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नए वोटर्स के लिए मिठाई बांटें, भारत दुनिया का तीसरा बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम- ‘मन की बात’

UB India News by UB India News
January 26, 2026
in केंद्रीय राजनीती
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पीएम मोदी ने मन की बात के 128वें संस्करण के साथ देश को किया संबोधित ………….
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पीएम मोदी आज ‘मन की बात’ के 130वें एपिसोड के जरिए लोगों से रूबरू हुए। पीएम मोदी ने कार्यक्रम में कहा कि यह साल 2026 का पहला ‘मन की बात’ कार्यक्रम है। कल हम गणतंत्र दिवस मनाएंगे। आज का दिन भी अहम है। आज हम नेशनल वोटर डे मना रहे हैं। आम तौर पर जब कोई 18 साल हो जाता है तो वह मतदाता बन जाता है। इसे जीवन का अहम पड़ाव माना जाता है, इसलिए बहुत जरूरी है कि देश में वोटर बनने का उत्सव मनाएं। जब कोई युवा पहली बार मतदाता बने तो एकजुट होकर उसका अभिनंदन करें और मिठाइयां बाटें, इससे जागरूकता बढ़ेगी। इससे यह भावना भी सशक्त होगी कि वोटर होना कितना मायने रखता है। मैं युवा साथियों से आग्रह करूंगा कि 18 साल का होने पर खुद को वोटर के रूप में रजिस्टर करें।

क्वालिटी पर दें जोर

पीएम मोदी ने कहा, “इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चल रहा है, जिसमें लोग 2016 की यादों का ताजा कर रहे हैं। दस साल पहले जनवरी 2016 में हमने भी एक जर्नी की शुरुआत की थी। हमें यह एहसास था कि ये भले छोटा हो, लेकिन ये देश के लिए अहम होगा। मैं जिस जर्नी की बात कर रहा हूं वह है स्टार्टअप इंडिया की जर्नी। इस जर्नी के हीरो हमारे युवा साथी हैं। युवाओं ने जो इनोवेशन किए, वो इतिहास में दर्ज हो रहे हैं। आज दुनिया में भारत तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप बन रहा है। आज भारत के स्टार्ट अप ऐसे काम कर रहे हैं जिसके बारे में दस साल पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। मैं अपने उन सभी युवा साथियों को सैल्यूट करता हूं जो किसी स्टार्टअप से जुड़े हैं। मैं एक आग्रह भी करना चाहता हूं कि भारत की इकॉनोमी तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे में हम सब पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। ये जिम्मेदारी है क्वालिटी पर जोर देने की। इस साल हम पूरी ताकत से क्वालिटी को प्राथमिकता दें। कल से आज बेहतर क्वालिटी। इंडियन प्रोटक्ट का मतलब बन जाए टॉप क्वालिटी।”

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समस्याओं का समाधाना खोजना हमारा स्वभाव

पीएम मोदी ने आगे कहा, “हमारे देश के लोग बहुत इनोवेटिव हैं। समस्याओं का समाधाना खोजना हमारे स्वभाव में है। ऐसा ही एक प्रयास यूपी के आजमगढ़ से सामने आया। यहां से होकर गुजरने वाली तमसा नदी को लोगों ने नया जीवन दिया है। अयोध्या से निकलकर गंगा में समाहित होने वाली यह नदी कभी यहां के लोगों के जनजीवन की धुरी हुआ करती थी। लेकिन प्रदूषण की वजह से इसकी अविरल धारा में रुकावट आने लगी थी। यहां के लोगों ने इसे एक नया जीवन देने का अभियान शुरू किया। नदी की सफाई की, किनारों पर पेड़ लगाए और सबके प्रयास से नदी का उद्धार हो गया। ऐसा ही एक प्रयास आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में भी देखने को मिला। यहां काफी समय से सूखा था। यहां के कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती थी। इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय लोगों ने जलाशयों को साफ करने का संकल्प लिया। यहां अनंत निरु संकल्प प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। करीब 10 जलाशयों को जीवनदान मिला। अब अनंतपुर में जल संरक्षण के साथ ग्रीन कवर भी बढ़ा है। यहां का पूरा इकोसिस्टम निखर गया है। आजमगढ़ या अनंतपुर कोई भी जगह हो ये देखकर खुशी होती है कि लोग एकजुट होकर संकल्प लेते हैं। यही हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।”

जेन-Z के बीच लोकप्रिय हो रही भजन क्लबिंग

पीएम मोदी ने कहा, “भजन और कीर्तन हमारी संस्कृति की ताकत रहे हैं। आज की पीढ़ी भी कुछ नए कमाल कर रही है। युवाओं ने भक्ति को अपने अनुभव और जीवनशैली में ढाल दिया है। आपने ऐसे वीडियो जरूर देखे होंगे, जिसमें युवा इकट्ठा होते हैं, संगीत होता है और माहौल किसी कंसर्ट से जरा भी कम नहीं होता है, लेकिन वहां पूरी तनमयता के साथ भजन गाया जा रहा होता है। इसे भजन क्लबिंग कहा जा रहा है। यह खासकर जेन-Z के बीच लोकप्रिय हो रहा है। ये देखकर अच्छा लगता है। भक्ति को हल्केपन में नहीं लिया जाता। मंच आधुनिक हो सकता है, लेकिन मूल भावना वही रहती है। आध्यात्म का निर्तर प्रवाह वहां अनुभव होता है। आज हमारी संस्कृति और त्योहार दुनियाभर में अपनी पहचान बना रहे हैं। मलेशिया में हमारा भारतीय समुदाय सराहनीय काम कर रहा है। मलेशिया में 500 से ज्यादा तमिल स्कूल हैं। इनमें तमिल के अलावा अन्य भाषाओं की भी पढ़ाई होती है।”

परिवार की ताकत से हर समस्या हो सकती है परास्त

उन्होंने आगे कहा, “हम भारत के किसी हिस्से में चले जाएं वहां कुछ न कुछ असाधारण दिख जाता है। इनसे पता चलता है कि हमारे समाज की असली शक्ति क्या है। गुजरात में बेचरा जी के चंदन की गांव की परंपरा अपने आप में अनूठी है। यहां के लोग अपने घरों में खाना नहीं बनाते, इसकी वजह गांव का शानदार कम्यूनिटी किचन है। इसमें एक साथ पूरे गांव का खाना बनता है और लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। बीते 15 सालों से यह परंपरा चलती आ रही है। अगर कोई बीमार है तो होम डिलिवरी की भी व्यवस्था है। ये पहल न केवल लोगों को आपस में जोड़ती है, बल्कि इससे पारिवारिक भावना को बढ़ावा मिलता है। भारत के पारिवारिक सिस्टम को इसे कौतूहल के तौर पर देखा जाता है। कुछ दिन पहले यूएई के राष्ट्रपति अल नाहयान भारत आए थे। उन्होंने बताया कि यूएई साल 2026 को ईयर ऑफ फैमिली के तौर पर मना रहा है। वाकई यह सराहनीय पहल है। जब परिवार और समाज की ताकत मिलती है तो हम बड़ी से बड़ी समस्या को परास्त कर सकते हैं।”

स्वच्छता को लेकर सजग हैं युवा

पीएम मोदी ने कहा, “मुझे ये देखकर गर्व होता है कि हमारे युवा अपने आसपास की स्वच्छता को लेकर सजग हैं। अरुणाचल प्रदेश में ऐसा ही एक मामला सामने आया। यहां ईटानगर में युवाओं का समुह उन हिस्सों की सफाई के लिए एकजुट हुआ, जहां इसकी जरूरत थी। युवाओं ने इसे अपना संकल्प बना लिया। इसके बाद कई इलाकों में ये अभियान चलाया गया। अबतक करीब 11 लाख किलो से अधिक कचरे की सफाई ये युवा कर चुके हैं। एक और उदाहरण असम के नौगांव का है। यहां कुछ लोगों ने अपनी गलियों को साफ करने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे इनके साथ और लोग जुड़ते गए। इनके साथ ऐसी टीम बन गई, जो गलियों को साफ करने में जुट गई। बेंगलुरु में कुछ प्रोफेशनल ‘सोफा वेस्ट’ को सॉल्व कर रहे हैं। चेन्नई में ऐसी ही एक टीम ने बेहतरीन काम किया है। इससे पता चलता है कि स्वच्छता से जुड़ा हर प्रयास कितना अहम है।”

पर्यावरण संरक्षण के लिए छोटे प्रयास जरूरी

आगे उन्होंने कहा, “जब पर्यावरण संरक्षण की बात होती है तो बड़ी योजनाएं और बड़े संगठन की बात आती है। कई बार बदलाव की शुरुआत साधारण तरीके से होती है। लगातार की गई छोटी कोशिशों से भी बड़े बदलाव आते हैं। पश्चिम बंगाल के कूंचबिहार के रहने वाले बैनोई दास ने ऐसा ही प्रयास किया है। उन्होंने खुद के पैसों से हजारों पेड़ लगाए हैं। अब इलाके में हरियाली काफी ज्यादा बढ़ गई है। पर्यावरण संरक्षण की यही भावना बड़े स्तर पर भी दिखाई दे रही है। इसी सोच के तहत एक पेड़ मां के नाम अभियान चलाया जा रहा है। अब तक देश में 200 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए जा चुके हैं। लोग अब पर्यावरण को लेकर ज्यादा जागरूक हैं।”

मिलेट को लेकर इनोवेशन कर रहे किसान

पीएम मोदी ने आखिर में कहा, “मैं आप सभी की मिलेट के लिए सराहना करना चाहता हूं। मिलेट के प्रति लोगों का लगाव लगातार बढ़ रहा है। साल 2023 को हमने मिलेट वर्ष घोषित किया था, लेकिन आज तीन साल बाद भी इसे लेकर जो पैशन है वो उत्साहित करने वाला है। राजस्थान के रामसर में किसान मिलेट को लेकर इनोवेशन कर रहे हैं। यहां एक कंपनी में 900 से अधिक किसान जुड़े हैं। ये किसान बाजरे की खेती करते हैं। इससे लड्डू तैयार किया जाता है, जिसकी बहुत ज्यादा मांग है। कई मंदिर हैं जो अपने प्रसाद में सिर्फ मिलेट का उपयोग करते हैं। मिलेट से अन्नदाताओं की कमाई बढ़ने के साथ ही लोगों के स्वास्थ्य में सुधार का उदाहरण बनता है। सर्दियों के दिनों में हमें श्रीअन्न का सेवन जरूर करना चाहिए। फरवरी में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट होने जा रही है। इसमें दुनिया भर से एक्सपर्ट भारत आ रहे हैं। इसमें शामिल होने वाले हर किसी का मैं हृदय से अभिनंदन करता हूं। अगले मन की बात कार्यक्रम में इस पर जरूर चर्चा करेंगे। कल के गणतंत्र दिवस के लिए आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं।”

मन की बात की 130वीं कड़ी में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ (25.01.2026)

प्रविष्टि तिथि: 25 JAN 2026 11:48AM by PIB Delhi

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार।

साल 2026 का यह पहला ‘मन की बात’ है। कल 26 जनवरी को हम सभी ‘गणतंत्र दिवस’ का पर्व मनाएंगे। इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। 26 जनवरी का ये दिन हमें अपने संविधान निर्माताओं को नमन करने का अवसर देता है। आज 25 जनवरी का दिन भी बहुत अहम है। आज ‘National Voters’ Day’ है ‘मतदाता दिवस’ है। मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है।

साथियो,

आमतौर पर जब कोई 18 साल का हो जाता है, मतदाता बन जाता है तो उसे जीवन का एक सामान्य पड़ाव समझा जाता है। लेकिन, दरअसल ये अवसर किसी भी भारतीय के जीवन का बहुत बड़ा milestone होता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम देश में वोटर बनने का, मतदाता बनने का, उत्सव मनाएं। जैसे हम जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हैं और उसे celebrate करते हैं, ठीक वैसे ही, जब भी कोई युवा पहली बार मतदाता बने तो पूरा मोहल्ला, गाँव या फिर शहर एकजुट होकर उसका अभिनंदन करे और मिठाइयाँ बांटी जाएं। इससे लोगों में voting के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इसके साथ ही यह भावना और सशक्त होगी कि एक वोटर होना कितना मायने रखता है।

साथियो,

देश में जो भी लोग चुनावी प्रक्रिया से जुड़े रहते हैं, जो हमारे लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर काम करते हैं, मैं उन सभी की बहुत सराहना करना चाहूँगा। आज ‘मतदाता दिवस’ पर मैं अपने युवा साथियों से फिर आग्रह करूंगा कि वे 18 साल का होने पर voter के रूप में खुद को जरूर register करें। संविधान ने हर नागरिक से जिस कर्त्तव्य भावना के पालन की अपेक्षा रखी है इससे वो अपेक्षा भी पूरी होगी और भारत का लोकतंत्र भी मजबूत होगा।

मेरे प्यारे देशवासियो,

इन दिनों मैं social media पर एक interesting trend देख रहा हूँ। लोग साल 2016 की अपनी यादों को फिर से ताजा कर रहे हैं। उसी भावना के साथ, आज मैं भी आपके साथ अपनी एक memory को share करना चाहता हूँ। दस साल पहले, जनवरी 2016 में हमने एक ambitious journey की शुरुआत की थी। तब हमें इस बात का एहसास था कि भले ही ये एक छोटा क्यों ना हो ये, लेकिन ये युवा-पीढ़ी के लिए, देश के future के लिये, काफी अहम है। तब कुछ लोग ये समझ ही नहीं पाए थे कि ये आखिर है क्या ? साथियो, मैं जिस journey की बात कर रहा हूँ, वह है start-up India की journey। इस अद्भुत journey के heroes हमारे युवा साथी हैं। अपने comfort zone से बाहर निकलकर उन्होंने जो innovation किए, वो इतिहास में दर्ज हो रहे हैं।

साथियो,

भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा start-ups ecosystem बन चुका है। ये start-ups लीक से हट के हैं। आज, वे, ऐसे sectors में काम कर रहे हैं, जिनके बारे में 10 साल पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। AI, Space, Nuclear Energy, Semi Conductors, Mobility, Green Hydrogen, Biotechnology आप नाम लीजिए और कोई न कोई भारतीय Start-up उस sector में काम करते हुए दिख जाएगा। मैं अपने उन सभी युवा-साथियों को salute करता हूँ जो किसी-न-किसी Start-up से जुड़े हैं या फिर अपना Start-up शुरू करना चाहते हैं|

साथियो,

आज ‘मन की बात’ के माध्यम से मैं देशवासियों, विशेषकर industry और Start-up से जुड़े युवाओं से एक आग्रह जरूर करना चाहता हूँ। भारत की economy तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत पर दुनिया की नजरें हैं। ऐसे समय में हम सब पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। वो जिम्मेदारी है – quality पर जोर देने की। होती है, चलती है, चल जाएगा, यह युग चला गया। आइए इस वर्ष हम पूरी ताकत से quality को प्राथमिकता दें। हम सबका एक ही मंत्र हो quality, quality और सिर्फ quality. कल से आज बेहतर quality. हम जो भी manufacture कर रहे हैं, उसकी quality को बेहतर बनाने का संकल्प लें। चाहे हमारे textiles हों, technology हो या फिर electronics even packaging, Indian product का मतलब ही बन जाए – Top quality. आइए, excellence को हम अपना bench mark बनाएं। हम संकल्प लें quality में ना कोई कमी होगी, ना quality से कोई समझौता होगा और मैंने तो लाल किले से कहा था ‘Zero defect – Zero effect’. ऐसा करके ही हम विकसित भारत की यात्रा को तेजी से आगे ले जा पाएंगे।

मेरे प्यारे देशवासियो,

हमारे देश के लोग बहुत innovative हैं। समस्याओं का समाधान ढूँढना हमारे देशवासियों के स्वभाव में है। कुछ लोग ये काम start-ups के जरिये करते हैं, तो कुछ लोग समाज की सामूहिक शक्ति से रास्ता निकालने का प्रयास करते हैं। ऐसा ही एक प्रयास उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में सामने आया है। यहाँ से होकर गुजरने वाली तमसा नदी को लोगों ने नया जीवन दिया है। तमसा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की सजीव धारा है। अयोध्या से निकलकर गंगा में समाहित होने वाली यह नदी कभी इस क्षेत्र के लोगों के जन-जीवन की धुरी हुआ करती थी, लेकिन प्रदूषण की वजह से इसकी अविरल धारा में रुकावट आने लगी थी।  गाद, कूड़ा-कचरा और गंदगी ने इस नदी के प्रवाह को रोक दिया था। इसके बाद यहाँ के लोगों ने इसे एक नया जीवन देने का अभियान शुरू किया। नदी की सफाई की गई और उसके किनारों पर छायादार, फलदार पेड़ लगाए गए। स्थानीय लोग कर्तव्य भावना से इस काम में जुटे और सबके प्रयास से नदी का पुनरुद्धार हो गया।

साथियो,

जन-भागीदारी का ऐसा ही प्रयास आंध्र-प्रदेश के अनंतपुर में भी देखने को मिला है। यह वह क्षेत्र है जो सूखे की गम्भीर समस्या से जूझता रहा है। यहाँ की मिट्टी, लाल और बलुई है। यही वजह है कि लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। यहां के कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती है। कई बार तो लोग अनंतपुर की तुलना रेगिस्तान में सूखे की स्थिति से भी कर देते हैं।

साथियो,

इस समस्या के समाधान के लिये स्थानीय लोगों ने जलाशयों को साफ करने का संकल्प लिया। फिर प्रशासन के सहयोग से यहाँ ‘अनंत नीरू संरक्षणम प्रोजेक्ट’ इसकी शुरुआत हुई। इस प्रयास के तहत 10 से अधिक जलाशयों को जीवन दान मिला है। उन जलाशयों में अब पानी भरने लगा है। इसके साथ ही 7000 से अधिक पेड़ भी लगाए गए हैं। यानि अनंतपुर में जल संरक्षण के साथ-साथ green cover भी बढ़ा है। यहाँ बच्चे अब तैराकी का आनंद भी ले सकते हैं। एक प्रकार से कहें तो यहाँ का पूरा ecosystem फिर से निखर उठा है।

साथियो,

आजमगढ़ हो, अनंतपुर हो, या फिर देश की कोई और जगह, ये देखकर खुशी होती है कि लोग एकजुट होकर कर्तव्य भाव से बड़े संकल्प सिद्ध कर रहे हैं। जन-भागीदारी और सामूहिकता की यही भावना हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।

मेरे प्यारे देशवासियो,

हमारे देश में भजन और कीर्तन सदियों से हमारी संस्कृति की आत्मा रहे हैं। हमने मंदिरों में भजन सुने हैं, कथा सुनते वक्त सुने हैं और हर दौर ने भक्ति को अपने समय के हिसाब से जिया है। आज की पीढ़ी भी कुछ नए कमाल कर रही है। आज के युवाओं ने भक्ति को अपने अनुभव और अपनी जीवन-शैली में ढाल दिया है। इसी सोच से एक नया सांस्कृतिक चलन उभरकर सामने आया है। आपने social media पर ऐसे video जरूर देखे होंगे। देश के अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में युवा इकट्ठा हो रहे हैं। मंच सजा होता है, रोशनी होती है, संगीत होता है, पूरा ताम-झाम होता है और माहौल किसी concert से जरा भी कम नहीं होता है। ऐसा ही लग रहा है कि जैसे कोई बहुत बड़ा concert हो रहा है, लेकिन वहाँ जो गाया जा रहा होता है वो पूरी तन्मयता के साथ, पूरी लगन के साथ, पूरी लय के साथ भजन की गूंज। इस चलन को आज ‘भजन clubbing’ कहा जा रहा है और यह खासतौर पर Genz के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह देखकर अच्छा लगता है कि इन आयोजनों में भजन की गरिमा और शुचिता का पूरा ध्यान रखा जाता है। भक्ति को हल्केपन में नहीं लिया जाता। ना शब्दों की मर्यादा टूटती है और ना ही भाव की। मंच आधुनिक हो सकता है, संगीत की प्रस्तुति अलग हो सकती है, लेकिन मूल भावना वही रहती है। अध्यात्म का एक निरंतर प्रवाह वहाँ अनुभव होता है।

मेरे प्यारे देशवासियो,

आज हमारी संस्कृति और त्योहार दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं। दुनिया के हर कोने में भारत के त्योहार बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। हर तरह की cultural vibrancy को बनाए रखने में हमारे भारतवंशी भाई-बहनों का अहम योगदान है। वो जहां भी है वहाँ अपनी संस्कृति की मूल भावना को संरक्षित कर और उसे आगे बढ़ा रहे हैं। इसको लेकर मलेशिया में भी हमारा भारतीय समुदाय बहुत सराहनीय कार्य कर रहा है। आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि मलेशिया में 500 से ज्यादा तमिल स्कूल हैं। इनमें तमिल भाषा की पढ़ाई के साथ ही अन्य विषयों को भी तमिल में पढ़ाया जाता है। इसके अलावा यहां तेलुगु और पंजाबी सहित अन्य भारतीय भाषाओं पर भी बहुत focus रहता है।

साथियो,

भारत और मलेशिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में एक society की बड़ी भूमिका है। इसका नाम है ‘Malaysia India Heritage Society’। अलग-अलग कार्यक्रमों के साथ ही, यह संस्था एक heritage walk का भी आयोजन करती है। इसमें दोनों देशों को आपस में जोड़ने वाले सांस्कृतिक स्थलों को cover किया जाता है। पिछले महीने मलेशिया में ‘लाल पाड़ साड़ी’ iconic walk इसका आयोजन किया गया। इस साड़ी का बंगाल की हमारी संस्कृति से विशेष नाता रहा है। इस कार्यक्रम में सबसे अधिक संख्या में इस साड़ी को पहनने का record बना, जिसे Malaysian Book of Records में दर्ज किया गया। इस मौके पर ओडिसी dance और baul music ने तो लोगों का दिल जीत लिया। मैं कह सकता हूँ –

 

साया बरबांगा/ देंगान डीयास्पोरा इंडिया/दि मलेशिया //

मेरेका मम्बावा/इंडिया दान मलेशिया/सेमाकिन रापा //

 

(हिन्दी अनुवाद – मुझे मलेशिया में भारतीय प्रवासियों पर गर्व है, भारत और मलेशिया को वो और करीब ला रहे हैं।)

मलेशिया के हमारे भारतवंशियों को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

 

मेरे प्यारे देशवासियो,

हम भारत के किसी भी हिस्से में चले जाएँ, वहाँ हमें कुछ-न-कुछ असाधारण, अभूतपूर्व होते हुए जरूर दिख जाता है। कई बार Media की चकाचौंध में ये बातें जगह नहीं बना पातीं। लेकिन इनसे पता चलता है कि हमारे समाज की असली शक्ति क्या है ? इनसे हमारे उन Value Systems की भी झलक मिलती है, जिनमें एकजुटता की  भावना सर्वोपरि है। गुजरात में बेचराजी के चंदनकी गाँव की परंपरा अपने आप में अनूठी है। अगर मैं आपसे कहूँ कि यहां के लोग, विशेषकर बुजुर्ग, अपने घरों में खाना नहीं बनाते तो आपको हैरत होगी। इसकी वजह गाँव का शानदार Community kitchen। इस Community kitchen में एक साथ पूरे गाँव का सबका खाना बनता है और लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। बीते 15 वर्षों से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति बीमार है तो उसके लिए Tiffin Service भी उपलब्ध है, यानि home delivery का भी पूरा इंतजाम है। गाँव का यह सामूहिक भोजन लोगों को आनंद से भर देता है। ये पहल न केवल लोगों को आपस में जोड़ती है, बल्कि इससे पारिवारिक भावना को भी बढ़ावा मिलता है।

साथियो,

भारत की परिवार व्यवस्था – Family System हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। दुनिया के कई देशों में इसे बहुत कौतूहल के  साथ देखा जाता है। कई देशों में ऐसे family system को लेकर बहुत सम्मान का भाव है। कुछ ही दिन पहले ही मेरे Brother U.A.E.  के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत आए थे। उन्होंने मुझे बताया कि U.A.E. साल 2026 को year of family के रूप में मना रहा है। मकसद ये कि वहाँ के लोगों के बीच सौहार्द और सामुदायिक भावना और मजबूत हो, वाकई ये बहुत ही सराहनीय पहल है।

साथियो,

जब परिवार और समाज की ताकत मिलती है, तो हम बड़ी-से-बड़ी चुनौतियों को परास्त कर सकते हैं। मुझे अनंतनाग के शेखगुन्ड गाँव के बारे में जानकारी मिली है। यहां drugs, तंबाकू, सिगरेट और शराब से जुड़ी चुनौतियाँ काफी बढ़ गई थी। इन सबको देखकर यहां के मीर जाफ़र जी इतना परेशान हुए कि उन्होंने इस समस्या को दूर करने की ठान ली। उन्होंने गाँव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को एकजुट किया। उनकी इस पहल का असर कुछ ऐसा रहा कि वहाँ की दुकानों ने तंबाकू उत्पादों को बेचना ही बंद कर दिया। इस प्रयास से Drugs के खतरों को लेकर भी लोगों में जागरूकता बढ़ी है।

साथियो,

हमारे देश में ऐसी अनेक संस्थाएं भी हैं, जो वर्षों से निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटी हैं। जैसे एक संस्था है पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर के फरीदपुर में। इसका नाम है ‘विवेकानंद लोक शिक्षा निकेतन’। ये संस्था पिछले चार दशक से बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में जुटी है। गुरुकुल पद्धति की शिक्षा और teachers की training के साथ ही यह संस्था समाज कल्याण के कई नेक कार्यों में जुटी है। मेरी कामना है कि निस्वार्थ सेवा का यह भाव देशवासियों के बीच निरंतर और अधिक सशक्त होता रहे।

मेरे प्यारे देशवासियो,

‘मन की बात’ में हम निरंतर स्वच्छता के विषय को उठाते रहे हैं। मुझे ये देखकर गर्व होता है हमारे युवा अपने आसपास की स्वच्छता को लेकर बहुत सजग हैं। अरुणाचल प्रदेश में हुए एक ऐसे ही अनूठे प्रयास के बारे में मुझे जानकारी मिली है। अरुणाचल वो धरती है जहां देश में सबसे पहले सूर्य की किरणें पहुँचती है। यहां लोग ‘जय हिन्द’ कहकर एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं। यहां ईटानगर में युवाओं का समूह उन हिस्सों की सफाई के लिए एकजुट हुआ, जिन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत थी। इन युवाओं ने अलग-अलग शहरों में सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई को अपना mission बना लिया। इसके बाद ईटानगर, नाहरलागुन, दोईमुख, सेप्पा, पालिन और पासीघाट वहाँ भी ये अभियान चलाया गया। ये युवा अब तक करीब 11 लाख किलो से अधिक कचरे की सफाई कर चुके हैं। सोचिए दोस्तो, नौजवानों ने मिलकर के 11 लाख किलो कूड़ा-कचरा हटाया।

साथियो,

एक और उदाहरण असम का है। असम के नागांव में वहाँ की पुरानी गलियों से लोग भावनात्मक रूप से जुड़े हैं यहां कुछ लोगों ने अपनी गलियों को मिलकर साफ करने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे उनके साथ और लोग जुडते गए। इस तरह एक ऐसी टीम तैयार हो गई, जिसने गलियों से बहुत सारा कचरा हटा दिया। साथियो, ऐसा ही एक प्रयास बेंगलुरु में हो रहा है। बेंगलुरु में sofa waste एक बड़ी समस्या बनकर सामने आया है इसलिए कुछ professionals एकजुट होकर इस issue को अपने तरीके से solve कर रहे हैं।

साथियो,

आज कई शहरों में ऐसी टीमें हैं, जो landfill waste की recycling में जुटी हैं। चेन्नई में ऐसी ही एक team ने बहुत बेहतरीन काम किया है। ऐसे उदाहरणों से पता चलता है कि स्वच्छता से जुड़ा हर प्रयास कितना अहम है। हमें स्वच्छता के लिए व्यक्तिगत तौर पर या फिर टीम के तौर पर अपने प्रयास बढ़ाने होंगे, तभी हमारे शहर और बेहतर बनेंगे।

मेरे प्यारे देशवासियो,

जब पर्यावरण सरंक्षण की बात होती है, तो अक्सर हमारे मन में बड़ी योजनाएं, बड़े अभियान और बड़े-बड़े संगठन की बातें आती हैं। लेकिन कई बार बदलाव की शुरुआत बहुत साधारण तरीके से होती है। एक व्यक्ति से, एक इलाके से, एक कदम से और लगातार की गई छोटी-छोटी कोशिशों से भी बड़े बदलाव आते हैं। पश्चिम बंगाल के कूच बिहार के रहने वाले बेनॉय दास जी का प्रयास  इसी का उदाहरण है । पिछले कई वर्षों से उन्होंने अपने जिले को हरा-भरा बनाने का काम अकेले दम पर किया है । बेनॉय दास जी ने हजारों पेड़ लगाए हैं । कई बार पौधे खरीदने से लेकर उन्हें लगाने और देख-भाल करने का सारा खर्च खुद ने उठाया है । जहां जरूरत पड़ी, वहाँ स्थानीय लोगों, छात्रों और नगर निकायों के साथ मिलकर काम किया । उनके प्रयासों से सड़कों के किनारे हरियाली और बढ़ गई है ।

साथियो,

मध्य प्रदेश में पन्ना जिले के जगदीश प्रसाद अहिरवार जी, उनका प्रयास भी बहुत ही सराहनीय है । वो जंगल में beat–guard के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं । एक बार गश्त के दौरान उन्होंने महसूस किया कि जंगल में मौजूद कई औषधीय पौधों की जानकारी कहीं भी व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं है । जगदीश जी, ये जानकारी अगली पीढ़ी तक पँहुचाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने, औषधीय पौधों की पहचान करना और उनका record बनाना शुरू किया । उन्होंने सवा-सौ से ज्यादा औषधीय पौधों की पहचान की । हर पौधे की तस्वीर, नाम, उपयोग और मिलने के स्थान की जानकारी जुटाई । उनकी जुटाई गई जानकारी को वन विभाग ने संकलित किया और किताब के रूप में प्रकाशित भी किया। इस किताब में दी गई जानकारी अब researcher, छात्रों और वन अधिकारियों के बहुत काम आ रही है।

साथियो,

पर्यावरण संरक्षण की यही भावना आज बड़े स्तर पर भी दिखाई दे रही है। इसी सोच के साथ देशभर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान से आज करोड़ों लोग जुड़ चुके हैं। अब तक देश में 200 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए भी जा चुके हैं। ये बताता है कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर अब लोग ज्यादा जागरूक हैं, और किसी-ना-किसी रूप में अपना योगदान देना चाहते हैं।

मेरे प्यारे देशवासियो,

मैं आप सभी की एक और बात के लिए बहुत सराहना करना चाहता हूँ – वजह है millets यानि श्रीअन्न। मुझे ये देखकर खुशी है कि श्रीअन्न के प्रति देश के लोगों का लगाव निरंतर बढ़ रहा है। वैसे तो हमने 2023 को millet year घोषित किया था। लेकिन आज तीन साल बाद भी इसको लेकर देश और दुनिया में जो passion और commitment है, वो बहुत उत्साहित करने वाला है।

साथियो,

तमिलनाडु के कल्ल-कुरिची जिले में महिला किसानों का एक समूह प्रेरणा स्त्रोत बन गया है। यहाँ  के ‘Periyapalayam millet’ FPC से लगभग 800 महिला किसान जुड़ी हैं। Millets की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इन महिलाओं ने Millet Processing Unit की  स्थापना की। अब वो millets से बने उत्पादों को सीधे बाजार तक पहुंचा रही है ।

साथियो,

राजस्थान के रामसर में भी किसान श्रीअन्न को लेकर innovation कर रहे हैं। यहाँ के Ramsar Organic Farmer Producer Company से 900 से अधिक किसान जुड़े हैं। ये किसान मुख्य रूप से बाजरे की खेती करते हैं। यहाँ बाजरे को process करके ready to eat लड्डू तैयार किया जाता है। इसकी बाजार में बड़ी मांग है। इतना ही नहीं साथियों, मुझे तो ये जानकर खुशी होती है, आजकल कई मंदिर ऐसे हैं, जो अपने प्रसाद में सिर्फ millets का उपयोग करते हैं। मैं उन मंदिर के सभी व्यवस्थापकों का हृदय से अभिनंदन करता हूं, उनकी इस पहल के लिए।

साथियो,

Millets श्रीअन्न से अन्नदाताओं की कमाई बढ़ने के साथ ही लोगों की health में भी सुधार की guarantee बनता जा रहा है। Millets पोषण से भरपूर होते हैं, super-food होते हैं। हमारे देश में सर्दियों का मौसम तो खानपान के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है। ऐसे में इन दिनों हमें श्रीअन्न का सेवन जरूर करना चाहिए।

मेरे प्यारे देशवासियो,

‘मन की बात’ में हमें एक बार फिर कई अलग-अलग विषयों पर चर्चा करने का अवसर मिला। यह कार्यक्रम हम सभी को अपने देश की उपलब्धियों को महसूस करने और celebrate  करने का अवसर देता है। फरवरी में ऐसा ही एक और अवसर आ रहा है। अगले महीने India AI Impact Summit होने जा रही है। इस Summit में दुनियाभर से, विशेषकर Technology के क्षेत्र से जुड़े Expert भारत आएंगे। यह सम्मेलन AI की दुनिया में भारत की प्रगति और उपलब्धियों को भी सामने लाएगा। मैं इसमें शामिल होने वाले हर किसी का हृदय से अभिनंदन करता हूं। अगले महीने ‘मन की बात’ में India AI Impact Summit पर हम जरूर बात करेंगे। देशवासियों की कुछ अन्य उपलब्धियों की भी चर्चा करेंगे । तब तक के लिए मुझे ‘मन की बात’ में विदा दीजिए। कल के गणतंत्र दिवस के लिए एक बार फिर आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

धन्यवाद।

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