दिल्ली में सत्ता के केंद्र साउथ ब्लॉक में आज अचानक से तेज हलचल देखी गई. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे. यह बैठक ऐसे समय पर हुई है, जब भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ वॉर को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है.
दिलचस्प बात यह रही कि इसी दौरान अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू भी प्रधानमंत्री मोदी से मिलने पहुंचे. उनके दौरे को लेकर अटकलें तेज हैं कि यह मुलाकात अमेरिका से जुड़े किसी अहम संदेश या पहल का हिस्सा हो सकती है.
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक तनातनी, टैरिफ में संभावित बदलाव और द्विपक्षीय वार्ताओं की दिशा पर चर्चा हुई. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के बीच यह बातचीत आगामी कूटनीतिक कदमों की रूपरेखा तय करने के लिए थी.
भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद के बीच पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू चर्चा में आ गए हैं. मंगलवार को पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर की मीटिंग में तरनजीत सिंह संधू की मौजूदगी के अब मायने तलाशे जा रहे हैं. भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद को लेकर चल रही कूटनीतिक चर्चाओं के बीच इस उच्चस्तरीय बैठक ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है. इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू की मौजूदगी क्या इशारा कर रहा है? क्या भारत भी अब अमेरिका के नए टैरिफ नियमों को घेरने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है? यह बैठक भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्या मायने रखती है? आइए जानते हैं कौन हैं तरनजीत सिंह संधू और उनकी किस क्षेत्र में महारथ हासिल है?
तरनजीत सिंह संधू एक अनुभवी पूर्व राजनयिक हैं, जिन्होंने 2020 से 2024 तक अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया. 35 साल के कूटनीतिक करियर में उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई. खास तौर पर, 2013-2017 के बीच वाशिंगटन डीसी में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन के रूप में उन्होंने पीएम मोदी की 2014 की ऐतिहासिक अमेरिका यात्रा की नींव रखी और तत्कालीन राजदूत जयशंकर के साथ मिलकर कई कूटनीतिक चुनौतियों का समाधान किया. संधू ने श्रीलंका में भारत के हाई कमिश्नर और जर्मनी में कॉन्सुल जनरल के रूप में भी काम किया है. मार्च 2025 में वे द एशिया ग्रुप में सीनियर एडवाइजर के रूप में शामिल हुए, जहां वे भारत-अमेरिका व्यापार और रक्षा नीतियों पर सलाह दे रहे हैं. उनकी मौजूदगी इस बैठक में उनके अनुभव और अमेरिकी प्रशासन के साथ गहरे संपर्कों को दर्शाती है.
टैरिफ विवाद के बीच अहम बैठक
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागाया है. ट्रंप ने अप्रैल 2025 से भारत सहित कई देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ और 26% कस्टमाइज्ड रेसिप्रोकल टैरिफ लागू किया था, जिसे उन्होंने ‘लिबरेशन डे’ उपाय बताया. भारत, जिसका 2023 में अमेरिका के साथ 190 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार था, इस नीति से प्रभावित हो रहा है. भारत का व्यापार घाटा अमेरिका के पक्ष में 45 बिलियन डॉलर है और ट्रंप ने भारत के टैरिफ ढांचे पर नाराजगी जताई है. जवाब में, भारत ने बोरबॉन व्हिस्की, वाइन और इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैरिफ कम किए, ताकि ट्रंप प्रशासन को सकारात्मक संदेश दिया जाए. लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे नखाफी माना और भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद 25 प्रतिशत और टैरिफ रूस से तेल खरीदने के कारण लगा दिया.