प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया पहुंचे हैं और मंगलवार उन्हें इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान ‘बिन्तांग आदिपूर्ण ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका के लिए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने यह पदक प्रदान किया।
इस दौरान इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आंतकवाद के मुद्दे पर दोनो देश साथ हैं. उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के दौरान इंडोनेशिया मजबूती से भारत के साथ खड़ा था.
पीएम मोदी ने कहा, ‘आतंकवाद जैसे मुद्दों पर हम हमेशा एक साथ खड़े रहे हैं. पिछले साल, जब भारत के पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ था, तो इंडोनेशिया मजबूती से भारत के साथ खड़ा रहा.’
पहलगाम हमले के दौरान भारत के साथ खड़े रहने पर पीएम मोदी ने इंडोनेशिया का आभार जताया. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश जॉइंट वर्किंग ग्रुप के जरिए काउंटर टेररिज्म पर मिलकर काम कर रहे हैं.
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने PAK को सुनाया था
इंडोनेशिया मुस्लिम बहुल देश है. वहां की 87 फीसदी आबादी मुस्लिम है. ऐसे में पहलगाम आतंकी हमले के दौरान इंडोनेशिया का मजबूती के साथ खड़ा होना भारत के लिए बहुत मायने रखता था.
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की थी. उन्होंने कहा था कि हमारे यहां का इस्लाम तो ऐसी तालीम नहीं देता. उन्होंने कहा था, ‘कश्मीर में जो आतंकी हमला हुआ है, वह इंडोनेशिया में माने जाने वाले इस्लाम के अनुरूप नहीं है.’
उन्होंने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया था कि सेना के प्रभाव वाली कोई भी व्यवस्था मनचाहे नतीजे नहीं देती. उन्होंने कहा था कि किसी भी तरह के आतंकवाद से कोई नतीजा नहीं निकलता.
हमले की निंदा करने वाले पहले देशों में से एक था
इंडोनेशिया उन देशों में से एक था, जिसने पहलगाम आतंकी हमले की सबसे पहले निंदा की थी. इंडोनेशिया ने पहलगाम आतंकी हमले को ‘जघन्य’ बताया था.
भारत में इंडोनेशिया की राजदूत इना हगनिनिंगत्यास कृष्णमूर्ति ने कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध किसी भी वजह से, कभी भी, कहीं भी और कोई भी करे तो वे जायज नहीं ठहराए जा सकते.
राजदूत ने कहा था, पीड़ितों के प्रति हमारी गहरी सवेदना और सहानुभूति है और हम सभी घायलों के जल्द ठीक होने की कामना करते हैं.
उनके अलावा, इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय ने इस हमले को ‘घिनौना आतंकवाद’ करार दिया था और मानवाधिकारों, शांति और सुरक्षा के सिद्धांतों का उल्लंघन करने के लिए इसकी निंदा की थी.
क्या था पहलगाम अटैक?
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर की पहलगाम घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी. आंतकियों ने 26 लोगों की हत्या कर डाली थी. गोली मारने से पहले आतंकियों ने पर्यटकों से उनका धर्म पूछा था.
इस हमले के कुछ दिन बाद 6-7 मई की रात को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान और PoK में बने 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था. भारतीय सेना ने हिज्बुल मुजाहिद्दीन, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों पर बमबारी की थी. भारतीय सेना के इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे. जैश सरगना मसूद अजहर के परिवार के कई लोग भी इसमें मारे गए थे.
भारतीय सेना के इस ऑपरेशन से बौखलाकर पाकिस्तानी सेना ने भारत पर हमला करने की कोशिश की थी. भारतीय सेना ने पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम कर दिया था. 4 दिन तक भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव चला. आखिरकार 10 मई को पाकिस्तान ने सीजफायर की अपील की और तब जाकर युद्धविराम हुआ.







