मध्यप्रदेश के धार में भोजशाला को लेकर विवाद में हिंदू पक्ष की नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का गुरुवार को फैसला आया. भोजशाला में बसंत पंचमी (Vasant Panchami) और शुक्रवार को जुमे की नमाज एक ही दिन होने के कारण ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि धार भोजशाला में वसंत पंचमी की पूजा और नमाज दोनों होगी. नमाज 1 से 3 बजे के बीच पढ़ी जा सकेगी.नमाज के लिए मंदिर परिसर में ही अलग से जगह निर्धारित होगी. पूजा और नमाज पढ़ने वालों के लिए विशेष पास की व्यवस्था होगी. वसंत पंचमी की पूजा के लिए भी अलग जगह निर्धारित होगी. पूजा के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है.
CJI सूर्यकांत , जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली ने सुनवाई की. हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर इस याचिका में शुक्रवार 23 जनवरी को ( बसंत पंचमी के दिन) वहां मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज से रोकने और सिर्फ हिंदूओं को ही मां सरस्वती की पूजा-अर्चना देने की इजाज़त की मांग की गई थी. हिंदू पक्ष की ओर से विष्णु शंकर जैन ने बहस की तो मुस्लिम पक्ष की ओर से सलमान खुर्शीद पेश हुए. तीन बार पहले ही बसंत पंचमी शु्क्रवार को पड़ चुकी है और जुमे के दिन ऐसा होने को लेकर विवाद पैदा हुआ था.
हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने दलील में कहा, सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा होती है.
राज्य सरकार – हम कानून व्यवस्था का ख्याल रखेंगे
CJI- दोनों समुदायों के लोग प्रार्थना कर सकते हैं ? कानून व्यवस्था का ध्यान रखा जाना चाहिए. कल के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं ? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जरूरत पड़ने पर दोनों समुदायों हिंदू और मुस्लिमों के लिए पूजा की विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए
CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा, इसका मतलब है कि बसंत पंचमी के लिए विशेष व्यवस्था करनी होगी. हिंदुओं की पूजा और मुस्लिमों की जुमे की नमाज के लिए व्यवस्था कीजिए. इस पर एमपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कोर्ट को आश्वस्त करते हुए कहा, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न हो
हिंदू पक्ष ने आग्रह किया, नमाज पांच बजे के बाद पढ़ी जा सकती है. तब तक हिंदुओं को पूजा की इजाजत दी जाए
चीफ जस्टिस: दोपहर 1 बजे तक हिंदू पूजा क्यों नहीं कर सकते? 1 से 3 बजे तक नमाज होगी, उसके बाद बसंत पंचमी की पूजा हो सकती है?
कोर्ट में क्या-क्या कहा गया?
सुनवाई के दौरान मस्जिद कमेटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने याचिका का विरोध किया. उन्होंने कहा कि ASI की रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे चलता रहेगा और नमाज़ दोपहर 1 से 3 बजे तक होगी, जबकि पूजा बाकी समय में हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले तीन बार इसी तरह के इंतजाम किए जा चुके हैं, इसलिए यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.
पूजा का मुहूर्त बना विवाद की जड़
हिंदू पक्ष की ओर से पेश वकील विष्णु जैन ने दलील दी कि बसंत पंचमी का मुहूर्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक होता है, इसलिए पूरे दिन पूजा की अनुमति मिलनी चाहिए. उन्होंने मांग की कि उस दिन भोजशाला में सिर्फ पूजा हो और नमाज़ को शाम 5 बजे के बाद कराया जाए.
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि कल बसंत पंचमी है, यह एक विशेष दिन है. वहीं जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि पूजा का मुख्य मुहूर्त दोपहर 1 बजे तक है, पहले पूजा पूरी हो जाए, उसके बाद नमाज़ कराई जा सकती है. CJI ने दोनों पक्षों से आपसी बातचीत कर समाधान निकालने को कहा. साथ ही यह भी पूछा कि प्रशासन ने कल के लिए क्या व्यवस्था की है. इस पर खुर्शीद ने जवाब दिया कि पहले भी ऐसे ही इंतजाम हो चुके हैं.
मध्यप्रदेश सरकार की ओर से नटराजन ने कहा कि दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग समय और व्यवस्था की जा सकती है, ताकि किसी तरह का टकराव न हो.
हिंदू संगठन हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने नई अर्जी दाखिल कर मांग की है कि 23 जनवरी को भोजशाला में सिर्फ हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी जाए और मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगे. इसी वजह से यह मामला बेहद संवेदनशील और अहम माना जा रहा है.
भोजशाला विवाद को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. सूत्रों के मुताबिक बसंत पंचमी के दिन 3000 से ज्यादा पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात रहेंगे. ड्रोन से निगरानी, CCTV, क्विक रिस्पॉन्स टीम और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे इलाके पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति न बने.







