना मेरे लिए खास इसलिए भी है क्योंकि उडुपी जनसंघ और भाजपा के सुशासन मॉडल की कर्मभूमि रही है। 1968 में, उडुपी के लोगों ने हमारे जनसंघ के वी.एस. आचार्य को यहां के नगरपालिका परिषद में जिताया था… आज हम देश भर में जो स्वच्छता अभियान देख रहे हैं, उसे उडुपी ने पांच दशक पहले अपनाया था…’

ऊर्जा अध्यात्म की शक्ति भी है- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, ‘हमारे समाज में मंत्रों, गीता के श्लोकों का पाठ शताब्दियों से हो रहा है पर जब एक लाख कंठ एक स्वर में इन श्लोकों का ऐसा उच्चारण करते हैं… तो ऐसी ऊर्जा निकलती है जो हमारे मन, मस्तिष्क को एक नया स्पंदन, नई शक्ति देती है… यही ऊर्जा अध्यात्म की शक्ति भी है, यही ऊर्जा सामाजिक एकता की शक्ति है इसलिए आज लक्ष कंठ गीता का ये अवसर एक विशाल ऊर्जा पिंड को अनुभव करने का अवसर बन गया है।’

‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति भगवान श्रीकृष्ण के श्लोकों से प्रेरित- पीएम
पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, ‘यहां आने से तीन दिन पहले मैं अयोध्या में था। 25 नवंबर को विवाह पंचमी के पावन दिन अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में धर्म ध्वजा की स्थापना हुई है… राम मंदिर आंदोलन में उडुपी की भूमिका कितनी बड़ी है सारा देश इसे जानता है।’ उन्होंने कहा, ‘आज हमारी ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’ की नीतियां भगवान श्री कृष्ण के इन श्लोकों से प्रेरित हैं। भगवान श्री कृष्ण हमें गरीबों की मदद करने का मंत्र देते हैं और इसी मंत्र की प्रेरणा आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं का आधार बनती है… भगवान श्री कृष्ण हमें महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण का ज्ञान सिखाते हैं और इन्हीं की प्रेरणा से देश नारी शक्ति वंदन अधिनियम का ऐतिहासिक फैसला लेता है।’

‘देश ने ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई में हमारा संकल्प देखा’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, ‘श्री कृष्ण ने युद्ध की भूमि पर गीता का संदेश दिया था और भगवत गीता हमें सिखाती है कि शांति और सत्य की स्थापना के लिए अत्याचारियों का अंत भी जरूरी है… हम लाल किले की प्राचीर से श्री कृष्ण की करुणा का संदेश देते हैं और उसी प्राचीर से हम मिशन सुदर्शन चक्र का भी उद्घोष करते हैं… देश ने ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई में हमारा संकल्प देखा है… हम शांति स्थापित करना भी जानते हैं और शांति की रक्षा करना भी जानते हैं।’

‘सुवर्ण तीर्थ मंतप’ का उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी
अपने इस दौरे के दौरान पीएम मोदी ‘सुवर्ण तीर्थ मंतप’ का उद्घाटन करेंगे, जो भगवान कृष्ण के गर्भगृह के सामने बनाया गया है। इसके अलावा वे ‘कनक कवच’ भी समर्पित करेंगे। यह कनाकाना किंदी पर स्वर्ण आवरण है, जहां से भक्त और संत कनकदास ने पहली बार भगवान कृष्ण के दर्शन किए थे। श्री कृष्ण मठ की स्थापना करीब 800 साल पहले श्री मध्वाचार्य ने की थी, जो द्वैत वेदांत दर्शन के संस्थापक थे।

श्री कृष्ण मठ से खूबसूरत बीच तक, उडुपी की 10 खूबियां जहां PM मोदी का दौरा

कर्नाटक का तटीय रत्न उडुपी आज सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी भर नहीं, बल्कि शिक्षा, पर्यटन, प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक विकास का भी केंद्र बन चुका है. इस शहर की स्थापना 13 वीं शताब्दी में वैष्णव संत माधवाचार्य ने की थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज का उडुपी दौरा इस शहर को राष्ट्रीय सुर्खियों में ले आया है. वे वहां श्री कृष्ण मठ पहुंचकर लक्ष कंठ गीता पारायण कार्यक्रम में शामिल होंगे.

आइए इसी बहाने उडुपी की उन खास खूबियों को जान लें जो इसे भारत के मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाती हैं. जानिए, उडुपी की 10 प्रमुख खूबियां जो इसके खास बनाती हैं.

1- उडुपी श्रीकृष्ण मंदिर की दिव्यता

उडुपी का नाम लेते ही सबसे पहले श्रीकृष्ण मंदिर की छवि आंखों के सामने उभर आती है. यह मंदिर मध्यकालीन संत श्री माधवाचार्य की परंपरा से जुड़ा है और वैष्णव भक्तों के लिए आस्था का अत्यंत पवित्र केंद्र माना जाता है. मंदिर की सबसे अनूठी बात यह है कि यहां कृष्ण के दर्शन एक छोटी सी खिड़की जिसे कान्हा का नवरंध्र या कनकणा किंडी कहा जाता है, से किए जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार भक्त कवि कनकदास को इसी झरोखे से दर्शन हुए थे. मंदिर परिसर की शांत, अनुशासित और आध्यात्मिक वातावरण से भरी दिनचर्या, यथा मंगला आरती, भोग, सांय आरती और वैदिक मंत्रोच्चार आदि उडुपी को देश भर के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती है.

Balkrishna Temple Or Udupi Sri Krishna Matha In Udupi

श्रीकृष्ण मंदिर.

2- आठ मठों की अद्भुत परंपरा

उडुपी की दूसरी बड़ी विशेषता यहां की अष्टमठ परंपरा है. श्री माधवाचार्य ने श्रीकृष्ण मंदिर की सेवा और प्रशासन के लिए आठ मठोंपेजावर, अडमारु, कृष्णपुर, पलिमरु, पुत्तिगे, शिरूर, सोढ़े और कणियूर की स्थापना की थी. इन मठों के बीच पूजा अर्चना और प्रबंधन की ज़िम्मेदारी निश्चित क्रम से बदलती रहती है, जिसे पर्याय कहा जाता है. हर पर्याय के समय पूरे उडुपी में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है और हजारों श्रद्धालु दूर दूर से पहुंचते हैं. यह अनूठी व्यवस्था धर्म, अनुशासन और सामूहिक प्रबंधन का ऐसा उदाहरण है जो किसी भी आधुनिक संस्थागत व्यवस्था के लिए प्रेरणा बन सकती है.

Sri Krishna Temple In Udupi, Karnataka

श्रीकृष्ण मंदिर वैष्णव भक्तों के लिए आस्था का अत्यंत पवित्र केंद्र माना जाता है.

3- समुद्र तटों की स्वच्छता और सौंदर्य

उडुपी को प्रकृति ने सुंदर तटरेखा का बड़ा उपहार दिया है. मालपे, कापु, पडुबिद्री और मत्तू जैसे समुद्र तट अपने स्वच्छ रेत, नीले समुद्र और शांत वातावरण के लिए जाने जाते हैं. खासकर मालपे बीच से कुछ दूरी पर स्थित सेंट मेरी आइलैंड अपनी अनोखी चट्टानों और प्राकृतिक संरचनाओं के कारण पर्यटकों का विशेष आकर्षण है. उडुपी के समुद्र तटों की सबसे बड़ी खूबी यहाँ की अपेक्षाकृत कम भीड़ और साफ सफाई है, जिसके कारण परिवारों और शांत वातावरण पसंद करने वाले यात्रियों के लिए यह एक आदर्श गंतव्य बन जाता है.

4- उडुपी व्यंजन और शाकाहारी खानपान की पहचान

उडुपी का योगदान भारतीय भोजन संस्कृति में अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है. उडुपी कुज़ीन आज पूरे विश्व में शुद्ध शाकाहारी भोजन की एक विश्वसनीय शैली बन चुका है. सांभर, रसम, डोसा, इडली, वड़ा, उपमा से लेकर खास तरह की चटनी और पायसम जैसे व्यंजन उडुपी की रसोई से ही लोकप्रिय हुए. यहां के मंदिरों में मिलने वाला प्रसाद और अन्नदान की परंपरा, बिना लहसुन प्याज़ के भी स्वादिष्ट और संतुलित भोजन तैयार करने की कला सिखाती है. यही कारण है कि देश विदेश में सैकड़ों रेस्तरां स्वयं को उडुपी होटल कहकर अपनी विश्वसनीयता और शुद्धता का भरोसा दिलाते हैं.

Udupi Temple Prasadam

मंदिर में प्रसाद ग्रहण करते भक्त.

5- शिक्षा और तकनीकी संस्थानों का उभरता हब

उडुपी और इसके आसपास का क्षेत्र उच्च शिक्षा, विशेषकर तकनीकी और प्रोफेशनल कोर्सेज का एक बड़ा केंद्र बन गया है. पास ही स्थित मणिपाल विश्वविद्या भवन क्षेत्र, जिसे आमतौर पर मणिपाल यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त है. मेडिकल, इंजीनियरिंग, फार्मेसी, मैनेजमेंट और कई अन्य कोर्स के लिए देश विदेश से छात्र यहां आते हैं. शिक्षा पर यह मजबूत फोकस उडुपी को युवाओं, शोध और नवाचार का शहर भी बना रहा है, जहाँ पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक शिक्षा साथ साथ आगे बढ़ते दिखते हैं.

6- सांस्कृतिक और लोक परंपराओं की समृद्धि

उडुपी सिर्फ मंदिरों का शहर नहीं, बल्कि लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं का भी घर है. यक्षगान जैसे पारंपरिक नृत्य नाट्य रूप यहां की पहचान हैं, जिनमें धार्मिक और पौराणिक कथाओं को रात भर संगीत, नृत्य और संवाद के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है. इसके अलावा दशहरा, दीपावली, कृष्ण जन्माष्टमी, पर्याय महोत्सव और स्थानीय जत्राएँ इस क्षेत्र के सामाजिक जीवन को जीवंत बनाती हैं. मंदिरों में होने वाली रथ-यात्राए और भव्य शोभा-यात्राएँ समुदाय के बीच एकता और भागीदारी की भावना को और मजबूत करती हैं.

Udupi

उडुपी खुबसूरत तट के लिए भी जाना जाता है.

7- प्राकृतिक हरियाली और बैकवॉटर सौंदर्य

समुद्र तटों के अलावा उडुपी की एक और बड़ी खूबी इसकी हरियाली और बैकवॉटर यानी नदी झीलों का शांत सौंदर्य है. नारियल के घने बागान, धान के हरे-भरे खेत और बीच बीच से गुजरती नदियां एक बेहद सुकून देने वाला दृश्य प्रस्तुत करती हैं. मानसून के दिनों में यह क्षेत्र और भी अधिक हरा भरा हो जाता है, जब बादलों से ढकी पहाड़ियां और बरसात से तर बतर पेड़ पौधे प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा अनुभव कराते हैं. पर्यावरण के साथ अपेक्षाकृत संतुलित विकास ने उडुपी को इको टूरिज्म के लिए भी एक अनुकूल स्थान बना दिया है.

8- तीर्थ और पर्यटन का संतुलित विकास

उडुपी में धार्मिक तीर्थों और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के बीच जो संतुलन दिखाई देता है, वह इसकी एक महत्वपूर्ण विशेषता है. एक ओर जहां श्रीकृष्ण मंदिर और अन्य प्राचीन मंदिर लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं, वहीं दूसरी ओर यहां के रिसॉर्ट, होटेल, होम स्टे और एडवेंचर एक्टिविटीज़ युवा पीढ़ी और परिवारों को भी समान रूप से लुभाते हैं. स्थानीय प्रशासन और समाज ने मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि तीर्थ स्थलों की पवित्रता बनी रहे, साथ ही पर्यटकों के लिए स्वच्छता, सुरक्षा और सुविधाओं में निरंतर सुधार होता रहे. यह संतुलन उडुपी को एक शानदार डेस्टिनेशन के रूप में पहचान देता है.

9- उद्यमिता, एनआरआई समुदाय और आर्थिक प्रगति

उडुपी के लोग मेहनतकश, अनुशासित और उद्यमी माने जाते हैं. दक्षिण भारत के कई प्रसिद्ध बैंक, होटल चेन और व्यवसायिक समूहों की जड़ें कहीं न कहीं उडुपी और आसपास के जिलों में मिलती हैं. बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका में काम करते हैं या व्यवसाय कर रहे हैं, जिनका योगदान स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है. विदेशों में बसे उडुपी मूल के लोगों का अपने शहर से भावनात्मक जुड़ाव यहाँ की शिक्षा, स्वास्थ्य, धर्मस्थलों और सामाजिक परियोजनाओं में होने वाले दान और निवेश में साफ दिखता है. इससे उडुपी की आर्थिक प्रगति को लगातार नई गति मिलती रहती है.

10- आधुनिक भारत के विज़न से जुड़ता उडुपी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उडुपी दौरे को इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है कि यह शहर आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक विकास के उस मॉडल का प्रतीक है, जिसकी बात आज नए भारत की परिकल्पना में बार बार की जाती है. स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, पर्यटन विकास, स्किल डेवलपमेंट और उच्च शिक्षा जैसे अनेक राष्ट्रीय अभियानों के संदर्भ में उडुपी एक स्वाभाविक साझेदार के रूप में उभर रहा है. यहां की शांतिप्रिय सामाजिक संरचना, धार्मिक सहिष्णुता और प्रगतिशील सोच यह संदेश देती है कि भारत की वास्तविक ताकत उसकी विविधता और संतुलित विकास में निहित है. पीएम मोदी का यह दौरा न सिर्फ सरकारी योजनाओं की गति को बढ़ाने का अवसर है, बल्कि उडुपी जैसी नगरियों को पूरे देश के सामने प्रेरक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने का भी एक महत्वपूर्ण क्षण है.

क्या है उडुपी का मतलब?

माना जाता है कि उडुपी नाम उसके तुलु नाम ओडिपु से निकला है. तुलु भाषा का यह नाम आगे चलकर मालपे के एक मंदिर से जुड़ा हुआ है, जो वडभंडेश्वर को समर्पित है. एक अन्य कथा के अनुसार, उडुपी नाम संस्कृत के दो शब्दों उडु और पा से बना है, जिनका अर्थ क्रमशः तारे और स्वामी (या देवता) होता है.

किंवदंती है कि कभी चंद्रमा की चमक राजा दक्ष के शाप के कारण कम हो गई थी. राजा दक्ष की 27 बेटियां (जो हिंदू ज्योतिष के अनुसार 27 नक्षत्र या तारे मानी जाती हैं) चंद्रमा की पत्नियां थीं. शाप से मुक्ति पाने और अपनी मूल आभा वापस प्राप्त करने के लिए चंद्रमा ने भगवान शिव की आराधना की. भगवान शिव चंद्रमा की प्रार्थना से प्रसन्न हुए और चमक लौटा दी.

लोककथा यह भी बताती है कि चंद्रमा और उनकी पत्नियों ने उडुपी के चंद्रमौलीश्वर मंदिर में प्रार्थना की और वहीं उन्होंने एक लिंग की स्थापना की, जिसे आज भी देखा जा सकता है. इस कथा के अनुसार उडुपी का अर्थ हुआ तारों के स्वामी अर्थात चंद्रदेव की भूमि.

भगवान राम की 77 फीट ऊंची प्रतिमा का करेंगे अनावरण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को दक्षिण गोवा जिले के श्री संस्थान गोकर्ण जीवोत्तम मठ में भगवान राम की 77 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे। यह भगवान राम की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी। इसके अलावा, वह कर्नाटक का भी दौरा करेंगे।

श्री संस्थान गोकर्ण जीवोत्तम मठ के एक प्रतिनिधि ने बताया कि प्रधानमंत्री दोपहर 3:45 बजे मठ स्थित कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे।मठ की केंद्रीय समिति की अध्यक्ष श्रीनिवास डेम्पो ने कहा कि मठ के परिसर में एक विशेष हेलीपैड का निर्माण किया गया है। श्री राम की 77 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण प्रधानमंत्री के हाथों किया जाएगा।

गोवा के लोक निर्माण विभाग के मंत्री दीपांबर कामत ने कहा कि इस प्रतिमा को गुजरात में ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण करने वाले शिल्पकार राम सुतार ने बनाया है। यह भगवान राम की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी। मोदी मठ में स्थित मंदिर का दौरा कर एक सभा को संबोधित करेंगे। मठ परंपरा के 550 वर्षों के उपलक्ष्य में 27 नवंबर से सात दिसंबर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

गोवा में मठ का परिसर 370 वर्ष पहले कोंकण (दक्षिण गोवा जिले) के पार्टागल गांव में स्थापित था। मठ के परिसर को पूरी तरह से नवीनीकरण किया गया है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी कृष्ण गर्भगृह के सामने स्थित सुवर्ण तीर्थ मंडप का उद्घाटन करेंगे। वे पवित्र कणक कंडी के लिए कणक कवच (स्वर्ण आवरण) भी समर्पित करेंगे, जो एक पवित्र खिड़की है, जिसके माध्यम से संत कणकदास का भगवान कृष्ण का दिव्य दर्शन हुआ था।

धनुष-बाण लिए है भगवान राम की प्रतिमा

भगवान राम की ये प्रतिमा नोएडा के प्रसिद्ध मूर्तिकार के मार्गदर्शन में बनाई गई है. इस मूर्तिकार का नाम राम सुतार है. ये राम सुतार वही हैं, जिन्होंने गुजरात में स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को डिजाइन किया था. हाथ में धनुष-बाण लिए भगवान राम की ये प्रतिमा बनाई गई है. भगवान राम की इस प्रतिमा में दिव्यता व सौम्यता देखी और महसूस की जा सकती है.

श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवत्तम मठ का इतिहास

आज श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवत्तम मठ के 550 साल पूरे हुए हैं. इसी उपलक्ष्य में भगवान राम की सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण होगा. प्रतिमा के साथ-साथ एक रामायण थीम पार्क और राम संग्रहालय का भी निर्माण किया जा रहा है. बता दें कि श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ, पहला गौड़ सारस्वत ब्राह्मण वैष्णव मठ है.

यह द्वैत संप्रदाय का अनुसरण करता है, जिसकी स्थापना जगद्गुरु माधवाचार्य ने 13वीं शताब्दी में की थी. इस मठ का मुख्यालय कुशावती नदी के तट पर दक्षिण गोवा के एक छोटे से कस्बे पर्तगाली में स्थित है.

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