इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री 8 से 10 जुलाई, 2026 तक ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री माननीय एंथोनी अल्बानीज़ एमपी के निमंत्रण पर मेलबर्न की यात्रा करेंगे। मेलबर्न में प्रधानमंत्री अल्बानीज़ के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। वे ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर जनरल माननीय सुश्री सैम मोस्टिन एसी से भी मुलाकात करेंगे। अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में भी भाग लेंगे जहां वे दोनों देशों के शीर्ष व्यापारिक नेताओं की सभा को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री भारतीय प्रवासी समुदाय की एक विशाल सभा को भी संबोधित करेंगे जो भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का एक मजबूत स्तंभ है।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री माननीय क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मेलबर्न से 10-11 जुलाई, 2026 को ऑकलैंड की राजकीय यात्रा पर जाएंगे। यह चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली राजकीय यात्रा होगी। ऑकलैंड में, प्रधानमंत्री लक्सन के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे जिनमें पिछले दो वर्षों में विशेष रूप से व्यापार, वाणिज्य और रक्षा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री प्रमुख व्यापार और खेल जगत की हस्तियों से भी बातचीत करेंगे। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मजबूत जन-संबंधों को दर्शाते हुए प्रधानमंत्री इस यात्रा के दौरान भारतीय प्रवासी भारतीयों की एक विशाल सभा को संबोधित करेंगे।
इस यात्रा के दौरान भारत के यूपीआई और इंडोनेशिया के क्यूरिस (क्यूआरआईएस) के बीच डिजिटल भुगतान लिंकेज का समझौता होगा। इससे बाली और अन्य इंडोनेशियाई पर्यटन स्थल पर जाने वाले लाखों भारतीय पर्यटकों के लिए भुगतान बेहद आसान, तेज और सस्ता हो जाएगा। इंडोनेशिया से कारोबार करने वाले भारतीय व्यवसायियों को भी लाभ होगा। इस यात्रा के दौरान दोनों देश डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, भुगतान प्रणाली, रक्षा सहयोग को बढ़ा कर अपनी साझेदारी को और गहरा करेंगे।
आईओएन का पहला लाइव ट्रांजेक्शन
7 जुलाई को पीएम मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांटो के शिखर सम्मेलन के दौरान आईओएन का पहला लाइव ट्रांजेक्शन करने की तैयारी है। यह 6.5 करोड़ से ज्यादा सूक्ष्म, छोटे व मझोले स्तर के उद्यमियों के लिए बहुत ही सहूलियत वाला और कम लागत वाला डिजिटल मार्केटप्लेस तैयार करेगा।
सनद रहे कि भारत की आधार, यूपीआई, डिजिलाकर व ई-केवाइसी से प्रेरिसत हो कर इंडोनेशिया सरकार ने महत्वाकांक्षी डिजिटल नुसंतरा पहल की शुरुआत की है। साथ ही भारतीय कंपनियां इंडोनेशिया की अगली पीढ़ी की डिजिटल फ्रेमवर्क बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। दोनों देश अब सिर्फ माडल साझा करने से आगे बढ़कर संस्थागत सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं।
फ्री न्यूट्रिशियस मीट्स प्रोग्राम
स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी इंडोनेशिया भारत सरकार के कार्यक्रम से मदद ले रहा है। भारत की पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना से प्रेरित हो कर इंडोनेशिया ने भी फ्री न्यूट्रिशियस मीट्स प्रोग्राम लागू किया है। इसी तरह, ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती दवाओं के लिए जन औषधि माडल पर चर्चा हो रही है।इसी तरह से रक्षा क्षेत्र में भी साझेदारी विस्तारित हो रही है।
इंडोनेशिया भारत के साथ डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, सैन्य प्रशिक्षण और समुद्री सहयोग पर काम कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत के तहत भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन के अनुभव से दीर्घकालिक सहयोग के नए अवसर खुल रहे हैं। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल जैसी प्रणालियों पर चर्चा हो रही है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण पर भी दोनों देशों के बीच लगातार चर्चा चल रही है।
आधुनिक विनिर्माण के लिए आवश्यक धातू
क्रिटिकल मिनरल्स दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक अवसर प्रस्तुत कर रहे हैं। इंडोनेशिया के पास निकल और अन्य दुर्लभ खनिजों के विश्व के सबसे बड़े भंडार हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों और आधुनिक विनिर्माण के लिए आवश्यक हैं। वहां अभी इसका अधिकांश उत्पादन कच्चे रूप में निर्यात हो जाता है और घरेलू स्तर पर मूल्य संवर्धन सीमित रह जाता है।
अन्य संसाधन-समृद्ध देशों की तरह इंडोनेशिया अब इन खनिजों को घरेलू स्तर पर संवर्द्धन करने की योजना लगा रहा है ताकि वैश्विक सप्लाई चेन में बेहतर भूमिका निभा जा सके। इस तरह के खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटे भारत के लिए यहां अवसर बन सकता है।







