बिहार के कैमूर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट के नतीजे आ गए. रामगढ़ सीट पर बसपा यानी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की जीत हुई है. बसपा की यहां जीत की कहानी राजनीतिक संघर्ष और दृढ़ता से भरी हुई है. बसपा का पांच साल पुराना दुख इस चुनाव में खत्म हो गया. बसपा प्रत्याशी सतीश कुमार ने 30 वोटों से जीत दर्ज की है.
रामगढ़ में BSP की जीत की कहानी है रोचक, मायावती के कैंडिडेट का दुख कैसे कम हुआ
मायावती को बिहार में एक सीट मिल गई है.
बिहार चुनाव के नतीजे आ गए. बिहार में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला है. नीतीश-मोदी की आंधी में राजद की लालटेन नहीं जल पाई. तिरहुत हो सीमांचल, मिथिला हो या मगध…हर तरफ एनडीए की आंधी थी. एनडीए की इस आंधी में भी मायावती बसपा एक सीट जीतने में कामयाब रही. जी हां, कैमूर में रामगढ़ सीट का रिजल्ट बसपा के पक्ष में गया है. रामगढ़ विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी सतीश कुमार उर्फ पिंटू यादव की जीत हो गई है. बसपा कैंडिडेट की जीत की कहानी भी काफी रोचक है. इस बार भी इस सीट पर बसपा हारती-हारती जीती है. बसपा के सतीश कुमार उर्फ पिंटू यादव महज 30 वोटों से जीत दर्ज करने में कामयाब हुए.
जी हां, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सबसे रोचक और भावुक कहानी कैमूर की रामगढ़ सीट की है. यहां बसपा यानी बहुजन समाज पार्टी के सतीश कुमार उर्फ पिंटू यादव ने महज 30 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर न सिर्फ बिहार में बसपा का खाता खोला, बल्कि पार्टी का पांच साल पुराना गहरा दुख भी मिटा दिया. बसपा के सतीश कुमार सिंह यादव ने 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के अशोक कुमार सिंह को महज 30 वोटों से हरा दिया. इस सीट पर राजद तीसरे नंबर की पार्टी बनी. 2020 के चुनाव में भी बसपा इस सीट पर जीतते-जीतते हारी थी.
2020 की क्या है कहानी
2020 का चुनाव बसपा और उसके कैंडिडेट के लिए काफी दुखद था. उस वक्त बसपा मंजिल के करीब जाकर मात खा गई थी. उस समय बसपा के टिकट पर अंबिका सिंह चुनाव लड़े थे. रामगढ़ में कांटे की टक्कर में साल 2020 में बसपा महज 189 वोटों से हार गई थी. तब राजद के सुधाकर सिंह ने बसपा को दुख दिया था. बसपा को 57,894 वोट मिले थे, जबकि राजद को 58,083. तीसरे नंबर पर भाजपा के अशोक कुमार सिंह थे. वह हार इतनी करीबी थी कि बसपा को गहरा दुख लगा था. बसपा कैंडिडेट और उनके समर्थकों की आंखों में आंसू आ गए थे. मगर बसपा ने यहां हार नहीं मानी.
बसपा का दुख कैसे कम हुआ
बसपा को पता चल गया था कि इस सीट पर उसकी एक न एक दिन जीत होगी. आखिरकार 2025 में वह घड़ी आ गई. 2020 में महज 189 वोट से रामगढ़ सीट हारने वाली बीएसपी ने आज महज 30 वोटों से जीत कर बिहार में अपना खाता खोल लिया. रामगढ़ की इस कहानी ने साबित कर दिया कि सियासत में धैर्य और संघर्ष रखो तो सबसे छोटा अंतर भी सबसे बड़ी जीत में बदल जाता है. इस तरह रामगढ़ सीट पर पांच साल पहले 189 का दुख, अब 30 की खुशी में बदल गया.
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