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जापान ने समुद्र में रेलगन फायरिंग करने वाला पहला देश बना, गेमचेंजर है हथियार

UB India News by UB India News
September 14, 2025
in खास खबर, सेना
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जापान ने समुद्र में रेलगन फायरिंग करने वाला पहला देश बना, गेमचेंजर है हथियार
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भारत के दोस्त जापान ने अमेरिका, रूस और चीन को हैरान करते हुए समुद्र में रेलगन का टेस्ट कर इतिहास रच दिया है। इस टेस्ट के साथ ही टोक्यो, इस प्रतिष्ठित तकनीक को इस्तेमाल करने वाला पहला देश बनने के और करीब पहुंच गया है। जापान की एक्वीजिशन टेक्नोलॉजी एंड लॉजिस्टिक एजेंसी (ATLA) ने घोषणा की है, यह टेस्ट जून से जुलाई 2025 के बीच JS असुका नाम के टेस्ट जहाज से किया गया है। इस 6,200 टन वजनी विस्थापन वाले टेस्टबेड पर रेलगन स्थापित किया गया था, जो युद्धपोत जैसी डिजाइन वाला है। परीक्षण में समुद्री लक्ष्य पर गोलाबारी की गई और ATLA ने इसका फोटो भी जारी किया है, जिसमें टर्रेट और फायर कंट्रोल रडार दिखाई दे रहे हैं। यह जापान की लगभग एक दशक पुरानी रेलगन परियोजना में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

ATLA ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि “एटीएलए ने जापान समुद्री आत्मरक्षा बल के सहयोग से इस साल जून से जुलाई की शुरुआत तक जहाज पर रेलगन शूटिंग टेस्ट किया है। यह पहली बार है जब जहाज पर लगे रेलगन को किसी असली जहाज पर सफलतापूर्वक दागा गया।” टीएलए ने 2023 में जेएस असुका से दुनिया की पहली रेलगन फायरिंग की है। ये टेस्ट एक काल्पनिक कहानी जैसा लगता है, जिसके लिए करीब 10 साल पहले काम शुरू हुआ था।

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जापान ने रेलगन का किया कामयाब टेस्ट
ATLA के मुताबिक इस टेस्ट के दौरान मध्यम-कैलिबर, टर्रेट-माउंटेड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन का इस्तेमाल किया गया है, जिसका वजन लगभग 8–9 टन है। पहले के परीक्षणों में यह प्रोटोटाइप करीब Mach 6.5 की स्पीड से गोलाबारी कर चुका है, जबकि 5 मेगाजूल ऊर्जा का उपयोग हुआ था। ATLA का लक्ष्य इसे 20 मेगाजूल तक बढ़ाना है, जिससे गोलाबारी की रेंज 150 किलोमीटर से ज्यादा हो सकती है और यह भारी प्रोजेक्टाइल या उच्च काइनेटिक इम्पैक्ट के लिए सक्षम होगा। यह तकनीक विशेष रूप से हाइपरसोनिक मिसाइल इंटरसेप्शन और एंटी-शिप मिशनों के लिए बनाई जा रही है।

रेलगन की खासियत यह है कि यह बारूद की बजाय इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फोर्स से प्रोजेक्टाइल को हाइपरसोनिक गति से लक्ष्य पर हमला करने के लिए भेजता है। इसकी वजह से गोलाबारी बेहद सटीक और शक्तिशाली होती है। हालांकि, इस तकनीक के कई तकनीकी मुद्दे हैं जैसे हाई एनर्जी की आवश्यकता, बैरल की गर्मी और घर्षण से क्षति, और लगातार फायरिंग के दौरान मैग्नेटिक तनाव। जापान ने इन चुनौतियों को पार करने के लिए खासा काम किया है और JS Asuka पर लगातार परीक्षण इसे और ज्यादा स्थिर और ऑपरेशन के काबिल बनाता है। इस टेस्ट से जापान अब हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी इंटरसेप्ट कर सकता है।

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