चीनी विदेश मंत्री वांग यी भारत के दौरे पर हैं। उनके इस दौरे को कई मायनों में बेहद खास माना जा रहा है। मौजूदा समय में उनकी इस यात्रा को दोनों देशों के बीच मजबूत होते कूटनीतिक रिश्तों के तौर पर देखा जा रहा है। भारत यात्रा पर वांग यी की विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के साथ विशेष मीटिंग है। वांग यी भारत के दौरे से लौटने के बाद पाकिस्तान के दौरे पर भी जाने वाले हैं। उनके इस दौरे पर भी बारीकी से ध्यान रखा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के टौरिफ बम के बाद भी चीन के साथ संभलकर रिश्ते आगे बढ़ाने की जरूरत है।
पाकिस्तान के साथ चीन का दोस्ताना रिश्ता कोई नई बात नहीं है। कर्ज, हथियारों की खरीद और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश जैसी कई चीजें दोनों देशों को नजदीक लेकर आती हैं। वांग यी के भारत दौरे से स्पष्ट संदेश मिलता है कि चीन चीन पाकिस्तान के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि करने के बाद भारत के साथ अपने संबंधों में आई दरार को संतुलित करना चाहता है। वहीं, पाकिस्तान के लिए चीनी विदेश मंत्री की यह यात्रा बढ़ती घरेलू अराजकता, आर्थिक पतन और विदेशी बेलआउट पर बढ़ती निर्भरता के बीच अपनी प्रासंगिकता साबित करने का एक मौका है। बढ़ती मुद्रास्फीति और आंतरिक संकटों के दबाव में, शहबाज शरीफ सरकार को चीन के राजनीतिक संरक्षण और आर्थिक मदद की सख्त जरूरत है।
रणनीतिक बातचीत से आश्चर्य नहीं
दोनों पक्षों के बीच ‘रणनीतिक वार्ता’ से कोई आश्चर्य की उम्मीद नहीं है, लेकिन इसका एजेंडा ही भारत के लिए चिंताएं पैदा करता है। पाकिस्तान सीपीईसी के तहत और ज्यादा चीनी निवेश पर जोर देगा, जिसका भारत लगातार विरोध करता रहा है। बता दें कि सीपेक की के प्रमुख पोजेक्ट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरते हैं। सीपीईसी का विस्तार या नए चीनी कर्ज हासिल करने से पाकिस्तान को पश्चिमी देशों के विकल्प के रूप में चीन को पेश करने का मौका मिलता है, भले ही वास्तव में इससे पाकिस्तान का कर्ज का जाल और गहरा हो जाए।
सैन्य नेतृत्व के साथ भी बैठकें
भारत के लिए अलर्ट होने वाली बात इसलिए भी है, क्योंकि चीनी विदेश मंत्री वांग यी के पाकिस्तान दौरे में सैन्य बैठकें भी शामिल हैं, जिनमें पाकिस्तानी सेना नेतृत्व के साथ भी बैठकें होनी हैं। ये बात किसी से भी छिपी नहीं है कि पाकिस्तान में सत्ता की असली चाभी सेना के पास ही है। इसका मतलब साफ है कि सीमा पर तनाव कम करने के बारे में चीन ने भारत को जो भी आश्वासन दिया है, उसे चीन-पाकिस्तान का खुफिया तालमेल कभी भी कमजोर कर सकता है।
अमेरिका से संबंध सुधार रहा पाकिस्तान
यहां खास बात यह भी है कि वांग यी की पाकिस्तान यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब ग्लोबल पॉलिटिक्स तेजी से बदल रही है। हाल के महीनों में मई में भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव हुआ था, जून में ईरान-इजराइल संघर्ष छिड़ गया। इस बीच पाकिस्तान अपने संबंध अमेरिका के साथ सुधारने की कोशिशों में लगा हुआ है।







