ऐसा पहली बार हो रहा है कि विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की पार्टियों के बीच नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और नाम वापसी की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद कम से कम 6 सीटों पर दोस्ताना संघर्ष (फ्रेंडली फाइट) हो रही है. शुरू में यह संख्या 11 थी. कांग्रेस और वीआईपी के 3 उम्मीदवारों के नाम वापस लेने के बाद यह संख्या घट कर 6 रह गई है. वैशाली, राजापाकड़, बछवाड़ा, रोसड़ा, लालगंज, बिहारशरीफ, तारापुर और कहलगांव सीटों पर नाम वापसी के बावजूद महागठबंधन के उम्मीदवारों में आपसी जोर आजमाइश होगी. कहीं कांग्रेस और आरजेडी के उम्मीदवार टकरा रहे तो कहीं सीपीआई और कांग्रेस के. कुछ सीटों पर वीआईपी और आरजेडी जोर आजाएंगे. सरल शब्दों में समझें तो महागठबंधन की ओर से कुल 243 सीटों पर 254 उम्मीदवार उतारे गए हैं. है न अजूबा बात!
उम्मीदवारों पर हमले तो पहले से ही शुरू हो गए थे, लेकिन इसका चरम मोकामा में दिखा. मोकामा पटना जिला के अंतर्गत आता है. आरोप है कि 30 अक्टूबर को जन सुराज पार्टी (JSP) समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह के समर्थकों ने कर दी. उन्हें गोली मारी गई. कारण और कर्ता जो भी रहे हों, पर इतना तो सच है कि दुलारचंद की हत्या हुई. चुनाव प्रचार के दौरान जेडीयू और जन सुराज पार्टी के समर्थकों के बीच भिड़ंत के दौरान यह घटना हुई. उसके ठीक अगले दिन (31 अक्टूबर) राजद उम्मीदवार वीणा देवी (सूरजभान सिंह की पत्नी) के वाहन पर पथराव की सूचना सामने आई. दुलारचंद के अंतिम संस्कार के दौरान भी फायरिंग और पथराव की घटना हुई.
कैंडिडेट पर हो रहे हमले!
इस बार दलीय प्रत्याशियों पर हमले की घटनाएं भी दिख रही हैं. पहले चरण के वोट के पहले कम से कम 3 तो ऐसी घटनाएं प्रकाश में आई ही हैं. टिकारी विधानसभा सीट से हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के उम्मीदवार और मौजूदा विधायक अनिल कुमार पर 29 अक्टूबर 2025 को गया जिले के दिघौरा गांव में प्रचार के दौरान ग्रामीणों ने हमला किया. भीड़ ने पत्थरबाजी की, जिसमें अनिल कुमार को हाथ और सिर पर गंभीर चोटें आईं. उनके भाई और पार्टी कार्यकर्ताओं को भी चोटें आईं, जबकि कई वाहनों को नुकसान पहुंचा. अंगरक्षकों को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं, खासकर पहले चरण (6 नवंबर) से पहले. जन सुराज पार्टी का आरोप है कि मुजफ्फरपुर, बेगूसराय समेत कई क्षेत्रों में उसके उम्मीदवारों पर दबाव बनाया गया. हिंसा की घटनाओं की भी शिकायतें हैं. तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग (EC) से सवाल किया है कि अपराधियों की सुरक्षा कौन कर रहा है. प्रियंका गांधी ने शनिवार को इसे ‘जंगल राज’ बताया. जिस तरह की तनातनी अभी दिख रही है, उस पर विराम वोटिंग खत्म होने के बाद ही लगने की उम्मीद है. चुनाव आयोग को भी लगता है कि चुनाव में आपराधिक तत्वों का प्रवेश हो सकती है, इसलिए सीमावर्ती राज्यों को सतर्क की उसने निर्देश भी दिए है.
बिहार में वर्ष 2016 से ही शराबबंदी लागू है. इसके बावजूद विधानसभा चुनाव के दौरान जांच एजेंसियों ने अब तक करोड़ों की अवैध शराब जब्त की है. माना जाता है कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए बिहार में शराब का स्टाक किया जा रहा है. चुनाव कार्यक्रम की घोषणा (6 अक्टूबर 2025) से लेकर 1 नवंबर 2025 तक आचार संहिता लागू होने के बाद विभिन्न जिलों से भारी मात्रा में शराब जब्त की गई है. इसकी कुछ बानगी देखें. 6 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2025 तक लगभग 5.15 लाख लीटर शराब जब्त हुई. इसकी कीमत 16.11 करोड़ आंकी गई है. मद्य निषेध विभाग ने सारण में 34,504 लीटर, भोजपुर में 31,171 लीटर और पटना में 26,553 लीटर शराब जब्त की. 6 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक कुल 64.13 करोड़ की जब्ती हुई, जिसमें 23.41 करोड़ की सिर्फ शराब है.
18 नवंबर को हमलोग शपथ लेंगे………….
जनता दल यूनाईटेड नेता अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे और राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि जिस तरह वह घटना हुई, यह होना तय था। आज प्रधानमंत्री आ रहे हैं, और रोहतास में एक पिता-पुत्र की हत्या कर दी गई। यह ‘महाजंगलराज’ है, लेकिन प्रधानमंत्री को यह दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, बिहार अपराध के मामले में शीर्ष पर है। उन्होंने दावा किया कि हम 14 नवंबर को सरकार बनाने जा रहे हैं और 18 नवंबर को शपथ लेंगे। 26 नवंबर से 26 जनवरी के बीच, जाति या धर्म की परवाह किए बिना, हर अपराधी जेल में होगा। खरमास में सब अपराधियों का खात्मा हो जाएगा। किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा।







