ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान नये तरीके से खेल रहा है. सऊदी अरब के साथ सैन्य गठजोड़, अमेरिका और चीन के साथ साथ नये समीकरण बनाने के बीच पाकिस्तान आतंकवादियों के साथ भी नई रणनीति पर काम कर रहा है. मिडिया को कुछ नये सबूत मिले हैं. सूत्रों और तस्वीरों से पुष्टि होती है कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन, खासकर जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल्लाह मुजाहिद्दीन, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में रणनीति के तहत अपने कैंप ट्रांसफर कर रहे हैं. हालांकि, यह निर्णय ये भी दर्शाता है कि अब आतंकी संगठन पीओके को असुरक्षित मानने लगे हैं, जबकि इसकी भौगोलिक स्थिति और अफगान सीमा से निकटता के कारण उन्हें अधिक फायदा पहुंचाता है.
मानसेहरा नया ठिकाना

आतंकवादियों को पाकिस्तान सुरक्षित पनाह के रूप में मानसेहरा भेज रहा है. मानसेहरा पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के हजारा डिवीजन में स्थित है. हाल ही में यहां जैश-ए-मोहम्मद ने वास्तव में भारत-पाकिस्तान मैच शुरू होने से लगभग 7 घंटे पहले एक सार्वजनिक भर्ती अभियान का आयोजन किया था. 14 सितंबर को मनसेहरा में ये भर्ती की गई. दिलचस्प बात यह है कि यह भर्ती अभियान पाकिस्तानी पुलिस की सुरक्षा में चलाया गया.
लोअर डीआईआर में भी कैंप

खैबर पख्तूनख्वा के ही लोअर डीआईआर में हिज़्बुल एक नया ट्रेंनिंग कैंप बना रहा है. इसका नाम HM 313 है. एनडीटीवी ने भारतीय खुफिया एजेंसियों के एक डोजियर को विशेष रूप से एक्सेस किया है, जिसमें न केवल विवरण दिया गया है, बल्कि पाकिस्तान की इन साजिशों के विभिन्न स्थानों की तस्वीरें और वीडियो भी हैं. पाकिस्तानी आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिद्दीन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना के समर्थन से देश के पश्चिम में अंदरूनी इलाकों में, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पंजाब से खैबर पख्तूनख्वा में अब अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं.
पेशावर भी आतंकियों का गढ़

आप नक्शे पर देख सकते हैं कि यह कहां स्थित है. ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ यहीं आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप बनाए जा रहे हैं. जैश-ए-मोहम्मद यहां एक बड़े आयोजन की योजना बना रहा है. यह आयोजन मसूद के भाई की हत्या की याद में आयोजित किया जा रहा है, और इस आयोजन का आयोजन अल-माराबुन के नाम से किया जा रहा है. एनडीटीवी को एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि पाकिस्तानी आतंकी समूह, खासकर जैश-ए-मोहम्मद, अब खैबर पख्तूनवा के पेशावर में एक विशाल रैली करने जा रहा है. 25 सितंबर को यह अल मरीबेथुन के नेतृत्व में ये रैली होगी. ये जैश-ए-मोहम्मद का नया नाम है, एक नया गढ़ा हुआ नाम. जैश-ए-मोहम्मद पर संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने बहुत लंबे समय से प्रतिबंध लगा रखा है और इसीलिए आगे किसी भी तरह के प्रतिबंधों से बचने के लिए यह नाम बदला गया है. पाकिस्तानी सरकार और अपने सहयोगियों से दान राशि इकट्ठा करने के लिए, नाम परिवर्तन किया गया है. इसके अलावा, हिजबुल्लाह मुजाहिद्दीन अपने कैडर को ट्रेनिंग देने और अन्य उद्देश्यों के लिए तेजी से खैबर पख्तूनख्वा भेज रहा है. साफ है कि पाकिस्तान आतंकवादियों के साथ फिर कुछ खतरनाक प्लान कर रहा है.
सऊदी, चीन, अमेरिका क्या करेंगे

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कम से कम 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों को भारतीय वायुसेना ने नष्ट कर दिया था. हम इस समय यह भी दावा कर सकते हैं कि यह ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सशस्त्र बलों के डर के कारण है कि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से खैबर पख्तूनख्वा और पेशावर जा रहे हैं. हालांकि, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लॉन्च पैड बने रहेंगे, क्योंकि इन लॉन्च पैड्स का इस्तेमाल वर्षों से भारत में घुसपैठ के लिए किया जाता रहा है. भारत की खुफिया एजेंसियां और सेना पाकिस्तान की सभी चालबाजियों पर नजर बनाए हुए हैं. अब देखना ये है कि भारत से दोस्ती का नया सिलसिला शुरू करने वाले चीन और अमेरिका क्या इसके बाद भी पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को जारी रखते हैं या उसे अलग-थलग करते हैं. वहीं भारत का रणनीतिक सहयोगी सऊदी अरब इस पर क्या रुख अपनाता है.
खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) पाकिस्तान का एक उत्तर-पश्चिमी प्रांत है, जो अपनी पश्तून बहुल आबादी और अफगानिस्तान सीमा के लिए प्रसिद्ध है। इसका पुराना नाम नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस (NWFP) था।
भूगोल और जनसंख्या
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क्षेत्रफल: करीब 1,01,741 वर्ग किलोमीटर
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आबादी: लगभग 4 करोड़, जिसमें 75-80 फीसदी लोग पश्तून समुदाय के हैं। मुख्य भाषा पश्तो है।
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सीमा: पश्चिम में अफगानिस्तान, दक्षिण में बलूचिस्तान, पूर्व में पंजाब, इस्लामाबाद और कश्मीर, उत्तर में गिलगित-बाल्टिस्तान
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
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1947 के विभाजन के समय यहां के कई लोग भारत में विलय के पक्षधर थे, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने जनमत संग्रह में भारत से विलय या स्वतंत्र रहने का विकल्प नहीं दिया। मुख्य रूप से पाकिस्तान के पक्ष में वोट हुआ और NWFP पाकिस्तान का हिस्सा बना।
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2018 में FATA (संघ प्रशासित आदिवासी क्षेत्र) को इस प्रांत में शामिल किया गया.
वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक स्थिति
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क्षेत्र में लगातार आतंकवादी घटनाएं और सांप्रदायिक संघर्ष होते हैं। हाल में ही यहाँ पुलिस, सेना और आम नागरिकों पर हमला और आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं।
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भौगोलिक विविधता में ऊँची पर्वत श्रृंखलाएं, घाटियाँ, फार्मिंग ज़ोन और प्राकृतिक सुंदरता शामिल है।
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बाढ़ और प्राकृतिक आपदाएँ यहाँ आम समस्या हैं; अगस्त 2025 में बाढ़ से 200 से अधिक मौतें हुईं।
विशेष तथ्य
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अफ़ग़ान सीमा से नजदीकी के कारण यह प्रांत पाकिस्तान-आतंकवाद, तस्करी, और सुरक्षा मुद्दों के लिहाज से काफी संवेदनशील है।
खैबर पख्तूनख्वा की ऐतिहासिक और राजनीतिक जटिलता इसे पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के राजनीतिक भूगोल में काफी महत्वपूर्ण स्थान देती है।खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) पाकिस्तान का उत्तर-पश्चिमी प्रांत है, जिसे पहले नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस (NWFP) के नाम से जाना जाता था। यहाँ पश्तून बहुल आबादी रहती है और इसकी सीमा अफगानिस्तान से लगती है।
मुख्य तथ्य
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क्षेत्रफल: लगभग 1,01,741 वर्ग किमी
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आबादी: करीब 4 करोड़, जिसमें लगभग 75-80% पश्तून हैं
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भाषाएँ: पश्तो, उर्दू, हिंदी, मंजोली आदि
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मुख्य शहर: पेशावर (राजधानी), एबटाबाद, स्वात, मानसेहरा, डेरा इस्माइल खान
ऐतिहासिक महत्व
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1947 में विभाजन के समय यहाँ भारत में विलय की मांग उठी थी, लेकिन ब्रिटिश राज ने केवल पाकिस्तान या ब्रिटिश शासन के विकल्प दिए, भारत के पक्ष में कोई विकल्प नहीं रखा और NWFP पाकिस्तान का हिस्सा बना.
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2018 में संघ प्रशासित कबायली क्षेत्र (FATA) का खैबर पख्तूनख्वा में विलय हुआ.
वर्तमान स्थिति
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सीमावर्ती इलाका होने के कारण आतंकवाद, हिंसा और तस्करी की समस्या अक्सर रहती है.
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अगस्त 2025 में भारी बाढ़ के चलते 200 से अधिक लोग मारे गए थे; क्षेत्र कमजोर बुनियादी ढांचे और प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील है.
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पाकिस्तान के ऑपरेशन और राजनीतिक उठापटक में यह क्षेत्र केंद्रीय भूमिका निभाता है.
खैबर पख्तूनख्वा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और रणनीतिक तौर पर पाकिस्तान में बहुत महत्वपूर्ण है।







