अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत पर लगाया गया 25 फीसदी आयात शुल्क 7 अगस्त (अमेरिकी समयानुसार) से प्रभावी हो जाएगा। यानी भारत और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधियों के बीच पांच चरणों की बैठक के बावजूद ट्रंप प्रशासन भारत की तरफ से कई वर्गों में टैरिफ घटाने के प्रस्ताव को नहीं माना है। इसके बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस के साथ व्यापार का जिक्र करते हुए भारत पर 27 अगस्त से अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ भी लगाने का एलान किया है। यानी इस महीने के अंत तक भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर कुल टैरिफ 50 फीसदी तक पहुंच सकता है।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में शामिल रहे भारत और अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की है। इसके हवाले पर दावा किया गया है कि अमेरिका जैसे-जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों, जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया, जापान आदि से मनमुताबिक व्यापार समझौते की तरफ पहुंचने लगा, वैसे ही उसे भारत के साथ होने वाली बातचीत में अपने लिए ज्यादा मौके नजर आने लगे। आखिरकार यूरोपीय संघ से हुए व्यापार समझौते ने अमेरिका-भारत की बातचीत में ट्रंप प्रशासन को और ज्यादा शर्तें लगाने का मौका दे दिया। उधर भारतीय अधिकारी कुछ सेक्टर्स को भारत के लिए अहम बताते हुए अमेरिकी मांगों के आगे नहीं झुके।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पांचवें चरण की बातचीत के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका से 10 फीसदी आधारभूत टैरिफ को हटाने की मांग रख दी। इतना ही नहीं, ट्रंप की तरफ से स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो सेक्टर पर टैरिफ को भी वापस लेने पर बात की। हालांकि, जब जापान और यूरोपीय संघ ने बिना अमेरिका से इन सेक्टरों पर बात किए ही ज्यादा टैरिफ लगाने पर सहमति जता दी तो इसे ट्रंप की जीत के तौर पर देखा जाने लगा। इसके बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल को यह संकेत मिल गए कि अमेरिका इन टैरिफ को कम नहीं करेगा। इस दौरान भारत की तरफ से बाकी देशों की तरह ही 15 फीसदी टैरिफ दर पर ही समझौते की कोशिश भी की गई।
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के मुताबिक, अधिकतर देशों से मन मुताबिक डील मिलने के बाद ट्रंप हावी हो गए। वे ज्यादा बाजार तक पहुंच, ज्यादा निवेश और दूसरे देशों से कम से कम टैरिफ वाले समझौते करने पर जोर देने लगे, ताकि अमेरिका में इसे अपनी विजय के तौर पर पेश कर सकें। हालांकि, भारत की तरफ से इतनी छूट दिए जाने की तैयारी नहीं रही।
दूसरी तरफ इस साल मई में जब भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष छिड़ा तो ट्रंप प्रशासन ने इसे रुकवाने के लिए दोनों देशों से चर्चा की। हालांकि, ट्रंप ने एक कदम आगे निकलते हुए भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने का श्रेय लेना ही शुरू कर दिया। उन्होंने अलग-अलग मंचों पर संघर्ष को रुकवाने की बात कही। हालांकि, भारत ने हर मौके पर उनके इस दावे को खारिज किया। ट्रंप के लगातार किए जा रहे दावों ने दोनों देशों के समझौते को और लटकाया और आखिरकार भारत-अमेरिका व्यापार के मुद्दे पर इस मोड़ पर खड़े हैं।
अमेरिका की तरफ से भारत पर 7 अगस्त से टैरिफ प्रभावी हो जाएंगे। हालांकि, दोनों ही देश व्यापार समझौते को लेकर अगस्त मध्य में बातचीत करेंगे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस दौरान कुछ शर्तों के साथ भारत आएगा। बताया गया है कि भारत कृषि और डेयरी सेक्टर में कुछ छूट का एलान कर सकता है। वहीं, रूस से तेल खरीद को लेकर भारत अमेरिका से भी बराबर दरों पर ऊर्जा खरीद बढ़ाने पर बात कर सकता है।
अमेरिका के पूर्व व्यापार प्रतिनिधि मार्क लिंसकॉट के मुताबिक, एक समय पर दोनों देश व्यापार समझौते के काफी करीब थे। हालांकि, अब भी देर नहीं हुई है। दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष जल्द ही आपस में बात कर मुद्दा सुलझा सकते हैं।







