पटना हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव को नाबालिग से रेप मामले में गुरुवार को बरी कर दिया। जस्टिस मोहित कुमार शाह और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ ने गुरुवार को राजबल्लभ यादव, सुलेखा देवी, राधा देवी, संदीप सुमन, टूसी देवी और छोटी देवी की अपील पर अपना फैसला सुनाया।’
पीड़िता के पिता ने कहा कि, ‘नीतीश कुमार की सरकार ने मेरा साथ दिया था, तभी मैं इतने दिनों तक राजबल्लभ यादव के खिलाफ केस लड़ पा रहा था। अब अगर राज्य सरकार ही राजबल्लभ यादव और अन्य आरोपियों को बरी करना चाहती है, तो मैं क्या कर सकता हूं। उन्होंने कहा कि मेरे पास न तो पैसा है, न ही इतना सामर्थ्य है कि मैं दोबारा हाई कोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट जाऊं। इतनी मेरी औकात ही नहीं है।’
‘चुनावी फायदे के लिए राजबल्लभ यादव को बरी कराया है’
पीड़ित परिवार ने कहा कि ‘सरकार ने अपने फायदे के लिए राजबल्लभ यादव को बरी करवाया है। आने वाले दिनों में राज्य में चुनाव होना है, इसलिए ये सबकुछ कराया गया है। जब से ये पूरा मामला शुरू हुआ है, तब से मुझे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।’
नाबालिग के पिता ने बताया कि ‘अब कोई हम लोगों का हाल भी नहीं देखने आता है कि हम लोग किस तरह से रह रहे हैं, किन परेशानियों का सामना कर रहे हैं। घटना के दौरान कहा गया था कि पीड़िता के बालिग होने पर उसे नौकरी दी जाएगी, लेकिन नौकरी भी नहीं मिली, जो भी आश्वासन दिया गया था, वो आश्वासन बनकर ही रह गया।’
‘सरकार के नुमाइंदों की ओर से पीड़िता को पढ़ाने-लिखाने और नौकरी दिलाने तक की बात कही गई थी। लेकिन सारी बातें कोरी साबित हुई।’ पीड़िता के पिता ने कहा कि ‘सरकार से हमारी मांग है कि नामजद आरोपियों को सजा होनी चाहिए, वे पूरी तरह से दोषी है।’
‘बेटी काम्पिटिशन की तैयारी करती है, घर पर ही रहती है’
पीड़िता के पिता ने बताया कि, ‘घटना के बाद से मेरी बेटी घर से बाहर नहीं निकलती है। वो घर पर ही रहकर काम्पिटिशन की तैयारी कर रही है।’ उन्होंने कहा कि ‘राजबल्लभ यादव को बरी किए जाने के बाद अब हम लोग कहां जाएं, कौन हमारी मदद करेगा, किससे मदद मांगे, ये समझ नहीं आ रहा है।’
नाबालिग के साथ घर पर रेप का आरोप
मामला 6 फरवरी 2016 का है। नालंदा जिले के रहुई थाना क्षेत्र की रहने वाली 15 साल की लड़की बिहारशरीफ नगर इलाके में किराये के घर में रहकर पढ़ाई करती थी। उस दिन सुलेखा और उसकी मां उसके कमरे पर गईं थी। दोनों ने लड़की से बर्थडे पार्टी में चलने को कहा।
लड़की ने भी हामी भर दी। लड़की को लेकर सुलेखा और उसकी मां नवादा के विधायक राजबल्लभ के मकान पर पहुंची। वहां राजवल्लभ ने लड़की के साथ रेप किया।
7 फरवरी को सुलेखा ने लड़की को उसके घर बिहारशरीफ छोड़ा। उसे 30 हजार रुपए दिए और मुंह बंद करने की धमकी दी, लेकिन लड़की चुप नहीं रही। 9 फरवरी को उसने बिहारशरीफ के एक थाने में FIR दर्ज करा दी।
लड़की ने फोटो देखकर राजबल्लभ को पहचाना था
10 फरवरी को पुलिस लड़की को लेकर नवादा स्थित राजबल्लभ के घर पहुंची। इसके बाद बच्ची को राजबल्लभ की फोटो दिखाई। लड़की ने फोटो देखकर राजबल्लभ को पहचान लिया।
शिनाख्त के बाद डीआईजी ने राजबल्लभ को गिरफ्तारी के आदेश दिए। अगले दिन फोरेंसिक टीम नवादा वाले घर पहुंची और जांच की। 15 फरवरी को राजद ने राजबल्लभ को पार्टी से हटा दिया। इसी दिन पुलिस ने सुलेखा के पति अरुण को गिरफ्तार किय।
15 फरवरी को कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए विधायक राजबल्लभ प्रसाद के खिलाफ सर्च वारंट जारी किया। 19 फरवरी को सुलेखा के दामाद संदीप को गिरफ्तार किया गया।
25 फरवरी को सुलेखा समेत 4 लोग पकड़ लिए गए। 28 फरवरी को राजबल्लभ के पटना और नवादा के घर को सील किया गया। राजबल्लभ अब भी फरार थे। 23 दिन तक फरार रहने के बाद 10 मार्च को उन्होंने कोर्ट में सरेंडर किया था।
सिविल कोर्ट के क्रिमिनल लॉयर बोले- कोर्ट का फैसला स्वागतयोग्य है
बिहार शरीफ सिविल कोर्ट के क्रिमिनल लॉयर सत्येंद्र कुमार बताते हैं कि ‘पटना हाईकोर्ट का जो फैसला है, वह स्वागत योग्य है। ट्रायल के समय से ही मैं इस केस को देख रहा था। जितने भी गवाह थे, चाहे वह घटनास्थल के संबंध में हो, चाहे कोई और। घटना के दो दिन बाद प्राथमिकी दर्ज हुई थी। बहुत सारे सस्पेंस इस केस में जुड़े हुए थे। हाई कोर्ट में राज्य सरकार का किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं हो सकता है। यह हाई कोर्ट का अपना निर्णय है।’







