बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति के तहत आगे बढ़ रही हैं। इस बीच, कांग्रेस टिकट के दावेदारों को परखने में जुट गई है। बिहार कांग्रेस प्रदेश कार्यालय सदाकत आश्रम में बुधवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की ओर से गठित स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई। उस बैठक में स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष बिहार के 19 जिलों के लगभग 1500 टिकट दावेदारों ने अपनी दावेदारी प्रस्तुत की। स्क्रीनिंग कमिटी की बैठक में अध्यक्ष अजय माकन, राज्यसभा सदस्य इमरान प्रतापगढ़ी, सांसद परिणीति शिंदे एवं कुणाल चौधरी के समक्ष बिहार प्रदेश के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से आए टिकट के प्रबल दावेदारों ने अपने लिए टिकट की दावेदारी प्रस्तुत की। इस दौरान ऑनलाइन टिकट की दावेदारी प्रस्तुत कर चुके टिकट अभ्यर्थियों ने आज पार्टी कार्यालय में भी स्क्रीनिंग कमिटी के समक्ष उपस्थित होकर ऑफलाइन तरीके से टिकट पर अपना दावा जताया।
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‘वोट अधिकार यात्रा’ को पप्पू यादव का समर्थन, बोले- गरीबों और संविधान की रक्षा के लिए लड़ाई जरूरी
बिहार: 1500 से अधिक टिकट दावेदारों ने कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष दावेदारी पेश की
राहुल-तेजस्वी ने 15 से अधिक प्रेस कांफ्रेंस कर फैलाया भ्रम: ऋतुराज सिन्हा
बीजेपी के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने बयान दिया है कि SIR के मुद्दों पर 45 दिनों में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने 15 से अधिक प्रेस कांफ्रेंस की हैं. उन्होंने हर बार झूठ, भ्रम और भय फैलाने के टूल किट का इस्तेमाल किया है. पहला झूठ तेजस्वी ने कहा कि SIR पहली बार बिहार में हो रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि पहले भी कई बार SIR हो चुका है. दूसरा झूठ तेजस्वी ने बोला कि SIR 4 महीने में कैसे हो सकता है, जबकि 2003 में 1 महीने में SIR हुआ था. तीसरा झूठ उन्होंने कहा कि SIR करा कर नागरिकता छीनने की तैयारी है, जबकि सच्चाई यह है कि वोटर कार्ड से नागरिकता का कोई लेना-देना नहीं है. चुनाव आयोग और न्यायालय ने भी यह स्पष्ट किया है.
राहुल गांधी के आरोप पर चुनाव आयोग ने दिया जवाब
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के “वोट चोरी” के आरोप पर निर्वाचन आयोग ने कड़ा बयान जारी किया है. आयोग ने कहा कि “वन पर्सन, वन वोट” का कानून भारत में पहले आम चुनाव 1951-52 से ही लागू है और इसका सख्ती से पालन होता है. चुनाव आयोग ने चुनौती दी कि अगर किसी के पास यह सबूत है कि किसी व्यक्ति ने किसी चुनाव में दो बार वोट डाला है, तो वह शपथपत्र के साथ लिखित रूप में आयोग को सौंपे. बिना प्रमाण के भारत के सभी मतदाताओं को “चोर” कहना गलत है. आयोग ने यह भी कहा कि “वोट चोरी” जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर झूठा नैरेटिव बनाने की कोशिश न केवल करोड़ों मतदाताओं का अपमान है, बल्कि लाखों ईमानदार चुनाव कर्मियों की मेहनत और निष्ठा पर भी सवाल उठाने जैसा है.
राहुल और ‘इंडिया’ गठबंधन बिहार में 17 अगस्त से निकालेंगे ‘वोटर अधिकार यात्रा’
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) के कई अन्य घटक दलों के नेता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तथा कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ 17 अगस्त से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू करेंगे.सासाराम से इस यात्रा की शुरुआत होगी और इसका समापन एक सितंबर को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में ‘वोटर अधिकार रैली’ के साथ होगा. इस जनसभा में ‘इंडिया’ गठबंधन के राष्ट्रीय स्तर के नेता शामिल हो सकते हैं. यात्रा में राहुल गांधी के साथ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव तथा बिहार में ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य प्रमुख घटक दलों के नेता भाग लेंगे.
SC ने कहा- बिहार में मतदाता सूची का पुनरीक्षण जरूरी, पहचान दस्तावेज़ बढ़ाना मतदाताओं के हित में
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि मतदाता सूची एक जैसी नहीं रह सकती, समय-समय पर इसका पुनरीक्षण जरूरी है. बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए पहचान के मान्य दस्तावेजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 11 करना मतदाताओं के लिए फायदेमंद है, न कि उन्हें बाहर करने वाला कदम. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग को जरूरत और समझ के हिसाब से यह प्रक्रिया चलाने का पूरा अधिकार है. कोर्ट ने उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि बिहार में SIR का कोई कानूनी आधार नहीं है और इसे रद्द किया जाना चाहिए. राजद, कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल और एनजीओ ‘एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
बीजेपी ने बिहार चुनाव के लिए बनाई आक्रामक रणनीति, दूसरे राज्यों के नेता भी मैदान में
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने बाकी दलों से पहले ही अपनी तैयारी तेज कर दी है. पार्टी ने इस बार खास रणनीति अपनाते हुए दूसरे राज्यों के नेताओं को भी बिहार चुनाव में जिम्मेदारी सौंपी है. सूत्रों के मुताबिक, यह पहली बार है जब विधानसभा चुनाव में दूसरे राज्यों के संगठन महामंत्रियों को अभी से ही मैदान में उतारा गया है. इन नेताओं को बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया जा सके और चुनावी माहौल बीजेपी के पक्ष में बनाया जा सके.







