मुंगेर में आई बाढ़ की वजह से हजारों लोग अपने घरों को छोड़ कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर हो गए हैं. ऐसे में जिला प्रशासन पीड़ित लोगों को राहत मुहैया कराने में लगा हुआ है. वहीं मुंगेर पुलिस भी बाढ़ पीड़ितों और उनके सामान की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. शरण लिए बाढ़ पीड़ितों की सुरक्षा पुलिस दल कर रहा है और साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में 5 नाव की मदद से पेट्रोलिंग की जा रही है. इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने भी गुरुवार सुबह हेलीकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया.

एसपी के आदेश पर कोतवाली, वासुदेवपुर, सफियासराय, नयारामनगर, बरियारपुर थाना की पुलिस सड़क किनारे शरण लिए स्थलों पर सघन गश्ती कर बाढ़ पीड़ित परिवारों की सुरक्षा में जुटी है. एसपी के आदेश पर बाढ़ ग्रसित थाना क्षेत्र में पुलिस के द्वारा सुबह से लेकर शाम तक विशेष गश्ती कर उनके सुरक्षा को पुख्ता किया जा रहा है.
पुलिस पदाधिकारियों द्वारा ऊंचे स्थानों पर शरण लिए बाढ़ प्रभावित परिवारों से सुरक्षा संबंधी जानकारी ली जा रही और उनसे उनकी परेशानियों को भी जाना जा रहा है. यहां तक कि रात में भी थाना क्षेत्रों के थानाध्यक्ष स्वयं बाढ़ पीड़ितों की समस्या से रूबरू हुए. एसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि बाढ़ से ग्रसित क्षेत्र में भी 5 नाव की सहायता से पेट्रोलिंग कराई जा रही है. नाव पेट्रोलिंग पर लगातार भ्रमणशील रह कर पुलिस बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की सुरक्षा में लगी है ताकि जिस क्षेत्र में पानी भर गया है, वहां के लोग पुरी तरह सुरक्षित रह सकें.
बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि जिला प्रशासन के साथ साथ पुलिस प्रशासन द्वारा भी उनको सुरक्षा प्रदान करने के साथ साथ उनकी समस्या को सुन समाधान भी पहुंचाया जा रहा है.
बाढ़ में डूबे घर, ट्यूब पर सोने को मजबूर, 16 पंचायत जलमग्न… लोग बोले-नहीं मिली सरकार से मदद
बिहार के कटिहार जिले के राज बघार पंचायत में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है. भीषण बाढ़ के चलते लोग छाती भर पानी में पैदल आने-जाने को मजबूर हैं. खाने-पीने, रहने, सोने और शौचालय, किसी भी तरह की व्यवस्था नहीं है. बेजुबान पशुओं के लिए भी खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं है. बाढ़ पीड़ित प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं.

पीड़ितों की सरकार से मदद की गुहार
गांव में आई भीषण बाढ़ के चलते कई लोग छाती भर पानी में पैदल आने-जाने को मजबूर हैं. खाने-पीने, रहने, सोने और शौचालय, किसी भी तरह की व्यवस्था नहीं है. बेजुबान पशु भी पानी में डूबे खड़े हैं. उनके लिए भी खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं है. बाढ़ पीड़ित प्रशासन और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं.

बघार पंचायत के 16 गांव जलमग्न
मुखिया पिंटू कुमार यादव ने सरकार से अपील की है कि तुरंत सामुदायिक किचन और सुखा राशन की व्यवस्था की जाए. मुखिया ने नाव और राहत सामग्री को नाकाफी बताते हुए स्थानीय प्रशासन को लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया है. राज बघार पंचायत का 16 में से 16 गांव पूरी तरह जलमग्न है. ना मवेशियों के लिए चारा है, ना लोगों के लिए खाना.
गंगा की बाढ़ से जिंदगी ठप
पीड़ित कहते हैं जब सरकार मदद नहीं कर रही, तो मुखिया भी क्या करेगा. गंगा की बाढ़ ने यहां जिंदगी ठप कर दी है. अब गांव वाले बस आस लगाए बैठे हैं कि राहत सामग्री, नाव और सरकारी मदद जल्द पहुंचे, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं. यह बाढ़ न केवल गांव की जमीन को, बल्कि लोगों की उम्मीदों को भी डुबो रही है.







