बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज (मंगलवार) शाम दिल्ली के लिए रवाना होंगे. शाम की फ्लाइट से उन्हें जाना है. बताया जा रहा है कि अचानक ही दिल्ली जाने का ये कार्यक्रम बना है. बिहार में इस साल चुनाव होना है ऐसे में राजनीतिक लिहाज से उनका दिल्ली दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सियासी हलचल तेज हो गई है.
दिल्ली में दो दिन रह सकते हैं सीएम
बिहार में अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होना है. खबर है कि नीतीश कुमार दिल्ली में दो दिनों तक रह सकते हैं. यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए का विधानसभावार कार्यकर्ता सम्मेलन चल रहा है.
क्या कुछ हो सकता है कार्यक्रम?
नीतीश कुमार दिल्ली में बीजेपी आलाकमान से आगामी विधानसभा चुनाव पर चर्चा के लिए मुलाकात कर सकते हैं. मुलाकात होती है तो सीट शेयरिंग, चुनावी रणनीति आदि पर मंथन हो सकता है. उप राष्ट्रपति चुनाव पर भी बीजेपी शीर्ष नेतृत्व से वार्ता हो सकती है. नौ सितंबर को उप राष्ट्रपति के लिए चुनाव है. सीपी राधाकृष्णन एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं. उनसे भी नीतीश कुमार की मुलाकात संभव है. नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए बिहार में चुनाव लड़ेगा. वही सीएम चेहरा हैं यह स्पष्ट किया जा चुका है.
दिल्ली यात्रा का मुख्य उद्देश्य
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार से मुलाकात करेंगे और भाजपा के शीर्ष नेताओं से चुनावी रणनीति व सीटों के बंटवारे पर चर्चा करेंगे. बिहार में एनडीए विधानसभा वार कार्यकर्ता सम्मेलन भी चल रहा है, जिससे यह दौरा संगठन को मजबूत करने के लिहाज से अहम है. बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार दिल्ली में दो दिन रह सकते हैं और गठबंधन को एकजुटता दिखाने की कोशिश की जाएगी.
चुनावी और राजनीतिक महत्व
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा-जदयू के बीच तालमेल, गठबंधन, और रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है. नीतीश कुमार बिहार में एनडीए के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में चुनाव लड़ेंगे.
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा के जवाब में एनडीए की तैयारी और प्रधानमंत्री मोदी की आगामी बिहार यात्रा भी चर्चा में है. नीतीश कुमार की दिल्ली यात्रा सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि बिहार चुनाव, गठबंधन और उपराष्ट्रपति चुनाव की रणनीति को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
दिल्ली दौरे का मुख्य एजेंडा क्या है
नीतीश कुमार के दिल्ली दौरे का मुख्य एजेंडा विधानसभा चुनाव की तैयारी, भाजपा नेतृत्व के साथ सीट शेयरिंग और चुनावी रणनीति पर चर्चा, तथा उपराष्ट्रपति चुनाव से संबंधित राजनीतिक विमर्श है.
चुनावी रणनीति और गठबंधन
भाजपा के शीर्ष नेताओं से बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सीटों का बंटवारा, गठबंधन की नीति, और संगठन को मजबूत बनाने पर बैठक मुख्य मुद्दा है. एनडीए के तहत मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार के चेहरे को तय करने की औपचारिक घोषणा और गठबंधन में एकजुटता दिखाना भी एजेंडे में शामिल है.
उपराष्ट्रपति चुनाव व अन्य राष्ट्रीय मुद्दे
नौ सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव पर भाजपा-जदयू और एनडीए नेताओं के साथ विचार-विमर्श करना भी दौरे का उद्देश्य है. सीपी राधाकृष्णन एनडीए के उम्मीदवार हैं, जिनसे मुलाकात संभव है.
अन्य योजनाओं और प्रशासनिक समीक्षा
केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन व राज्य की विकास परियोजनाओं पर फीडबैक बैठक भी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है. नीतीश कुमार का दिल्ली दौरा राजनीति, गठबंधन और आगामी चुनावों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक एजेंडे पर केंद्रित है.
बिहार में चुनावी सीटों के बंटवारे को लेकर हाल की चर्चाएँ
बिहार में चुनावी सीटों के बंटवारे को लेकर हाल में एनडीए (BJP-जदयू-लोजपा) में लंबी चर्चाएँ हुई हैं और अब फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है.
एनडीए (BJP-जदयू-लोजपा) में सीटों का बंटवारा
भाजपा और जदयू दोनों 243 में से करीब 100–105 सीटों पर चुनाव लड़ने की सहमति पर हैं. जदयू 100 से कम सीटों पर नहीं मानेगी, क्योंकि चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. एलजेपी (रामविलास) के चिराग पासवान 40 सीटें मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें शायद 20 के करीब सीटें मिल सकती हैं. जीतन राम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के खाते में 6–7 सीटें जा सकती हैं.
विपक्षी महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-वीआईपी)
महागठबंधन में भी सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान चल रही है; सभी दल अपनी-अपनी पसंदीदा सीटों की सूची साझा कर चुके हैं. वीआईपी के मुकेश सहनी ने हाल में कहा है कि उनकी पार्टी 60 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
खास बातें
बंटवारे का अंतिम निर्णय एनडीए के उच्च नेताओं की बैठकों के बाद होगा और चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद ही सार्वजनिक किया जाएगा. पिछले चुनाव में जदयू ने 115, भाजपा ने 110, वीआईपी ने 11 और हम ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा था; एलजेपी अकेले लड़ी थी.
एनडीए और महागठबंधन दोनों में सीट बंटवारे को लेकर रणनीतिक चर्चा जारी है, जिसमें भाजपा और जदयू बराबर सीटों पर आम सहमति के करीब हैं, जबकि सहयोगी दलों को उनकी मांग के मुताबिक पूरी सीटें नहीं मिलेंगी.







