एसएसबी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद हरैया थाना पुलिस को सौंप दिया. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में अब्दुल ने नेपाल की जेल से भागने की बात स्वीकार की है. हालांकि वह भारत में घुसने के पीछे की असली वजह बताने से बच रहा है. सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसका भारत में कोई नेटवर्क या संपर्क है या नहीं.
नेपाल से बिहार लौटने वालों में दहशत, बोले–मौत सामने से निकल गई, हर तरफ आग थी
‘मैं अपनी दवाई लेने के लिए नेपाल गया था, अचानक वहां पर हिंसा भड़क गई। चारों तरफ आगजनी, पथराव शुरू हो गया। हम सब जहां थे वहां कैद हो गए, हर समय यह लग रहा था कि कहीं उपद्रवी हमारे घरों में न घुस आएं। दो दिन बाद अब जाकर मामला कुछ शांत हुआ तो हम बीरगंज होते हुए बिहार वापस आ रहे हैं।
नेपाल में हालात बहुत खराब हैं, ऐसा लगता है जैसे मौत बगल से निकल गई। बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा है, कोई साधन नहीं मिल रहा है। 5 किलोमीटर पैदल चले, तब कोई गाड़ी मिली, उसने भी बीच रास्ते में छोड़ दिया। इसके बाद पैदल ही भारत की सीमा में प्रवेश किया।’
ये डर नेपाल से बिहार आए एक बुजुर्ग दंपती का है। वहां के हालात बताते-बताते उनको घबराहट होने लगती है, सांसें फूलने लगती हैं। उन्हें देखकर लगता है कि नेपाल की दहशत अभी भी उनकी आंखों में भरी हुई है। ऐसा ही डर का माहौल नेपाल से बिहार लौटने वाले सभी लोगों में दिखाई दे रहा है।
नेपाल में बिहार के लोग कैसे फंसे हैं? किन हालातों से वो लोग बाहर निकलकर आए, किस तरह से यहां वापस पहुंचे। दैनिक भास्कर की टीम ने बॉर्डर पर नेपाल से आने वाले लोगों से बात की..?
बॉर्डर पर हालात क्या हैं?
नेपाल में भड़की हिंसा के बाद बिहार के 7 जिलों पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज की इंटरनेशनल बॉर्डर को सील कर दिया गया है। हालांकि, भारत के जो लोग नेपाल में फंसे हैं उनका आईडी चेक कर इंडिया आने दिया जा रहा है। इस कर्फ्यू के कारण बॉर्डर पर ट्रकों की 5 KM लंबी लाइन लग गई है। करीब 10 हजार गाड़ियां फंसी हैं।
नेपाल से जुड़ा 726 किमी. लंबा ओपन बॉर्डर है
भारत-नेपाल के बीच 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा बिहार से लगता है। लगभग 726 किलोमीटर का इलाका मधुबनी, सीतामढ़ी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण से होकर गुजरता है।
इस सीमा की एक खासियत है- यहां कोई दीवार नहीं, कोई तारबंदी नहीं है। गांव-गांव और खेत-खेत से लोग हर दिन नेपाल-भारत बॉर्डर को पार कर आते-जाते हैं। इन दोनों देशों में रिश्ते भी हैं और कारोबार भी है, लेकिन अभी जो नेपाल में प्रोटेस्ट चल रहा है, उसका प्रभाव बिहार के लोगों पर भी पड़ रहा है।
बिहार के जो लोग हर दिन अपने कामों के कारण नेपाल जाते थे, अब उनका काम ठप हो गया है। बॉर्डर के पास का कारोबार भी ठप पड़ा है। वहीं, जो लड़कियां शादी कर नेपाल से भारत आईं हैं, वो अपने परिवार वालों से मिलने भी नहीं जा पा रही हैं।
बॉर्डर – 1
रक्सौल-बीरगंज बॉर्डर: सड़कों पर टायर जल रहे थे, लगा हमारी गाड़ी फूंक देंगे
रक्सौल-बीरगंज बॉर्डर पर वापस आने वाले लोगों ने मिडिया से बातचीत में बताया की यहां करीब 100 से ज्यादा SSB जवान और पुलिसकर्मी बॉर्डर पर मौजूद हैं। पूर्वी चंपारण के SP-DSP, DM तक बॉर्डर पर आकर यहां के हालातों के बारे में जानने की कोशिश की।
बॉर्डर पर नेपाल से गाड़ी चलाकर पहुंचे मोहम्मद इसराही बताते हैं, ‘नेपाल में स्थिति बहुत ही भयावह है। डर का माहौल है। नेपाल के विराटनगर से जब हमलोग भारत लौट रहे थे, तो हर जगह पर टायर जलाया गया था। हमलोग नेपाल में 2 दिनों से डर में जी रहे थे। ऐसा लग रहा था कि कभी भी हमारी गाड़ी फूंक देंगे।
मौत हमारे सामने से निकल गई। अब भारत आकर खुश हैं। अपने देश में आकर बहुत अच्छा लग रहा है। 2 दिनों बाद भारत में ही आकर खाना भी खाया है। जितने भी ड्राइवर हैं वो सभी डर से कांप रहे हैं। कई ड्राइवर अभी भी वहां फंसे हुए हैं। हमारी आंखों के सामने 10 गाड़ियों को जलाया गया है।’
रक्सौल निवासी अब्दुल्ला बताते हैं, ‘हम नेपाल के जीतपुर से करीब 20KM का सफर तय कर यहां आए हैं। जीतपुर में मेरा दुकान है। वहां की स्थिति देख अपनी पत्नी और बच्चों के साथ भारत लौट आए हैं। हम बिहार के रहने वाले हैं। बीरगंज में कर्फ्यू लगा हुआ है।
जीतपुर से गंडक फिर वहां से रक्सौल पहुंचे हैं। कुछ दूर के लिए गाड़ी मिली। इसके बावजूद 4-5 किमी पैदल चलना पड़ा। मेरे साथ छोटे बच्चे थे। छोटे बच्चों को पैदल चलने में काफी परेशानी हुई।’
15KM पैदल चलकर रक्सौल रेलवे स्टेशन पहुंचे यात्री
एक यात्री ने बताया, ‘हम 15 किलोमीटर पैदल चलकर रक्सौल रेलवे स्टेशन पहुंचे हैं। नेपाल में कोई सवारी नहीं मिल रहा है। सुरक्षा के मद्देनजर मैत्री पुल और अन्य चौकियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। डॉग स्क्वायड की मदद से यात्रियों के सामान की जांच की जा रही है।’
बॉर्डर- 2
सुपौल-नेपाल बॉर्डर: ऑटो वाले डरा रहे, 2500 रुपए मांगने लगे
सुपौल में भारत-नेपाल बॉर्डर पर डीएम सावन कुमार के नेतृत्व में एसएसबी और पुलिस सख्ती बरत रही है। कुनौली बॉर्डर पर नेपाल से लौटने वाले भारतीय मूल के लोगों को सघन जांच के बाद प्रवेश की अनुमति दी जा रही है, जबकि नेपाली नागरिकों के लिए भारतीय सीमा में एंट्री बंद कर दी गई है। भारतीय नागरिकों को भी नेपाल जाने से रोका जा रहा है।
नेपाल में फंसी एक महिला भारत लौटने के बाद बड़ी राहत महसूस करती दिखीं। उन्होंने बताया, ‘हिंसा को लेकर नेपाल में बस या ऑटो नहीं चल रहा है। ऐसी स्थिति में नेपाल के कलवारी स्थित मायके से अपने घर लौटने के लिए भारत-नेपाल बॉर्डर तक पैदल चलकर आना पड़ा। करीब 10 किलोमीटर तक पैदल चलकर आए हैं। सुबह घर से चले थे, लेकिन दूरी अधिक होने की वजह से मुझे करीबन 5 से 6 घंटे पैदल चलना पड़ा है।’
सुपौल के रहने वाले नरेश शाह ने बताया, ‘नेपाल की स्थिति बहुत खराब है। हम अपने पिताजी का इलाज करवाने नेपाल गए थे। अभी फिलहाल जान बचाकर हमलोग अपने देश भारत लौट आए हैं।’
‘भारत से नेपाल नहीं आने दिया जा रहा’
भारत से नेपाल जा रहे एक परिवार को सुपौल के कुनौली बॉर्डर पर घंटों इंतजार करना पड़ा। इसके बाद भी नेपाल जाने की अनुमति नहीं दी गई। रोहतास के डेहरी के रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया, ‘मेरी पत्नी का मायका नेपाल में है। वो अपने चाचा के बरसी में शामिल होने जा रही थी, लेकिन नेपाल में हिंसा को देखते हुए बॉर्डर पार नहीं करने दिया गया।’
बॉर्डर- 3
अररिया-नेपाल बॉर्डर: आसपास के लोग घरों में कैद कर दिए गए
अररिया निवासी गुड्डू कुमार ने बताया, ‘बॉर्डर सील होने के कारण सभी लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। खासकर जो बॉर्डर के पास रहते हैं, उन्हें अपने घरों में ही बंद रहना पड़ रहा है। गाड़ियां नहीं चल रही है, इस कारण कहीं आना-जाना नहीं हो पा रहा है।’
कविता बताती हैं, ‘हम लोग नेपाल के रहने वाले हैं। बॉर्डर पर होने के कारण राशन का समान खरीदने अररिया आ जाते हैं। विराटनगर में रूम लेकर रहते हैं। हम लोगों के घरों के पास भी तोड़फोड़ हो रही है। बहुत डर लग रहा है। नेपाल में बहुत दिक्कत हो रही है। हमारे परिवार के लोग वहां फंसे हुए हैं, कुछ पता नहीं चल रहा कि उनके हालात क्या हैं?’
बॉर्डर- 4
जयनगर-नेपाल बॉर्डर : दहशत में सभी दुकानें बंद करा दी गईं
नेपाल बॉर्डर पर दुकान चलाने वाली शिवानी बोलीं, ‘वर्तमान समय में बाजार की स्थिति बेहद खराब है। बॉर्डर बंद होने के कारण ग्राहकों आना बिल्कुल बंद हो गया है। पहले जहां दुकानें ग्राहकों से भरी रहती थीं, वहीं अब बाजार में सन्नाटा पसरा है।
कस्टमर नहीं आने से व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो गया है और दुकानदारों को भारी नुकसान हो रहा है। जब तक बॉर्डर पर आवागमन सामान्य नहीं होगा, तब तक व्यापार की स्थिति सुधरना मुश्किल है। फिलहाल बाजार पूरी तरह बंद है और बिजनेस ठप है।’
बॉर्डर- 5
किशनगंज, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी से जुड़ा नेपाल बॉर्डर
नेपाल के बिना इंडिया अधूरा है, इंडिया के बिना नेपाल अधूरा है। दोनों देश सटे होने के कारण हर दिन बॉर्डर के पास के लोगों का आना जाना होता है, लेकिन मंगलवार से बॉर्डर सील होने की वजह से लोग अपने-अपने जगहों पर फंसे हैं। हालांकि, यहां की स्थिति थोड़ी सामान्य है। यहां के बॉर्डर पर व्यापार पर असर पड़ा है।
भारतीय प्रेम बहादुर बताते हैं, ‘मेरा घर भारत में है। मैं 10 सालों से यहीं रह रहा हूं। अभी कुछ काम से मैं नेपाल गया था। 2 दिनों से वहां पर फंसा था। वहां के हालातों को देखने के बाद भारत लौट आया हूं, लेकिन अभी आने में काफी परेशानी हुई है।
‘ई-रिक्शा वाले मनमर्जी भाड़ा ले रहे हैं। जिस रास्ते को वो लोग 50 रुपए भाड़ा लेते थे, अब वे लोग करीब 300 रुपए ले रहे हैं। इस कारण हम राहगीरों को बहुत परेशानी हुई है। इंडिया आकर बहुत अच्छा लग रहा है। अब परिवार वालों से मिलेंगे।’







