बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने राज्य की 68 सीटों पर प्रत्याशियों के चयन के लिए बड़े पैमाने पर सर्वे कराने का फैसला किया है। कांग्रेस की रणनीति के अनुसार हर सीट पर तीन- तीन संभावित उम्मीदवारों के नाम खोजे जा रहे है। इन नामों के आधार पर सर्वे के नतीजे के आधार पर समिति की अगली बैठक 3 अक्टूबर को होगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में रविवार को हुई स्क्रीनिंग समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। अजय माकन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, प्रभारी और चुनावी प्रबंधक शामिल हुए। कांग्रेस का मानना है कि इस बार बिहार में गठबंधन के भीतर रहते हुए भी पार्टी को अधिक सीटें मिल सकती हैं, इसलिए पहले से तैयारी कर लेना जरूरी है।
कांग्रेस की RJD पर दबाव बनाने की रणनीति?
विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस की यह रणनीति महागठबंधन के बड़े दल आरजेडी पर दबाव बनाने के तौर पर भी देखी जा रही है। अभी तक सीट शेयरिंग पर अंतिम समझौता नहीं हुआ है, लेकिन कांग्रेस ने 68 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे संदेश यह जाता है कि पार्टी अपनी जमीन मजबूत करने के साथ-साथ गठबंधन में भी अपनी दावेदारी को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
कांग्रेस के सर्वे के बाद RJD से होगी सीट शेयरिंग पर अंतिम दौर की बात
पार्टी ने यह भी तय किया है कि सर्वे में जनता के बीच लोकप्रियता, संगठनात्मक सक्रियता और जातीय समीकरणों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस बार उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह ‘विजेता उम्मीदवार की अवधारणा पर किया जाएगा। कांग्रेस के इस सर्वे और स्क्रीनिंग प्रक्रिया के बाद ही आरजेडी के साथ सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम दौर की बातचीत होगी।
कांग्रेस समिति से बना सकती है दूरी
कांग्रेस उन तीन चर्चित विधेयकों पर विचार करने वाली संसद की संयुक्त समिति से दूरी बना सकती है, जिनमें गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिन तक गिरफ्तार रहने के बाद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान किया गया है। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के फैसले के बारे में लोकसभा अध्यक्ष को बहुत जल्द अवगत कराया जा सकता है।







