एनडीए के साथी दलों के बीच सीट शेयरिंग का मसला अंततः सुलझा लिया गया। यह दीगर कि काफी माथापच्ची करने के बाद एनडीए के रणनीतिकार घुमफिर कर वहां पहुंचे, जहां से सफर शुरू हुई थी। आखिर क्यों लौटना पड़ा वर्ष 2020 के सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर। राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह है कि लोजपा (आर) के बदलते रंग से जदयू के रणनीतिकार काफी परेशान हो गए। अभी 30 से 40 विधासनसभा सीटों की हिस्सेदारी की आवाज को बुलंद करते। तो कभी 243सीटों पर लड़ने की बात कह कर लोजपा(आर) के अध्यक्ष चिराग पासवान एनडीए के भीतर भ्रम फैला रहे थे।
चिराग की स्थिति
उसके अलावा हाल फिलहाल में तो चिराग पासवान ने यह कह डाला कि मेरा तो गठबंधन भाजपा से है, जदयू से नहीं। और अगर लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बिगड़ेगी तो मैं अपने सरकार के विरुद्ध टिप्पणी भी करूंगा। दरअसल, दूध का जला मट्ठा भी फूंक- फूंक पर पीता है। वर्ष 2020 में चिराग के इस तेवर ने खास कर जदयू को बहुत नुकसान पहुंचाया। एक नंबर की पार्टी तीन नंबर पर आ पहुंची। सो, लोजपा (आर) के प्रति जेडीयू के नेताओं का विश्वास डोलने लगा है।
निरंतर बढ़ता दबाव
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का एनडीए में शामिल होने के बाद सीटों की हिस्सेदारी में एक दल का बढ़ जाना भी सीट शेयरिंग के समीकरण को उलझा रहा था। उपेंद्र कुशवाहा 10 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बनाया है। गत विधानसभा चुनाव में उनके एक सदस्य भी नहीं थे। नतीजतन संख्या से भी ज्यादा परेशान कर रहा है कि वे कौन सी सीटें हैं जिस पर वो चुनाव लड़ना चाहते हैं।
वीआईपी का इंतजार
सीट शेयरिंग का मसला इसलिए भी लटका हुआ है कि भाजपा को भरोसा है कि वीआईपी शीघ्र ही एनडीए का सदस्य होगा। इसलिए वेट एंड वॉच की स्थिति में भाजपा के रणनीतिकार अभी तक बने हुए हैं। निषाद के वोट से बीजेपी नॉर्थ बिहार में जीत का सपना देख रही है। पर कुछ पेंच है जो अभी भी फंसा हुआ है। एनडीए के सूत्रों की मानें तो दबाव की राजनीति से मुक्त जदयू के रणनीतिकार वर्ष, 2020 विधानसभा चुनाव के सीट शेयरिंग फॉर्मूला पर अपनी सहमति जता दी है। जहां यह तय हुआ कि जदयू हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा की जिम्मेवारी संभालेगी और भाजपा राष्ट्रीय लोक मोर्चा और लोजपा (आर) की। वर्ष 2020 के चुनाव की तरह ही जदयू 243 सीटों में आधा सीट खुद और आधा सीट भाजपा को देना चाहती है। इस पर सहमति भी बन गई है। पर इस रास्ते का एक पेंच यह है कि भाजपा को वीआईपी का एनडीए में आने का इंतजार है।अगर यह संभव हुआ तो जदयू 10 से 15 सीट भाजपा के खाते में डाल देगी।







