लद्दाख के सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. लद्दाख में हाल ही में हुई हिंसा के बाद यह एक्शन लिया गया है. उन्हें 2:30 बजे निर्धारित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया. वांगचुक को शुक्रवार को लेह पुलिस ने गिरफ्तार किया, जिससे व्यापक प्रतिक्रियाएं सामने आईं और चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर चिंताएं बढ़ गईं हैं. वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया है, लेकिन अभी तक जेल नहीं भेजा गया है.
वांगचुक के NGO का FCRA रद्द
इससे पहले गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक के NGO का FCRA रद्द कर था, इसका मतलब ये हुआ कि सोनम वांगचुक का NGO अब विदेश से कोई अंशदान नहीं ले सकता है। बता दें कि जांच में वित्तीय गड़बड़ी के सबूत मिले थे और इसी को लेकर फॉरेन कंट्रीब्यूशन पर रोक लगा दी गई। वांगचुक के NGO को 20 अगस्त को ही नोटिस जारी किया गया था लेकिन जो जबाव दिया गया उसमें वित्तीय अनियमितता पर कोई संतुष्ट जवाब नहीं मिल सका। वांगचुक पर मनी लॉन्ड्रिंग के भी आरोप लगे हैं।
गृह मंत्रालय की एक टीम ने हालात का जायजा लिया
इस बीच गृह मंत्रालय की एक टीम ने शुक्रवार को लेह शहर में लगातार तीसरे दिन कर्फ्यू जारी रहने के बीच समग्र सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए कई बैठकें कीं। अधिकारियों ने बताया कि कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है। राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के विस्तार की मांग को लेकर केंद्र के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान हिंसा भड़क उठी थी जिसमें चार लोगों की मौत हो गयी और 90 अन्य घायल हो गए थे।
प्रतिबंधों में दी जा सकती है ढील
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘लद्दाख में सुरक्षा स्थिति कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रही। लोगों को आवश्यक वस्तुएं खरीदने की अनुमति देने के लिए प्रतिबंधों में बाद में ढील दिए जाने की संभावना है।’’ व्यापक झड़पों के बाद 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि करगिल सहित अन्य प्रमुख शहरों में पांच या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाने वाली निषेधाज्ञा के तहत सख्त पाबंदियां लागू रहीं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दंपुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान सुनसान सड़कों पर गश्त करते देखे गए। कई इलाकों में लोगों ने शिकायत की कि उनके पास राशन, दूध और सब्जियों सहित आवश्यक वस्तुओं की कमी हो रही है।
दो दिनों के लिए सभी सरकारी और प्राइवेट शैक्षणिक संस्थान बंद
लेह के ज़िला मजिस्ट्रेट रोमिल सिंह डोंक ने शुक्रवार से दो दिनों के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान बंद रखने का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे। अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए बृहस्पतिवार को लेह पहुंची। उन्होंने एलएबी के प्रतिनिधियों के अलावा उपराज्यपाल, नागरिक और पुलिस अधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं।
एक दिन पहले NGO का FCRA लाइसेंस किया गया था रद्द
सोनम वांगचुक की गैर-लाभकारी संस्था स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का एफसीआरए (FCRA), 2010 के तहत विदेशी चंदा लेने का रजिस्ट्रेशन गृह मंत्रालय ने गुरुवार को रद्द कर दिया था.
वांगचुक का जवाब
वांगचुक ने लद्दाख में हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के लिए गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने को ‘बलि का बकरा’ बनाने की रणनीति बताते हुए गुरुवार को कहा था कि इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की मूल समस्याओं से निपटने से बचना है. वांगचुक ने आगे कहा कि वह कड़े जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं. वांगचुक ने कहा था कि ये कहना कि यह (हिंसा) मेरे या कांग्रेस द्वारा भड़काई गई थी, समस्या के मूल से निपटने के बजाय बलि का बकरा ढूंढ़ने जैसा है, और इससे कोई हल नहीं निकलेगा.’
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा से बातचीत में वांगचुक ने कहा था, ‘वे किसी को बलि का बकरा बनाने की चालाकी कर सकते हैं, लेकिन वे बुद्धिमान नहीं हैं. इस समय, हम सभी को ‘चतुराई’ की बजाय बुद्धिमत्ता की आवश्यकता है, क्योंकि युवा पहले से ही निराश हैं.’ जलवायु कार्यकर्ता ने कहा, ‘मैं देख रहा हूं कि वे कुछ ऐसा मामला बना रहे हैं, ताकि मुझे जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार करके दो साल के लिए जेल में डाल सकें. मैं इसके लिए तैयार हूं, लेकिन सोनम वांगचुक को आजाद रखने के बजाय जेल में डालने से समस्याएं और बढ़ सकती हैं.’







