पिछले साल प्रधानमंत्री शेख हसीना को तख्तापलट के जरिए हटा दिया गया था. ढाका छोड़कर वह भारत आई थीं. भारत आने के बाद पहली बार पूर्व शेख हसीना ने खुलकर बातचीत की है. एक न्यूज चैनल से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ वह सुधार या आंदोलन नहीं था, बल्कि पहले से तैयार किया गया सत्ता पलटने का प्लान था. उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि मौजूदा शासन में चरमपंथी ताकतें मजबूत हो रही है, जिससे देश की स्थिरता और अल्पसंख्यकों पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है. बातचीत में उन्होंने अपने सत्ता से बेदखल होने में पश्चिमी देशों की संलिप्तता से इनकार किया और भारत को शरण देने और धैर्य रखने के लिए धन्यवाद दिया.
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सवाल: किस खुफिया जानकारी या खतरे के कारण आपको बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर किया?शेख हसीना: अगस्त की शुरुआत तक जो शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन था, वह अचानक हिंसक भीड़ में बदल गया. यह कोटा व्यवस्था पर छात्रों का विरोध नहीं रहा, बल्कि कट्टरपंथी उग्र समूहों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया. बाद में जब मोहम्मद यूनुस ने पिछले साल की हिंसा के सभी दोषियों को तुरंत छूट दे दी और हमारी बनाई जांच समिति को खत्म कर दिया, तब साफ हुआ कि सरकार गिराने की योजना पहले से बनाई जा चुकी थी. उस समय ढाका छोड़ना सिर्फ मेरी ही सुरक्षा का सवाल नहीं था, बल्कि मेरे आसपास के लोगों की सुरक्षा भी खतरे में थी.
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सवाल: सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान आपकी रवानगी की बातचीत में शामिल थे. क्या आपको लगता है कि वे स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे या अमेरिकी कूटनीतिक दबाव में थे या वो खूनखराबा रोकने के लिए ऐसा कर रहे थे?शेख हसीना: सेना बेहद कठिन स्थिति में थी. उन्हें संवैधानिक सरकार की रक्षा भी करनी थी और जनहानि रोकने की जिम्मेदारी भी. हमारी बात सिर्फ कानून-व्यवस्था को संभालने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी. वह किसी बाहरी देश के दबाव में थे या नहीं इस पर मैं कुछ नहीं कह सकती.
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सवाल: तख्तापलट में अमेरिका की भूमिका को आप कैसे देखती हैं. क्या उन्होंने सिर्फ राजनीतिक सुधार का संकेत दिया या सक्रिय रूप से बदलाव का समर्थन किया?शेख हसीना: अमेरिका की हर सरकार से हमारा हमेशा अच्छा संबंध रहा है. मुझे नहीं लगता कि अमेरिका या किसी विदेशी शक्ति ने सक्रिय रूप से मेरे खिलाफ भूमिका निभाई. यूनुस ने विदेशों में खासकर पश्चिम में अपनी छवि बनाई थी, और कई लोग उनकी आर्थिक उपलब्धियों को लोकतांत्रिक योग्यता समझ बैठे. लेकिन अब जब वह असंवैधानिक रूप से सत्ता में हैं और कट्टरपंथियों को मंत्रिमंडल में जगह दे रहे हैं, वही लोग सच्चाई समझने लगे हैं. राष्ट्रपति ट्रम्प, जिनके साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं, ने सार्वजनिक रूप से यूनुस के प्रति अपनी नापसंदगी व्यक्त की है.
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सवाल: क्या चीन ने आपको सत्ता के अंतिम दिनों में कोई सलाह दी या भरोसा दिलाया?शेख हसीना: बांग्लादेश और चीन के बीच स्थिर संबंध हमेशा हमारी प्राथमिकता रहे हैं. हमारे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है ताकि अंतरराष्ट्रीय भरोसा बना रहे. लेकिन जब तक यूनुस जैसी अनिर्वाचित सरकार अस्थिर नीतियां अपनाती रहेगी, यह भरोसा कमजोर रहेगा.
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सवाल: भारत ने आपका कैसा साथ दिया? क्या उन्होंने आपको मित्र के रूप में सहारा दिया या ढाका की नई परिस्थिति को देखते हुए आपको बोझ की तरह देखा?शेख हसीना: भारत हमारा सच्चा मित्र है. मैं भारत और उसके लोगों की आभारी हूं कि उन्होंने मुझे अपने यहां स्वीकार किया. भारत यह चाहता है कि ढाका में स्थिर, वैध और जनता की ओर से चुनी हुई सरकार हो. भारत के साथ यूनुस की समस्याओं का मुझसे कोई लेना-देना नहीं है. ये एक अनुभवहीन नेता की हरकतें हैं, जो हमारी साझेदारी के मूल्य को नहीं पहचानता. यूनुस की भारत विरोधी भाषा और चरमपंथियों से नजदीकी ने रिश्ते बिगाड़े हैं, न कि मेरी वजह से. भारत यह अच्छी तरह समझता है कि बांग्लादेश की स्थिरता हमारे साझे हित में है.
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सवाल: क्या आप राजनीति में वापसी चाहती हैं?शेख हसीना: मेरा जीवन बांग्लादेश की उन्नति के लिए समर्पित रहा है. अवामी लीग किसी एक परिवार की पार्टी नहीं है, बल्कि बांग्लादेश की जनता की आवाज है. देश का भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब यहां स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव होंगे. राजनीति में वापसी का उद्देश्य सिर्फ यही है कि देश को फिर से संवैधानिक रास्ते पर लौटाया जाए.
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सवाल: क्या मोहम्मद यूनुस विदेशी समर्थन वाले बदलाव का चेहरा हैं?शेख हसीना: यूनुस को विदेशों में जो समर्थन मिला था, वह सिर्फ उनकी आर्थिक छवि पर आधारित था. लेकिन सच्चाई यह है कि वे जनता की ओर से चुने हुए नेता नहीं हैं. वह लोकतांत्रिक सरकार का चेहरा नहीं है. वह अब एक ऐसी सरकार का चेहरा हैं, जिसके पीछे कट्टरपंथी समूह काम कर रहे हैं. पश्चिम अगर उन्हें नरम चेहरा मानता है तो वे भ्रम में हैं.
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सवाल: आप भारत से किस तरह की मदद की अपेक्षा करती हैं?शेख हसीना: भारत ने पहले ही आश्रय और कूटनीतिक समर्थन दोनों दिया है. अवामी लीग को देश के भीतर किसी पुनर्निर्माण की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उसे करोड़ों लोगों का समर्थन प्राप्त है. हमें सिर्फ इतना चाहिए कि भारत और अन्य क्षेत्रीय देश बांग्लादेश में लोकतांत्रिक चुनावों की मांग को मजबूती से उठाते रहें.
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सवाल: क्षेत्रीय देशों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम क्या है ताकि बांग्लादेश पाकिस्तान की तरह न बन जाए?शेख हसीना: मेरा डर है कि यूनुस सरकार वास्तव में हिज्ब-उत-तहरीर जैसे चरमपंथी समूहों के प्रभाव में चल रही है. मैं भारत और क्षेत्रीय देशों से अपील करती हूं कि वे यूनुस से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग जारी रखें. बांग्लादेश को बचाने का यही एकमात्र रास्ता है.
पिछले साल प्रधानमंत्री शेख हसीना को तख्तापलट के जरिए हटा दिया गया था. ढाका छोड़कर वह भारत आई थीं. भारत आने के बाद पहली बार पूर्व शेख हसीना ने खुलकर बातचीत की है. एक न्यूज चैनल से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ वह सुधार या आंदोलन नहीं था, बल्कि पहले से तैयार किया गया सत्ता पलटने का प्लान था. उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि मौजूदा शासन में चरमपंथी ताकतें मजबूत हो रही है, जिससे देश की स्थिरता और अल्पसंख्यकों पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है. बातचीत में उन्होंने अपने सत्ता से बेदखल होने में पश्चिमी देशों की संलिप्तता से इनकार किया और भारत को शरण देने और धैर्य रखने के लिए धन्यवाद दिया.
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सवाल: किस खुफिया जानकारी या खतरे के कारण आपको बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर किया?शेख हसीना: अगस्त की शुरुआत तक जो शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन था, वह अचानक हिंसक भीड़ में बदल गया. यह कोटा व्यवस्था पर छात्रों का विरोध नहीं रहा, बल्कि कट्टरपंथी उग्र समूहों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया. बाद में जब मोहम्मद यूनुस ने पिछले साल की हिंसा के सभी दोषियों को तुरंत छूट दे दी और हमारी बनाई जांच समिति को खत्म कर दिया, तब साफ हुआ कि सरकार गिराने की योजना पहले से बनाई जा चुकी थी. उस समय ढाका छोड़ना सिर्फ मेरी ही सुरक्षा का सवाल नहीं था, बल्कि मेरे आसपास के लोगों की सुरक्षा भी खतरे में थी.
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सवाल: सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान आपकी रवानगी की बातचीत में शामिल थे. क्या आपको लगता है कि वे स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे या अमेरिकी कूटनीतिक दबाव में थे या वो खूनखराबा रोकने के लिए ऐसा कर रहे थे?शेख हसीना: सेना बेहद कठिन स्थिति में थी. उन्हें संवैधानिक सरकार की रक्षा भी करनी थी और जनहानि रोकने की जिम्मेदारी भी. हमारी बात सिर्फ कानून-व्यवस्था को संभालने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी. वह किसी बाहरी देश के दबाव में थे या नहीं इस पर मैं कुछ नहीं कह सकती.
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सवाल: तख्तापलट में अमेरिका की भूमिका को आप कैसे देखती हैं. क्या उन्होंने सिर्फ राजनीतिक सुधार का संकेत दिया या सक्रिय रूप से बदलाव का समर्थन किया?शेख हसीना: अमेरिका की हर सरकार से हमारा हमेशा अच्छा संबंध रहा है. मुझे नहीं लगता कि अमेरिका या किसी विदेशी शक्ति ने सक्रिय रूप से मेरे खिलाफ भूमिका निभाई. यूनुस ने विदेशों में खासकर पश्चिम में अपनी छवि बनाई थी, और कई लोग उनकी आर्थिक उपलब्धियों को लोकतांत्रिक योग्यता समझ बैठे. लेकिन अब जब वह असंवैधानिक रूप से सत्ता में हैं और कट्टरपंथियों को मंत्रिमंडल में जगह दे रहे हैं, वही लोग सच्चाई समझने लगे हैं. राष्ट्रपति ट्रम्प, जिनके साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं, ने सार्वजनिक रूप से यूनुस के प्रति अपनी नापसंदगी व्यक्त की है.
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सवाल: क्या चीन ने आपको सत्ता के अंतिम दिनों में कोई सलाह दी या भरोसा दिलाया?शेख हसीना: बांग्लादेश और चीन के बीच स्थिर संबंध हमेशा हमारी प्राथमिकता रहे हैं. हमारे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है ताकि अंतरराष्ट्रीय भरोसा बना रहे. लेकिन जब तक यूनुस जैसी अनिर्वाचित सरकार अस्थिर नीतियां अपनाती रहेगी, यह भरोसा कमजोर रहेगा.
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सवाल: भारत ने आपका कैसा साथ दिया? क्या उन्होंने आपको मित्र के रूप में सहारा दिया या ढाका की नई परिस्थिति को देखते हुए आपको बोझ की तरह देखा?शेख हसीना: भारत हमारा सच्चा मित्र है. मैं भारत और उसके लोगों की आभारी हूं कि उन्होंने मुझे अपने यहां स्वीकार किया. भारत यह चाहता है कि ढाका में स्थिर, वैध और जनता की ओर से चुनी हुई सरकार हो. भारत के साथ यूनुस की समस्याओं का मुझसे कोई लेना-देना नहीं है. ये एक अनुभवहीन नेता की हरकतें हैं, जो हमारी साझेदारी के मूल्य को नहीं पहचानता. यूनुस की भारत विरोधी भाषा और चरमपंथियों से नजदीकी ने रिश्ते बिगाड़े हैं, न कि मेरी वजह से. भारत यह अच्छी तरह समझता है कि बांग्लादेश की स्थिरता हमारे साझे हित में है.
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सवाल: क्या आप राजनीति में वापसी चाहती हैं?शेख हसीना: मेरा जीवन बांग्लादेश की उन्नति के लिए समर्पित रहा है. अवामी लीग किसी एक परिवार की पार्टी नहीं है, बल्कि बांग्लादेश की जनता की आवाज है. देश का भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब यहां स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव होंगे. राजनीति में वापसी का उद्देश्य सिर्फ यही है कि देश को फिर से संवैधानिक रास्ते पर लौटाया जाए.
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सवाल: क्या मोहम्मद यूनुस विदेशी समर्थन वाले बदलाव का चेहरा हैं?शेख हसीना: यूनुस को विदेशों में जो समर्थन मिला था, वह सिर्फ उनकी आर्थिक छवि पर आधारित था. लेकिन सच्चाई यह है कि वे जनता की ओर से चुने हुए नेता नहीं हैं. वह लोकतांत्रिक सरकार का चेहरा नहीं है. वह अब एक ऐसी सरकार का चेहरा हैं, जिसके पीछे कट्टरपंथी समूह काम कर रहे हैं. पश्चिम अगर उन्हें नरम चेहरा मानता है तो वे भ्रम में हैं.
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सवाल: आप भारत से किस तरह की मदद की अपेक्षा करती हैं?शेख हसीना: भारत ने पहले ही आश्रय और कूटनीतिक समर्थन दोनों दिया है. अवामी लीग को देश के भीतर किसी पुनर्निर्माण की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उसे करोड़ों लोगों का समर्थन प्राप्त है. हमें सिर्फ इतना चाहिए कि भारत और अन्य क्षेत्रीय देश बांग्लादेश में लोकतांत्रिक चुनावों की मांग को मजबूती से उठाते रहें.
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सवाल: क्षेत्रीय देशों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम क्या है ताकि बांग्लादेश पाकिस्तान की तरह न बन जाए?शेख हसीना: मेरा डर है कि यूनुस सरकार वास्तव में हिज्ब-उत-तहरीर जैसे चरमपंथी समूहों के प्रभाव में चल रही है. मैं भारत और क्षेत्रीय देशों से अपील करती हूं कि वे यूनुस से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग जारी रखें. बांग्लादेश को बचाने का यही एकमात्र रास्ता है.







