प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव से उनका बड़ा अस्त्र छीन लिया. लोकसभा चुनाव के बाद से ही तेजस्वी ने बिहार में व्याप्त भ्रष्टाचार और अपराध को अपना चुनावी अस्त्र बनाने का संकेत दिया था. भ्रष्टाचार के सिलसिले में तेजस्वी ने किसी डीके टैक्स की बात कही थी. चुनाव सिर पर है और उन्होंने अभी तक डीके टैक्स और किरदार के बारे में कुछ नहीं बताया. तेजस्वी नीतीश कुमार की सरकार का हिस्सा भी रहे हैं. खुद डेप्युटी सीएम थे तो उनकी पार्टी आरजेडी के कई लोग दूसरे विभागों के मंत्री रहे. ऐसा नहीं कि उनके पास अफसरों के भ्रष्टाचार की जानकारी नहीं होगी. पर, अवसर तो उन्होंने गंवा दिया. जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बाजी मार ली. प्रशांत किशोर भले कहते हैं कि उनके पास 100 से अधिक नेताओं और अफसरों के भ्रष्टाचार के सबूत हैं, पर रणनीतिक ढंग से उन्होंने एनडीए नेताओं पर ही वार करना पहले शुरू किया. उन्हें पता है कि चुनाव मे अफसरों से अधिक नेताओं के मुद्दे क्लिक करेंगे. इसीलिए उन्होंने नेताओं को टारगेट किया है. नेताओं में भी ऐसे लोगों को उन्होंने पहले टारगेट किया, जो अपने-अपने दलों में सीएम के संभावित चेहरों में शुमार हैं. मसलन सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल और संजय जायसवाल. जेडीयू के अशोक चौधरी सीएम के दावेदार तो नहीं हैं, लेकिन अपनी पार्टी के रसूखदार नेता हैं. उन्हें नीतीश कुमार का करीबी बताया जाता है. नीतीश को बेहद ईमानदार का सनद प्रशांत किशोर दे चुके हैं. यानी ईमानदार सीएम के कथित बेईमान मंत्री को प्रशांत किशोर ने निशाना बनाया है.
अशोक चौधरी पर घिसा-पिटा टेप चलाया
हालांकि, प्रशांत किशोर के प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर जितना हौव्वा बनाया गया, उस तरह का रहस्योद्घाटन उन्होंने नहीं किया. खोदा पहाड़, निकली चुहिया. शाब्दिक से अधिक इसका भावार्थ चलन में है. यानी पूरी मेहनत के बावजूद मामूली सफलता. जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर उर्फ PK ने अपने पोल खोल अभियान के तहत ठीक राहुल गांधी का रास्ता अपनाया है. राहुल कभी एटम फोड़ते हैं तो कभी हाइड्रोजन बम विस्फोट की मुनादी करते हैं. पर, उनके विस्फोट से किसी का कुछ बिगड़ता नहीं. प्रशांत किशोर ने अभी एनडीए नेताओं के भ्रष्टाचार उजागर करने का अभियान छेड़ रखा है. अभी तक वे सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल, संजय जायसवाल और अशोक चौधरी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. अगला निशाना किसे बनाया है, इस बारे में उन्होंने एक दिन पहले ही घोषणा की कि वे बड़ा बम फोड़ने वाले हैं. इससे पिछले मौकों की तरह लोगों को किसी ‘नए चेहरे’ के बारे में उम्मीद थी. सोमवार (29.9.25,) को वे बड़ा धमाका करेंगे, सोशल मीडिया पर इसे लेकर खूब चर्चा हुई. पर, मीडिया के भारी जमावड़े को उन्होंने जो जानकारी दी, वह घिसा-पिटा टेप निकला. उन्होंने तीसरी बार अशोक चौधरी के ही कथित कारनामे बताए, टुकड़ों-टुकड़ों में वे पहले भी ये बातें बता चुके हैं. खैर, एक बात तो माननी पड़ेगी. सुशील कुमार मोदी के बाद भ्रष्टाचार उजागर करने वाला कोई व्यक्ति बिहार में फिलवक्त अगर है तो उसका नाम प्रशांत किशोर है. हां, सुशील मोदी ने जितने भ्रष्टाचार उजागर किए, उनमें शायद ही कोई कोर्ट से बच पाया, लेकिन प्रशांत किशोर का कोई धमाका अभी तक ऐसा नहीं रहा है.
क्या PK को मिल पाएगा चुनावी फायदा
प्रशांत किशोर का दावा है कि बिहार के 100 से अधिक नेताओं-अफसरों के भ्रष्टाचार के कागजात उनके पास हैं. उनसे पाई-पाई वसूलने का वे काम करेंगे. अगर कागजात सच में उनके पास हैं तो उसे सार्वजनिक करने में इसलिए उन्हें विलंब नहीं करना चाहिए कि पाई-पाई वसूलने का संकल्प तो उन्होंने ही लिया है. चूंकि वे अपने भंडाफोड़ अभियान से चुनावी लाभ हासिल करना चाहते हैं, इसलिए अब उन्हें अधिक विलंब नहीं करना चाहिए. अक्तूबर के पहले सप्ताह में चुनाव का ऐलान भी होने की संभावना है. अव्वल तो पाई-पाई वसूलने का अवसर उन्हें तभी मिलेगा, जब उनकी सरकार बने. या फिर उनके सहयोग से कोई सरकार बने. दोनों के लिए विधायकों की जरूरत होगी. यह तो तभी पता चलेगा, जब यह संकेत हो कि उनके कितने कैंडिडेट के जीतने की संभावना है. तभी भावी जरूरतमंद उन्हें भाव भी देंगे. उपचुनावों में उनका असर यही रहा कि कहीं एनडीए का उम्मीदवार जीता तो कहीं इंडिया ब्लाक का. 10 प्रतिशत वोट पाकर भी उनकी पार्टी का कोई कैंडिडेट नहीं जीता. अलबत्ता दोनों गठबंधनों को हराने का काम जन सुराज ने जरूर किया. अभी तक सर्वे एजेंसियों के पोल में भी जन सुराज की सीटें दहाई में जाती नहीं दिखतीं.
कमाई और दान का रिकार्ड बनाया PK ने
प्रशांत पोलिटिशियन बनने आए है. इसमें वे कामयाब होंगे या फ्लॉप, यह समय बताएगा, लेकिन उनकी व्यावसायिक समझ भी कम नहीं है. यह बात उन्होंने खुद प्रेस कान्फ्रेंस में बता दी. सिर्फ 2 घंटे की कंसल्टेंसी फी 11 करोड़ तक वसूलते हैं PK. उन्होंने नवयुगा कंस्ट्रक्शन से दो घंटे के लिए मिले अब तक के अधिकतम 11 करोड़ रुपए का हवाला भी दिया. यानी प्रति मिनट 916666 रुपए. सेकेंड में हिसाब देखें तो 7638 रुपए प्रति सेकंड. अपनी आर्थिक ईमानदारी का सनद खुद जारी कर उन्होंने बताया कि 243 करोड़ की अपनी कमाई का आधा से कुछ ही कम 98 करोड़ तो दान कर दिए. यह सुन कर किसी को भी भामाशाह की दानशीलता उनके आगे फीकी लगने लगेगी. पर, हकीकत उन्होंने यह बताई कि अपनी ही जन सुराज पार्टी को पैसे दान किए. उनके त्याग की भी कुछ लोग बलइया लेंगे. आज के समय में जब कोई एक पैसा किसी पर खर्च करने से पहले 10 बार नफा-नुकसान का आकलन करे, वहां कोई अपनी कमाई का तिहाई से अधिक हिस्सा दान कर दे तो उसकी बलैया लेनी ही चाहिए. इसलिए कि बिहार के राजनीतिकों में प्रशांत किशोर ही तने बड़े दानवीर दिखे हैं.







