बिहार अधिकार यात्रा (जिसे ‘वोटर अधिकार यात्रा’ भी कहा गया) 2025 में बिहार की राजनीति का एक बड़ा घटनाक्रम रहा है। यह यात्रा विपक्ष के इंडिया गठबंधन—मुख्यतः कांग्रेस, राजद, और अन्य सहयोगी दलों—द्वारा आयोजित की गई थी, जिसमें राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव जैसे प्रमुख नेता शामिल हुए थे।
यात्रा का प्रमुख उद्देश्य
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मतदाता सूची में गड़बड़ी और बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए जाने के आरोप के विरोध में जनता को जागरूक करना तथा संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज़ उठाना।
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विपक्ष का आरोप रहा कि चुनाव आयोग और सरकार ने लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम लिस्ट से काट दिए हैं, जिनमें दलित, ओबीसी, मुस्लिम व गरीब समुदाय प्रमुख हैं।
यात्रा की पूरी रूपरेखा
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शुरुआत: 17 अगस्त 2025 को बिहार के सासाराम से।
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समापन: 1 सितंबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में विशाल रैली तथा मार्च के साथ।
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कुल दूरी: लगभग 1300 किलोमीटर।
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शामिल जिले: 23–25 जिले, 50–110 विधानसभा क्षेत्र।
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प्रमुख पड़ाव: यात्रा ने मगध, मिथिलांचल, सीमांचल सहित बिहार के प्रमुख अंचलों को स्पर्श किया और विभिन्न जिलों में रैलियाँ, जनसंवाद और सभाएँ आयोजित की गईं।
राजनीतिक मायने
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कांग्रेस और सहयोगी दलों के लिए यह यात्रा अपने जनाधार को पुनः मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा एवं जनता से सीधा संवाद साधने का बड़ा मंच बनी।
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यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चुनाव आयोग पर तीखे आरोप लगे, जबकि सत्ताधारी दलों ने इसे महज़ चुनावी नौटंकी बताया।
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राहुल गांधी ने इसे “संविधान व लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की क्रांति” बताया।
यात्रा के दौरान विवाद और घटनाएँ
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जगह-जगह विपक्ष एवं समर्थकों की झड़पें, आरोप–प्रत्यारोप।
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कई स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन व नारेबाजी।
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बड़े नेताओं की भागीदारी ने राजनीतिक गर्मी को और बढ़ाया।
निष्कर्ष
बिहार अधिकार यात्रा विपक्ष के लिए चुनावी रणनीति, कार्यकर्ता-मोबिलाइजेशन और जनता-connect का बड़ा अभियान रही। इसका असर अगले विधानसभा चुनावों में, खासतौर पर वोट कटने और चुनाव आयोग के फैसलों पर जनमत तैयार करने में देखा जा सकता है।







