जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की जनता से माफी मांगी और कहा कि कहा कि ‘मैं जनता को यह समझाने में नाकाम रहे कि उन्हें किस आधार पर वोट देना चाहिए। इसलिए, प्रायश्चित के तौर पर 20 नवंबर को गांधी भितिहरवा आश्रम में एक दिन के लिए मैं मौन व्रत रखूंगा।’
प्रशांत किशोर ने बिहार की जनता से माफी मांगी हैं।
पटना: बिहार चुनाव में जन सुराज पार्टी को मिली करारी हार के बाद मंगलवार को पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जनता से माफी मांगी और अपनी नाकामी की जिम्मेदारी खुद ली। उन्होंने कहा कि तीन साल की कड़ी मेहनत के बावजूद वे जनता का भरोसा जीतने में असफल रहे, लेकिन बिहार को बेहतर बनाने का उनका संकल्प पहले से भी अधिक मजबूत है।
हार की पूरी जिम्मेदारी मेरी है: प्रशांत किशोर
जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर (PK) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने बिहार की जनता को एक नई राजनीति का विकल्प देने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि ‘हमने ईमानदार प्रयास किया, लेकिन बिल्कुल सफलता नहीं मिली। सत्ता परिवर्तन तो दूर, व्यवस्था परिवर्तन भी नहीं करा सके। जनता ने हम पर भरोसा नहीं किया, इसकी 100% जिम्मेदारी मेरी है।’
प्रशांत किशोर ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भ्रष्टाचार का आरोपी नहीं बताया। उन्होंने कहा कि उनके सारे आरोप और प्रेस कॉन्फ्रेंस सिर्फ कुछ मंत्रियों के भ्रष्टाचार को लेकर थे। पीके ने कहा कि ‘अब जिम्मेदारी नीतीश कुमार की है कि वे मंत्रिमंडल को भ्रष्टाचार मुक्त करें और जनता से किए वादे पूरे करें।’
‘राजनीति छोड़ सकता हूं, लेकिन बिहार नहीं’
प्रशांत किशोर ने कहा कि वे किसी पद पर नहीं हैं, इसलिए इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि ‘मैं राजनीति छोड़ सकता हूं, लेकिन बिहार को नहीं छोड़ूंगा।’ उन्होंने कहा कि चुनावी हार से वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। पीके ने कहा कि ‘आपने मुझे तीन साल मेहनत करते देखा है, अब मैं दोगुनी मेहनत करूंगा। जब तक बिहार को बेहतर बनाने का संकल्प पूरा नहीं कर लेता, पीछे हटने का कोई सवाल नहीं।’
20 नवंबर को मौन व्रत रखेंगे: पीके
उन्होंने माना कि वे जनता को यह समझाने में असफल रहे कि वोट किस आधार पर देना चाहिए और नई व्यवस्था क्यों जरूरी है। इसके लिए वे 20 नवंबर को गांधी भितिहरवा आश्रम में एक दिन का मौन व्रत रखेंगे। प्रशातं किशोर ने कहा कि ‘हमसे गलतियां हुई होंगी, लेकिन अपराध नहीं किया है। हमने न जाति-आधारित जहर फैलाया, न हिंदू-मुस्लिम की राजनीति की। न धर्म के नाम पर बांटा और न वोट खरीदने का अपराध किया।’
समाज के किसी भी तबके में कोई उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं………
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