गयाजी का अर्थ बिहार के गया तीर्थस्थल से है, जिसे अब आधिकारिक रूप से ‘गयाजी’ कहा जाने लगा है। यह स्थान हिन्दू धर्म में पितरों के मोक्ष और पिंडदान के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहाँ विष्णुपद मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल स्थित हैं, जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं और अपने पूर्वजों की आत्मा को शांति दिलाने की कामना से पुण्य कर्म करते हैं। ‘गयाजी’ में पिंडदान करने की परंपरा महाभारत, पुराणों और रामायण तक प्राचीन है। भगवान राम ने अपने पिता दशरथ, युद्धिष्ठिर ने अपने पूर्वजों और आज भी देशभर के लाखों लोग पितृ पक्ष में यहां आकर पिंडदान करते हैं। पिंडदान के लिए चावल, दूध, घी, गुड़, शहद, और तिल का प्रयोग होता है, विधि विधान के अनुसार इसे फल्गु नदी एवं विष्णुपद मंदिर परिसर में संपन्न किया जाता है। मान्यता है कि गयाजी में पिंडदान करने से 108 कुल और सात पीढ़ियों का उद्धार होता है
मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष में पितरों की आत्माएँ पृथ्वी पर आती हैं, ताकि वे अपने वंशजों के द्वारा दिया गया भोजन, जल और तर्पण ग्रहण कर सकें। लेकिन यदि उन्हें श्राद्ध से तृप्ति नहीं मिलती, तो वे असंतुष्ट होकर लौट जाते हैं और परिवार में कष्ट देते हैं। जो लोग पूरे पितृपक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाते, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या का दिन सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। इस दिन श्राद्ध करने से सभी पितर तृप्त हो जाते हैं और आशीर्वाद देते हैं। यह दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति और वंशजों के कल्याण के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन श्राद्ध करने से पितरों की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहता है।इस दिन का महत्व कई पौराणिक कथाओं से पता चलता है। जैसे एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब महाभारत काल में राजा युधिष्ठिर ने भी भगवान कृष्ण से पूछा – “हे माधव! जिनके पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं, वे कैसे तर्पण करें?”
तो, भगवान कृष्ण ने उत्तर दिया – “पितृ पक्ष की अंतिम अमावस्या को यदि श्रद्धा से तर्पण किया जाए, तो वह सभी पितरों तक पहुँचता है, चाहे उनकी तिथि ज्ञात हो या नहीं।”
आज सर्वपितृ अमावस्या के दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गयाजी (गया) पहुंचकर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए पिंडदान और श्राद्धकर्म किया। यह पहला अवसर है जब राष्ट्रपति पद पर रहते हुए किसी राष्ट्रपति ने अपने पितरों के निमित्त गयाजी में पिंडदान किया है। पंडा राजेश लाल कटरियार ने बताया, ‘राष्ट्रपति का पैतृक घर ओडिशा के मयूरभंज में है। राष्ट्रपति मुर्मू के परिवार से बहुत पहले भी एक सदस्य गया जी आकर पिंडदान कर चुके हैं। हालांकि, यह पहला मौका होगा जब खुद राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू पिंडदान के लिए गयाजी आ रहीं हैं।’
कार्यक्रम और आयोजन
-
राष्ट्रपति सुबह गयाजी एयरपोर्ट पर बिहार के राज्यपाल के साथ पहुंचीं और वहां से सीधे विष्णुपद मंदिर गईं।
-
राष्ट्रपति ने विष्णुपद मंदिर परिसर और फल्गु नदी के किनारे विधिवत पिंडदान और कर्मकांड संपन्न किया।
-
उनके आगमन को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के सख्त इंतजाम, ट्रैफिक कंट्रोल प्लान और विशेष निगरानी की व्यवस्थाएं की थीं।
-
राष्ट्रपति के पिंडदान कर्मकांड में स्थानीय पंडितों व प्रशासनिक अधिकारियों ने मार्गदर्शन किया। इस अवसर ने पूरे देश में गयाजी के पितृपक्ष मेले को ऐतिहासिक और पावन बना दिया।
ऐतिहासिक महत्व
-
इतिहास में यह पहली बार हुआ जब राष्ट्रपति पद पर विराजमान किसी व्यक्ति ने गयाजी में पिंडदान किया हो, जिससे यह घटना गयाजी के धर्मिक महत्व को और बढ़ा गई।
-
राष्ट्रपति का यह धार्मिक कर्मकांड संपूर्ण विधि-विधान और परंपरा के साथ सम्पन्न हुआ, जिससे स्थानीय श्रद्धालुओं को भी प्रेरणा मिली।
गयाजी में पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष मिलने की लोकमान्यता है, और राष्ट्रपति द्वारा इस परंपरा का पालन करना उल्लेखनीय कदम है।
बेटे अनंत के साथ गयाजी पहुंचे प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी, पितरों का किया पिंडदान

मोक्ष और ज्ञान की भूमि गयाजी में देश के प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी शुक्रवार को विशेष विमान से गया अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचे. एयरपोर्ट से सीधे वो विष्णुपद मंदिर गए और विष्णुपद मंदिर में अपने पुर्वजों का पिंडदान किया. इस दौरान जिला प्रशासन के जरिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी.
पिंडदान में मौजूद रहे मुकेश अंबानी के बेटे अनंत
देश के प्रमुख उद्योगपति मुकेश अंबानी शुक्रवार को अपने पुत्र अनंत अंबानी के साथ बिहार के गया शहर स्थित विष्णुपद मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने हरि मंडप पर अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना करते हुए विधिपूर्वक पिंडदान और तर्पण किया। अंबानी परिवार के गयापाल तीर्थ पुरोहित शंभू लाल बिट्ठल ने बताया कि मुकेश अंबानी अपने पितरों के उद्धार हेतु गयाजी आए हैं। उन्होंने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्मकांड संपन्न किया।
इधर, अंबानी परिवार के के आगमन को देखते हुए विष्णुपद मंदिर परिसर में विशेष सुरक्षा और व्यवस्थाएं की गई थीं। गया एसएसपी ने पहले उनकी सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिया था। गया एयरपोर्ट से सड़क मार्ग द्वारा वे मोक्षधाम गयाजी पहुंचे, जहां स्थानीय श्रद्धालुओं और तीर्थ यात्रियों ने उनका स्वागत किया। मुकेश अंबानी और उनके पुत्र अनंत अंबानी ने पूरे विधिपूर्वक श्राद्ध और पिंडदान करते हुए अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
पितृपक्ष को लेकर धार्मिक ग्रंथों में क्या है मान्यता?
धार्मिक ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष मेला अवधि के दौरान पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध कार्य गया जी में करने से पितरों का उद्धार और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि इस अवधि में देश विदेश से लाखो की संख्या में हिन्दू सनातन धर्मावलंबी यहां आते है।ग्रंथों में वर्णित है कि त्रेता युग में भगवान श्री राम और सीता ने भी पिंडदान किया था.








