चुनावी काल मे बिहार बीजेपी को बड़ा झटका लगा है । लगातार उपेक्षा की शिकार होती रही अर्चना रॉय भट्ट जो फिलहाल भारतीय जनता पार्टी की ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य के रूप में पिछले तीन वर्षों से इस पद पर अपने दायित्व का निर्वहन कर रही थी उन्होंने पद के साथ पार्टी को भी अलविदा कह दिया।
बिहार भाजपा के द्वारा लगातार उपेक्षा की शिकार होने वाली श्रीमती भट्ट ने बताया कि मेरी जाति के संख्या बल को अक्सर निशाना बनाया जाता रहा है । मैं भट्ट समाज से आती हुँ जो ओबीसी वर्ग में है । अक्सर इस समाज के लोगो को मुख्य धारा से काटे रखा गया सिर्फ इस कारण की बिहार में इस जाति की संख्या बल किसी को जिताने लायक नही है ।
बिहार भाजपा के द्वारा लगातार मेरी जाति के संख्या बल को अक्सर निशाना बनाया जाता रहा है । मैं भट्ट समाज से आती हुँ जो ओबीसी वर्ग में है । अक्सर इस समाज के लोगो को मुख्य धारा से काटे रखा गया, यहाँ तक कि संगठन के अंदर सामाजिक समीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत बिहार मे जितनी पिछड़ी जाति है उसकी बैठक की जाती है… हर समाज के प्रत्येक जिले से प्रत्येक मुख्य सामाजिक व्यक्ति को उस बैठक मे बुलाया जाता है… लेकिन मेरे बोलने के बावजूद हमारे भाट/ भट्ट समाज की बैठक नही बुलाई जाती है, ना ही हमारे समाज के लोगों के उत्थान के बारे मे सोचा जाता है. भाजपा अंत्योदय सिद्धांत पे कार्य करने का दम्भ भरती है जो बिहार के संगठन मे दूर दूर तक दिखता प्रतीत नही होता है. किसी जाति विशेष से इतनी नफ़रत, इतनी उपेक्षा समझ से परे है. जबकि अगर हम अपने सुजाति की जनसंख्या की बात करें तो पूरे बिहार मे 10 लाख से ज्यादा है कम नही.
दो दशक से पार्टी के लिए जी जान लगा कर रात दिन समर्पित भाव से जुड़ी रही , कई उतराव चढ़ाव देखी लेकिन पिछले कुछ वक्त से पार्टी के अंदर गुटबाजी और चाटुकारिता से घुटन महसूस हो रही थी ।
केन्द्रीय नेतृत्व के द्वारा अथक प्रयास के बावजूद स्थानीय इकाई के चाल चरित्र में कोई बदलाव नहीं आता देख आज पार्टी से नाता तोड़ना ही उचित प्रतीत हुआ ।
प्रधानमंत्री जी से 2015 में चंद पल में पिता के रूप में मिला स्नेह था जिसके कारण आज तक पार्टी के साथ हर उपेक्षा के बावजूद खड़ी रही । किंतु पिछले कुछ समय से अपनी परिस्थितियों को प्रस्तुत करने के लिए हर सम्भव प्रयास की किंतु पार्टी के बिहार इकाई के पास किसी के पास चंद पल का वक्त नही था की मेरी बातों को सुनें । बिहार इकाई के द्वारा महिलाओं के प्रति व्यवहार इतना निम्न स्तर का होगा यह अकल्पनीय है । ऐसे में संस्था के साथ जुड़े रहना खुद को प्रताड़ित करने से कम नही है । बहुत दुःखी मन से आज पार्टी से अलग होने का फैसला की जो मेरे लिए भी आसान नही है परंतु स्वाभिमान बचा रहे यही मेरे लिए बहुत है ।







