बिहार में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस बीच राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है। उनकी पार्टी का नाम ‘जनशक्ति जनता दल’ है और चुनाव चिन्ह ‘ब्लैकबोर्ड’ होगा। जनशक्ति जनता दल आगामी विधानसभा चुनाव भी लड़ेगी। इस बीच ‘जनशक्ति जनता दल’ ने संगठन विस्तार करना शुरू कर दिए है . इसी क्रम में बिहार की तेजतररार भारतीय जनता पार्टी की ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पूर्व सदस्य अर्चना रॉय भट्ट को जनशक्ति जनता दल का राष्ट्रीय महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। इनकी नियुक्ति से बिहार की महिलाओं को पार्टी में जुड़ने में इनकी सामाजिक अनुभव और पूर्व में किये कार्यो के द्वारा सहायक सिद्ध होगी।
अर्चना रॉय भट्ट बिहार की एक प्रमुख राजनीतिज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में प्रसिद्ध हैं, वे 1997 से लगातार समाज सेवा में सक्रिय हैं और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विशेष रूप से काम करती रही हैं। उन्होंने बिहार में छात्र नेता के रूप में कई धरने-प्रदर्शन किए और महिलाओं की शिक्षा व कल्याण के लिए अनेक प्रयास किए। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से 20 वर्षो तक जुड़ी रही । राजनीतिक रूप से, वे भाजपा युवा मोर्चा से लेकर राष्ट्रिय ओबीसी मोर्चा की सदस्य के रूप में कार्य कर चुकी है , इसके अलावा वे कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक समितियों में भी सक्रिय हैं, जैसे महिला कल्याण समिति और अशोका क्लब। अर्चना भट्ट ने झारखंड और पिछड़े वर्गों की सामाजिक समस्याओं पर भी काम किया है, तथा अपने समुदाय की पहचान को लेकर भी उन्होंने सोशल मीडिया पर अभियान चलाया है।
उन्होंने अपना राजनीतिक सफर 2004 से सक्रिय रूप जारी रखा है , जहां उन्होंने भाजपा के अन्य संगठनों में नेतृत्व की भूमिकाएं निभाईं। वे दूरदर्शन बिहार की एंकर और भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा की प्रदेश प्रवक्ता भी रह चुकी हैं। अर्चना रॉय भट ने अपने दो दशकों के भाजपा सफर में पार्टी के भीतर समानता, पिछड़े वर्गों और महिलाओं के हितों की प्रमुख पैरवीदार रह चुकी है। हाल ही में उन्होंने पार्टी से उपेक्षा मिलने के उपरान्त मोहभंग होने पर जनशक्ति जनता दल में योग्यदान दिया है . इनकी राजनीति में भूमिका महिलाओं,पिछड़ों और समाज के वंचित तबकों के अधिकारों और सम्मान के लिए आवाज बुलंद करने की रही है । इनके आने से जनशक्ति जनता दल नया दल होने के बावजूद बिहार की राजनीति में महिला नेतृत्व और सामाजिक बदलाव की एक महत्वपूर्ण आवाज़ बनेगी खासकर गरीब महिलाओं के लिए ।
बिहार में कमजोर वर्गों की महिलाओं और पिछड़ों की सामाजिक स्थिति सुधारने के साथ साथ उनकी पहचान और अधिकारों के लिए आवाज वर्षो तक इन्होने उठाई है। उनमे महिला शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक समानता को अपने प्रमुख एजेंडों के रूप में मानतीती हैं , जो जमीनी स्तर से सीधा जोडती है । जिसके कारण उन महिलाओं तक सीधी पहुच है जिनके पास अन्य कोई साधन न शेष रह पाते है । कोविड-19 महामारी के दौरान इन्होने जिस प्रकार से मास्क वितरण और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाए, जिसमें महिलाओं को मास्क बनाने और वितरित करने का प्रशिक्षण दिया वह काबिले तारीफ था । इसके अलावा महिलाओं के लिए शौचालय बनाने में अहम भूमिका निभाई, जिससे महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य में बहुत हद तक सुधार देखा गया । महिला कल्याण समिति की सचिव के रूप में महिलाओं के विकास पर काम किया और विभिन्न सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का संचालन किया। वही अशोका क्लब की अध्यक्षता करते हुए सांस्कृतिक और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक समरसता बढ़ाने का अतुलनीय प्रयास आज भी यद् किया जाता है ।
वर्तमान राजनीती में बड़े दलों के भीतर महिलाओं और पिछड़ों के प्रति घटते सम्मान, नेतृत्व में पारदर्शिता की कमी, और सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा में आने वाली राजनीतिक जटिलताओं के बिच महिलाओं की भागीदारी न्यूनतम होती जा रही है वही जनशक्ति जनता दल ने महिलाओं के आत्मसमान को प्राथमिकता देते हुए बड़े स्तर पर उनके विकास के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और मुख्यधारा में जोड़ने का दाइत्व अर्चना रॉय भट्ट के कन्धो पर सौपा है । इनके पूर्व के अनुभवों को देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की आने वाले दिनों में बिहार की राजनीती में महिलाओं की प्रथम पशंद जनशक्ति जनता दल ही होगा ।
‘जनशक्ति जनता दल — परिचय
नाम: जनशक्ति जनता दल (Janshakti Janata Dal)
स्थापना: यह पार्टी 2024-2025 के बीच बनी है।
किसके जरिए बनी: तेज प्रताप यादव के करीबी लोगों ने इसका गठन किया है।
चुनावी चिन्ह: ‘ब्लैकबोर्ड’ चुनाव आयोग ने इस चिन्ह को पार्टी को आवंटित किया है।
उद्देश्य एवं राजनीतिक स्थिति
पार्टी की प्राथमिकताएँ होती दिख रही हैं: शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, जात-पात व भागीदारी आदि सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दे।
चुनौतियाँ और संभावनाएँ
चुनौतियाँ:
नई पार्टी होने की वजह से संगठनात्मक आधार अभी विकसित होना बाकी है।
वोट बैंक बनाने, लोग पहचान बनाने और ज़मीन पर लोग जोड़ने की ज़रूरत है।
RJD जैसे स्थापित दलों से मुकाबला करना अपेक्षाकृत कठिन होगा।
संभावनाएँ:
तेज प्रताप यादव की लोकप्रियता और परिवार-परिसर में उनके प्रभाव से जनशक्ति जनता दल को राजनीतिक मान्यता और वोट मिल सकते हैं।
यदि पार्टी सामाजिक न्याय, जातीय संतुलन और युवाओं-महिलाओं के मुद्दों पर मजबूत दृष्टि अपनाए, तो वे मतदाताओं में स्वीकार्यता पा सकते हैं।
चुनाव चिन्ह जैसे “’ब्लैकबोर्ड’ ” और स्पष्ट राजनीतिक संदेश उनकी पहचान को स्थापित करने में मदद करेंगे।







