उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में आई तबाही के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी उत्तरकाशी पहुंचे हुए हैं. इस दौरान उन्होंने गांव के लोगों से बात की. साथ ही उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि डॉक्टरों की टीम बनाई गई है. बिजली की लाइनों को ठीक करने की कोशिश की जा रही है. साथ ही सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारे लिए एक-एक जान कीमती हैं. सीएम धामी ने धराली का हवाई सर्वे किया है. सीएम धामी ने कहा कि बिजली बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती का काम है.
बरेली-आगरा से उड़ाने भरेगा Mi-17 और ALH Mk-III
उत्तरकाशी-हर्षिल राहत बचाव ऑपरेशन को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है. घने कोहरे और बारिश के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उड़ान भरना मुश्किल हो गया है. मौसम में सुधार के बाद भारतीय वायुसेना का ऑपरेशन शुरू होगा. हर्षिल में अचानक आई बाढ़ के बाद भारतीय वायुसेना ने तुरंत अपनी तैयारी शुरू कर दी. बरेली में Mi 17 और ALH Mk-III, आगरा में An-32 और C-295 रात भर की तैयारी के बाद उड़ान भरने के लिए तैयार हैं. आगरा और बरेली स्टेशनों पर राहत और बचाव सामग्री लादने और बचाव अभियानों के लिए विमानों को तैयार करने के लिए चौबीसों घंटे काम किया जा रहा है.
बिना वक्त गंवाए पीड़ितों की हरसंभव मदद करने के निर्देश जारी किए, क्योंकि उत्तरकाशी के धराली गांव में पहाड़ पर बादल फटा और उसके बाद वहां से आए मलबे ने वहां सबकुछ तबाह कर दिया. बादल फटने के बाद लाखों टन मलबा बिजली की रफ़्तार से नीचे आया. किसी को संभलने का या कुछ समझ पाने का मौका ही नहीं मिला. देखते ही देखते गरजता हुआ सैलाब धराली बाज़ार में मौजूद होटल, दुकानों और लोगों के घरों को अपने साथ बहा ले गया.
गांव की तरफ़ मलबा आता देख वहां चीख़ पुकार मच गई, क्योंकि ऐसा लगा जैसे वहां कीचड़ और मलबे से लबालब कोई बांध फट पड़ा हो. सैलाब के रास्ते में जो कुछ आया वो तबाह हो गया. घबराहट में लोग बुरी तरह चीखते चिल्लाते दिखे. ‘अरे बह गया, ए मेरी मां, ए मेरी मां, छोटे मामा’.. और भी ना जानें क्या-क्या चीख पुकार की आवाजें वहां से आईं. अपनी आंखों के सामने तबाही देखकर लोगों का दिल दहल गया, क्योंकि पहाड़ से नीचे आया सैलाब जब वहां बने मकानों से टकराया तो रूह कंपा देने वाला मंज़र दिखाई दिया. अफ़रातफ़री के बीच एक मकान में मौजूद कुछ महिलाएं अपने रिश्तेदारों को अलर्ट करने के लिए चीख़ती चिल्लाती दिखीं. अरे फोन कर, अरे फोन कर ले, पागल फोन कर, अरे बाबा.. देखने वाले चिल्ला रहे थे. खीर गंगा नदी से होता हुआ पहाड़ी से आया सैलाब पलक झपकते ही भागीरथी नदी में जा मिला, लेकिन इस दौरान उसने वहां प्रलय मचा दिया.
गंगोत्री से पहले हर्षिल के पास.. धराली मार्किट होटल एरिया में.. अचानक पहाड़ी नाले में बेहद तेज बहाव की वजह से आसपास मौजूद घर, होटलों में बेहद नुकसान हुआ है. प्रशासन के मुताबिक अभी घायल, लापता लोगों के बारे में जानकारी नही हैं, जिस तरीके से तेज बहाव आया है, उससे लग रहा है बादल फटने से ये तबाही हुई है. फिलहाल एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आर्मी, लोकल प्रशासन रेस्क्यू ऑपरेशन में लगा है. बहाव इतना तेज था कि अभी कितने लोग फंसे होंगे, कितने लापता ये सब रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद साफ होगा.
उत्तराखंड के धराली गांव में नाला उफान पर है. धराली गांव में अब चारों तरफ बस तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं. बादल फटने से धराली गांव में कुदरत का ऐसा कहर बरपा कि पूरे देश में हाहाकार मच गया. पहाड़ी से खीरगंगा नदी के रास्ते नीचे आए मलबे ने गांव को दो हिस्सों में चीरकर रख दिया. गांव के ज़्यादातर मकान लाखों टन मलबे, या ये कहें कि मलबे के पहाड़ के नीचे दब गए हैं.
खीरगंगा नदी के ऊपर बादल फटने के बाद नदी में आए सैलाब और मलबे ने धराली गांव का मानो वजूद ही ख़त्म कर दिया. आसमान से बरसे कुदरत के इस क़हर को देखकर लोग सहम गए, क्योंकि खीरगंगा नदी में पहाड़ से आए बेहिसाब पानी और मलबे ने वहां कोहराम मचा दिया. धराली गांव में आई इस आपदा को देखकर आसपास रहने वाले लोग बुरी तरह कांप गए. पहाड़ी के ऊपर मौजूद लोगों ने क़ुदरत के इस कहर को अपने मोबाइल फ़ोन में क़द कर लिया, लेकिन इस दौरान धराली गांव में मची तबाही ने उन्हें अंदर तक हिला कर रख दिया. लोगों के मुताबिक़ धराली गांव में इससे पहले ऐसी आपदा कभी नहीं आई. लोगों ने आशंका जताई की इस भयानक आपदा में गांव में मौजूद कई लोगों की मौत हो गई, क्योंकि लोगों के मुताबिक़ पहाड़ से खीरगंगा नदी में सैलाब इतनी तेज़ी से उतरा की गांव में मौजूद लोगों को भागने तक का मौक़ा नहीं मिला. मतलब गांव में मौजूद लोग चाहकर भी वहां से भाग नहीं पाए. इसी वजह से आशंका जताई गई कि इस आपदा में बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे दब गए.
इस भयानक आपदा में कितने लोगों की मौत हुई, इसकी सही-सही जानकारी अभी तक सामने नहीं आ सकी है. लेकिन अंदाजा लगाया गया कि सैलाब और मलबे की चपेट में आने की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गईं. धराली गांव में मची तबाही को देखने के बाद लोग हिल गए. बहुत नुकसान हो गया. इतना कभी नहीं हुआ था. पता नहीं कितने लोग मर गए, कितने लोग दब गए? कई चश्मदीदों का कहना है कि बहुत लोग मर गए भाई, बहुत लोग मर गए. इतने लोग भाग नहीं पाए होंगे पता नहीं. कतई भी भाग नहीं पाए होंगे.
उत्तरकाशी के खीरगंगा नदी के किनारे बसे धराली गांव पर इस आफत के टूटने के बाद पूरा उत्तराखंड दहल गया. इस आपदा ने ना सिर्फ उत्तराखंड में बल्कि पूरे देश में कोहराम मच गया. दावा किया जा रहा है कि जिस वक्त बादल फटा उस वक्त गांव में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, लेकिन किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि कुछ मिनटों के अंदर उनकी ज़िंदगी तबाह हो जाएगी. वहां कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया, जिसे देखने के बाद लोग दहशत से भर गए. बादल फटने के बाद खीरगंगा नदी में आए सैलाब की चपेट में आकर धराली गांव में मौजूद ज्यादातर मकान और होटेल तिनके की तरह बह गए.
24 घंटे, 174 mm बारिश और खतरे की घंटी! उत्तराखंड में आसमान से अभी और आएगी तबाही, कहां अधिक संकट?
उत्तराखंड के उत्तरकाशी के धराली गांव में आई भारी तबाही के बाद भी खतरा टला नहीं है. रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और मलबे में दबे लोगों को निकालने की जद्दोजहद भी. वहां भारी तबाही हुई है. भारतीय सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तक राहत और बचाव अभियान में लगी हुई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी यहां दो दिन रूककर सभी कामों पर नजर रखे हुए हैं. उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच मौसम विभाग ने 6 अगस्त के लिए डिस्ट्रिक्ट लेवल नाउकास्ट बुलेटिन जारी किया है, जिसमें राज्य के कई जिलों में अति भारी वर्षा, बिजली गिरने, बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावना जताई गई है.
मौसम विभाग के मुताबिक, देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के कई जिलों में कई जगहों पर मध्यम से भारी वर्षा के साथ आकाशीय बिजली गिरने, तेज हवाएं चलने और तेज से अत्यंत तेज बारिश के दौर की संभावना है. इन क्षेत्रों को ‘रेड अलर्ट’ की श्रेणी में रखा गया है.
विशेषज्ञों के अनुसार, 24 घंटे में 174.0 मिमी बारिश होना एक अत्यधिक भारी वर्षा यानि Extremely Heavy Rainfall की श्रेणी में आता है और यह काफी गंभीर खतरे का संकेत होता है. खासकर अगर वह क्षेत्र पहाड़ी, नदी के किनारे या शहरी आबादी वाला हो. भारी वर्षा के कारण भूस्खलन और चट्टानों के गिरने से सड़कों व राजमार्गों पर यातायात बाधित हो सकता है. निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन सकती है. कच्चे और निर्माणाधीन भवनों को नुकसान पहुंच सकता है. नदियों और नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका है.







