6 दिन का सफर तय कर महागठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा 22 अगस्त को भागलपुर पहुंच गई। राहुल गांधी और तेजस्वी अब तक 8 जिले और 18 सीटें कवर कर चुके हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में इन 18 सीटों में से 12 सीटें महागठबंधन ने जीती थीं। मतलब साफ है कि यात्रा की शुरुआत उन्हीं सीटों से हुई, जहां महागठबंधन मजबूत है।
16 दिन में 1,300 किमी चलने वाली यह यात्रा 23 जिलों और 50 विधानसभाओं से गुजरेगी। आखिर ये रूट तय करने की इनसाइड स्टोरी क्या थी, रूट किसने तय किया, कांग्रेस के अलावा RJD का इसमें क्या रोल था और अब यात्रा की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा है,
सभी पार्टियों से रूट पर बात, एक महीने पहले प्लानिंग
यात्रा 17 अगस्त को रोहतास के सासाराम से शुरू हुई। इसकी प्लानिंग 1 महीने पहले शुरू हो गई थी। महागठबंधन की सभी पार्टियों के साथ रूट पर बात हुई। यात्रा की प्लानिंग पर बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावारू बताते हैं, ‘लगभग पांच-छह हफ्ते पहले यात्रा की प्लानिंग होने लगी थी। इसके बाद छोटे स्तर पर बातचीत शुरू हुई। यह सामूहिक फैसला था। सभी दलों के बड़े नेता इसमें शामिल थे।’
कांग्रेस में हमारे एक सोर्स बताते हैं, ‘राहुल की सिक्योरिटी की जिम्मेदारी संभालने वाले केबी बायजू के साथ AICC के नेशनल जॉइंट सेक्रेटरी सुशांत मिश्रा रूट की रेकी करने आए थे। 15 दिन तक रूट में आने वाली जगहों को समझा गया। इसके बाद दोनों ने मिलकर फाइनल रूट पर मुहर लगाई।
‘पुराने गढ़ में कांग्रेस को वापस मजबूत करने की प्लानिंग’ रूट प्लानिंग पर बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ बताते हैं, ‘राहुल पहले भी बिहार में यात्रा कर चुके हैं। इस बार रूट तय करते समय दो आधार रखे गए। पहला, पिछली यात्रा में जो जिले छूट गए थे, उन्हें शामिल किया जाए। दूसरा, जहां कभी कांग्रेस का स्ट्रॉन्ग होल्ड था, लेकिन धीरे-धीरे हम कमजोर होते गए, वहां फिर से जमीन मजबूत करने की जरूरत थी।’
राहुल ने कहा- SIR पर ही फोकस रहेगा
रूट के बारे में असित बताते हैं, ‘इसमें बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मिलकर काम किया। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, प्रभारी कृष्णा अल्लावारु के साथ बाकी नेताओं ने मीटिंग की।’
‘इसमें दिल्ली से आए सुझाव और बदलाव भी शामिल किए गए। राहुल ने खास तौर पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR पर फोकस करने के लिए कहा क्योंकि इसमें लोगों के नाम हटाने की साजिश हो रही है।’
RJD ने सिकंदरा, जमुई और CPI (ML) ने आरा सीट जुड़वाई
महागठबंधन की सहयोगी पार्टियों की भूमिका पर असित बताते हैं, ‘रूट पर तेजस्वी ने भी सुझाव दिए। उन्होंने सिकंदरा और जमुई को रूट में शामिल करने के लिए कहा। CPI (ML) के दीपांकर भट्टाचार्या ने आरा सीट जोड़ने का सुझाव दिया। VIP के मुकेश सहनी ने कहा कि जो भी रूट बनेगा, हम साथ रहेंगे। कोई दबाव नहीं था, सब सुझावों पर सहमति से काम हुआ।’
RJD प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी भी मानते हैं कि जहां महागठबंधन मजबूत है, राहुल और तेजस्वी वहां पहुंचना चाहते थे। साथ ही गरीबों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की आबादी जहां ज्यादा है, वहां महागठबंधन पहुंचना चाहता था। यात्रा का रूट बनाने में इसका ध्यान रखा गया। सासाराम से पटना तक 1300 किलोमीटर का रूट इसलिए चुना गया ताकि ज्यादा से ज्यादा जिले कवर हो सकें।‘
एक्सपर्ट बोले- यात्रा बिहार में कांग्रेस को जिंदा करने की कोशिश न्यूज हाट के मैनेजिंग एडिटर कन्हैया भेलारी वोटर अधिकार यात्रा को बिहार में कांग्रेस को फिर से जिंदा करने की कोशिश मानते हैं। वे कहते हैं कि इसका रूट कांग्रेस के मजबूत इलाकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
कन्हैया आगे बताते हैं, ‘रूट की ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस का स्ट्रॉन्ग होल्ड रहा है। सासाराम तो जानते ही हैं। उसके बाद औरंगाबाद और गया भी इनका ही एरिया था। ये उस स्ट्रॉन्ग होल्ड को बरकरार रखना चाहते हैं। वे कसर नहीं छोड़ना चाहते। इसीलिए उन्होंने वही जिले तय किए हैं।’
वे आगे कहते हैं, ‘बिहार में कांग्रेस बहुत कमजोर हो गई है। पार्टी के नेता इस स्थिति से बाहर आना चाहते हैं। ऐसा भी नहीं है कि 100% रूट कांग्रेस के लिहाज से बना है। यात्रा में सबका ध्यान रखा जा रहा है। RJD को कैसे इग्नोर किया जा सकता है।’
इस रूट से किसे क्या फायदा होगा?
इस सवाल के जवाब में कन्हैया कहते हैं, ‘इससे RJD को फायदा है। मुसलमानों के बीच कंफ्यूजन रहता है। वे अपना मैसेज दे रहे हैं कि हम लोग एक हैं। यात्रा के लिए कांग्रेस ने ही इनिशिएट किया, लेकिन हम भी साथ हैं।’
सिकंदरा और जमुई के लिए RJD के सुझाव पर कन्हैया मानते हैं कि इसमें मुस्लिम फैक्टर भी हो सकता है। वे कहते हैं, ‘जमुई और सिकंदरा सीट से RJD ही लड़ेगी। जमुई RJD इसलिए चाहती है क्योंकि समता पार्टी के कद्दावर नेता रहे दिग्विजय सिंह और नरेंद्र सिंह का गढ़ था। जमुई को तो नरेंद्र सिंह ने ही जिला बनवाया था। इसीलिए हो सकता है कि RJD इसे अपनी फायरिंग रेंज में रख रही होगी। साथ ही दोनों सीटों पर मुस्लिम बहुल वाला भी फैक्टर है।’
यात्रा सासाराम से ही क्यों शुरू की गई?
सासाराम से यात्रा शुरू करने पर कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा बताते हैं, ‘कांग्रेस का सासाराम से पुराना और गहरा रिश्ता है। इसीलिए सासाराम से यात्रा की शुरुआत की गई।’
वहीं कृष्णा अल्लावारू कहते हैं, ‘सासाराम बिहार में अहम और ऐतिहासिक जगह है। हम चाहते थे कि यात्रा की शुरुआत ऐसी जगह से हो जो इतिहास में महत्व रखती हो। सासाराम बाबू जगजीवन राम की कर्मभूमि रही है। इन वजहों से हमने सासाराम को चुना।’
प्लानिंग में कौन से चेहरे शामिल थे?
सोर्स बताते हैं, ‘यात्रा के कोऑर्डिनेशन का जिम्मा मनोज त्यागी और सुशांत मिश्रा को दिया गया। इसके अलावा अलका लांबा, राहुल के पीए अलंकार सवाई, मीडिया इंचार्ज पवन खेड़ा और जयराम रमेश भी इसमें शामिल रहे। बिहार कांग्रेस से प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के पास राज्य के नेताओं के साथ कोऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी थी। बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावारू भी प्लानिंग में शामिल थे।
गठबंधन के दलों के नेता सीधे प्लानिंग का हिस्सा बने। इनमें RJD से संजय यादव, VIP से मुकेश सहनी, CPI (ML) से दीपांकर भट्टाचार्या शामिल रहे।
कांग्रेस और महागठबंधन के दलों में कैसे कोऑर्डिनेशन हुआ?
ये सवाल हमने कृष्णा अल्लावारू से पूछा। उन्होंने जवाब दिया, ‘यात्रा का फैसला गठबंधन के नेताओं के साथ मिलकर लिया गया। स्टेट और जिला स्तर पर कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाई गईं। यही आपस में बात करके फैसला लेती हैं। अगर कहीं तालमेल में कमी रहती है, तो उसे सुधारकर आगे बढ़ते हैं।’
हर जिले के लिए अलग कोऑर्डिनेटर
रूट और दिन फाइनल होने के बाद महागठबंधन ने हर जिले में प्रभारी बनाए। उनके पास अपने-अपने जिलों में हर तरह के कोऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी थी। 25 जिलों के लिए 28 लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई। इनमें कांग्रेस के अलावा बाकी पार्टियों के नेता और विधायक भी शामिल हैं।
ये कोऑर्डिनेटर जिला इकाइयों के संपर्क में रहते हैं। जिला इकाइयों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे सड़क पर झंडा-बैनर लगाएं और इसमें महागठबंधन के दलों का ध्यान रखें। महागठबंधन के अंदर कोई मतभेद बैनर-पोस्टर पर दिखाने से बचे।
राहुल और तेजस्वी को आम लोगों से मिलवाने की जिम्मेदारी इन्हीं कोऑर्डिनेटर के पास है। SIR से प्रभावित लोगों को यही राहुल और तेजस्वी तक ला रहे हैं। राहुल और महागठबंधन के नेता हर दिन एक जनसभा कर रहे हैं। इसमें भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी भी कोऑर्डिनेटर्स की है।
यात्रा में ज्यादा दिन न लगें इसलिए गाड़ी से निकले राहुल-तेजस्वी भारत जोड़ो यात्रा और न्याय यात्रा में राहुल गांधी पैदल चले थे। इस बार वे गाड़ी से ही चल रहे हैं। इसकी वजह वक्त की कमी है। कांग्रेस में एक नेता नाम न देने की शर्त पर बताते हैं, ‘चुनाव करीब हैं, इसीलिए महागठबंधन के नेता यात्रा को ज्यादा दिनों तक नहीं खींचना चाहते थे।’
‘राहुल और तेजस्वी भी तैयार थे कि 16 दिन में ज्यादा से ज्यादा विधानसभाओं तक पहुंचना जरूरी है। इसीलिए गाड़ी से यात्रा करना ठीक है। हालांकि तय हुआ कि बीच-बीच में लोगों से मिलने राहुल-तेजस्वी उनके गांव जरूर जाएंगे।’
राहुल के करीब जाने की इजाजत नहीं, कड़े सुरक्षा इंतजाम राहुल की सुरक्षा के लिहाज सभी को उनके पास जाने या मिलने की इजाजत नहीं है। इसके लिए उनकी सुरक्षा में लगी NSG को पहले जानकारी देनी होती है। पूरी जांच के बाद ही कोई राहुल से मिल सकता है। राहुल जहां जा रहे हैं, वहां पहले से NSG और बिहार पुलिस सुरक्षा के इंतजाम कर रही है।
रुकना, खाना और बाकी खर्च पार्टी फंड से राहुल के साथ इस बार भारत जोड़ो यात्रा की तरह बहुत बड़ी टीम नहीं चल रही है। करीब 30 से 35 लोग साथ रहते हैं। दोपहर में रुकने और खाने के लिए पहले से तय जगहों पर टेंट लगाकर इंतजाम किए गए हैं। यहां सिर्फ सिक्योरिटी पास के साथ ही लोगों को एंट्री मिलती है। राहुल और तेजस्वी के चैंबर तक किसी को एंट्री नहीं है।
रात रुकने के लिए भी पहले से जगह तय की गई हैं। यहां राहुल के साथ टीम के करीबी लोग ही रुकते हैं। महिला कार्यकर्ताओं के लिए अलग से होटल बुक किए गए हैं। यात्रा का पूरा खर्च पार्टी फंड से उठाया जा रहा है।
वोटर अधिकार यात्रा के बाद क्या प्लानिंग 1 सितंबर को वोटर अधिकार यात्रा खत्म हो जाएगी। इसके बाद की प्लानिंग पर पवन खेड़ा बताते हैं कि कांग्रेस लगातार लोगों से मुखातिब होती रहेगी। लोगों को बताते रहेंगे कि अगला कदम क्या होगा। राहुल जी लगातार आएंगे। चुनावी मोड में रैलियां शुरू होंगी। चुनाव के दौरान भी आएंगे और जीतने के बाद तो आएंगे ही। बातचीत होती रहेगी। हम बिहार के लिए काम करते रहेंगे।
वहीं अल्लावारू कहते हैं कि गठबंधन की कोऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष तेजस्वी यादव हैं। उनके साथ मिलकर फैसले लिए जाएंगे। बिहार में एक्टिविटी लगातार जारी रहेगी।
दीपांकर बोले- बहुमत चाहिए तो सहयोगी पार्टियां ज्यादा सीटों पर लड़ें यात्रा में शामिल महागठबंधन के दलों के बीच सीट शेयरिंग का कोई फॉर्मूला बना या नहीं। इस पर दीपांकर भट्टाचार्या कहते हैं कि लोग महसूस कर रहे हैं कि इस बार इंडिया ब्लॉक को बहुमत चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि CPI-(ML) और बाकी पार्टियां ज्यादा सीटों पर और ज्यादा जिलों में चुनाव लड़ें। मुझे यकीन है कि हम सब मिलकर सही फैसला लेंगे।
2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने कुल 243 सीटों में से 110 सीटें जीती थीं। कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटें जीतीं, जो महागठबंधन के भीतर सबसे कम स्ट्राइक रेट (27.14%) था।
लोकसभा चुनाव की बात करें तो 2019 में महागठबंधन ने सिर्फ एक सीट जीती थी। ये एक सीट भी कांग्रेस को मिली थी। 2024 में गठबंधन की सीटें बढ़कर 9 हो गईं। RJD ने 23 सीटों पर चुनाव लड़ा और 4 सीटें जीतीं। कांग्रेस ने 33.3% के स्ट्राइक रेट से 9 में से 3 सीटें जीतीं। हालांकि NDA ने 30 सीटें जीतकर बिहार में अपना दबदबा बनाए रखा।







