केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कांग्रेस और राहुल गांधी पर देश को कमजोर करने आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “राहुल गांधी बहुत खतरनाक रास्ते पर जा रहे हैं. जॉर्ज सोरोस का कहना है कि भारत सरकार को अस्थिर करने के लिए एक ट्रिलियन डॉलर रखे गए हैं. कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और कई वामपंथी संगठनों में बैठी भारत-विरोधी खालिस्तानी ताकतें देश के खिलाफ काम करने की साजिश रच रही हैं. राहुल गांधी और कांग्रेस उनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं और देश को कमजोर कर रहे हैं. यह बेहद चिंताजनक है. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कोई भी देश को अस्थिर नहीं कर सकता.”
किरेन रिजिजू यहीं नहीं रुके. उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं पर कांग्रेस के हमले को लेकर भी पार्टी को घेरा. उन्होंने कहा, “जब कांग्रेस चुनाव नहीं जीत पाती, तो वो और भारत विरोधी ताकतें मिलकर सरकार और संस्थाओं पर हमले शुरू कर देती हैं… ताकि जनता का इस देश की संस्थाओं से विश्वास उठ जाए… वो बार-बार कहते रहे हैं कि न्यायपालिका और चुनाव आयोग बिक चुके हैं, उन्हें कमज़ोर करने के लिए… जब वो देश और सरकार की विश्वसनीयता कमज़ोर करने की साज़िश करते हैं, तो उसका नतीजा आंदोलन के रूप में निकलता है… वो वामपंथी मानसिकता से काम कर रहे हैं…राहुल गांधी से पहले कई कांग्रेस नेता थे, लेकिन देश को कमज़ोर करने का काम उन्होंने नहीं किया…”
संसद सत्र को सही से नहीं चलने देने के लिए भी किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी और विपक्ष को आड़े हाथ लिया. उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक इंटरव्यू में कहा, “मेरा गला भी बैठ गया देखो. विपक्ष को चिल्ला चिल्ला कर मैं विरोध करता हूं कि बहस होने दीजिए… अगर संसद नहीं चलेगी, तो नुकसान विपक्ष का होगा. सरकार राष्ट्रहित में विधेयक पारित करेगी. लेकिन अगर विधेयक बिना चर्चा के पारित हो जाते हैं, तो यह ठीक नहीं है. हम चर्चा में विश्वास करते हैं… नुकसान उनका है जिन्हें सवाल पूछने हैं.”
उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी से हाथ जोड़कर निवेदन है कि वे चर्चा में शामिल हों. कांग्रेस में कई ऐसे सदस्य हैं जो अच्छा बोल सकते हैं और ज्ञानी भी हैं. अगर मैं किसी का नाम लूंगा तो उन्हें दिक्कत होगी… अगर राहुल गांधी बोल नहीं सकते या उन्हें बोलना नहीं आता, तो इसका मतलब ये नहीं कि दूसरों को भी बोलने न दिया जाए. कई लोग हैं ना… जो बोल सकते हैं… उन्हें बोलने दो.”







