फिलीपींस के राष्ट्रपति रोमुआल्डेज मार्कोस जूनियर भारत के 5 दिन के दौरे पर हैं। उन्होंने मंगलवार को राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी की श्रद्धांजलि दी।
इससे पहले राष्ट्रपति भवन में उनका पीएम मोदी और राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने स्वागत किया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित भी किया गया।
2022 में पद संभालने के बाद राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर की यह भारत की पहली यात्रा है। वे सोमवार को भारत पहुंचे थे। उनके साथ फर्स्ट लेडी लुईस अरानेटा मार्कोस और मंत्रियों का हाई-लेवल डेलिगेशन भी भारत आया है।
राष्ट्रपति मार्कोस का यह दौरा भारत-फिलीपींस के बीच कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रहा है।
पीएम मोदी से हैदराबाद हाउस में बातचीत होगी
राष्ट्रपति मार्कोस और पीएम मोदी के बीच हैदराबाद हाऊस में बैठक होगी। इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय समझौतों पर साइन करेंगे। इसके बाद ज्वाइंट प्रेस स्टेटमेंट होगा।
राष्ट्रपति मार्को स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे बेंगलुरु के लिए रवाना होंगे। वहां वे कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात करेंगे।
फिलीपींस भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला अकेला देश

फिलीपींस भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला अकेला देश है। भारत ने पिछले साल अप्रैल में फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की पहली खेप भेजी थी।
दोनों देशों के बीच जनवरी 2022 में ब्रह्मोस मिसाइलों के लिए 375 मिलियन डॉलर्स में डील हुई थी। इन मिसाइलों की स्पीड 2.8 मैक और मारक क्षमता 290 किमी है। एक मैक ध्वनि की गति 332 मीटर प्रति सेकेंड होती है।
ब्रह्मोस के हर एक सिस्टम में दो मिसाइल लॉन्चर, एक रडार और एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर होता है। इसके जरिए सबमरीन, शिप, एयक्राफ्ट से दो ब्रह्मोस मिसाइलें 10 सेकेंड के अंदर दुश्मन पर दागी जा सकती है।
भारत और फिलीपींस की मित्रता से चीन जल रहा
फिलीपींस के साथ रिश्ते को नई उड़ान देकर भारत जो कहानी गढ़ रहा है, उससे चीन को मिर्ची लगी है. समंदर से लेकर दिल्ली तक में भारत और फिलीपींस की मित्रता से चीन जल रहा है. दरअसल, पहले जहां भारत और फिलीपींस ने विवादित दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में पहली बार संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया. तो वहीं आज यानी मंगलवार को फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर मार्कोस जूनियर की दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात है.राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर मार्कोस जूनियर 5 दिन के भारत दौरे पर आए हैं. फर्डिनेंड आर मार्कोस जूनियर का मंगलवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में रस्मी स्वागत किया गया. राष्ट्रपति भवन परिसर में आगमन पर प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मार्कोस जूनियर का स्वागत किया. भारत की अपनी पांच दिवसीय यात्रा के दौरान वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे.
दक्षिण सैन्य सागर में अभ्यास
मार्कोस के दौरे से पहले भारत और फिलीपींस ने विवादित दक्षिण चीन सागर में पहली बार संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया. ये दो दिन तक चला. सोमवार को इसका समापन हुआ. फिलीपींस के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रोमियो ब्राउनर ने कहा, रविवार से शुरू हुआ दो दिवसीय संयुक्त नौसैनिक अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. उन्होंने उम्मीद जताई कि फिलीपींस की सेनाएं भविष्य में भारत की सेना के साथ और अधिक संयुक्त युद्धाभ्यास में भाग ले सकेंगी.
यह पूछे जाने पर कि क्या चीनी सेना ने इसके जवाब में कोई कार्रवाई की, जनरल ब्राउनर ने कहा, हमारे साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन फिर भी हम पर नजर रखी गई. हमें इसकी पहले से ही उम्मीद थी. फिलीपींस की सेना ने बताया कि रविवार को संयुक्त नौसैनिक युद्ध अभ्यास में भाग लेने वाले दो फिलीपींस नौसेना फ्रिगेट में से एक के जरिए लगभग 25 समुद्री मील की दूरी पर एक निर्देशित मिसाइल विध्वंसक सहित चीनी नौसेना के दो जहाज देखे गए.
चीन ने क्या कहा?
चीनी सेना की दक्षिणी थियेटर कमान ने कहा कि उसने रविवार और सोमवार को दक्षिण चीन सागर में नियमित गश्त की और कहा कि वह चीन के क्षेत्र और समुद्री अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प है. चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्रीय विवादों को बिना किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के सीधे तौर पर संबंधित पक्षों द्वारा सुलझाया जाना चाहिए.
फिलीपींस और चीन के रिश्ते
फिलीपींस भौगोलिक रूप से चीन के सबसे निकट है और दोनों देशों के बीच दक्षिण चीन सागर का केवल 600 मील का क्षेत्र ही अंतर करता है. दोनों देशों के संबंध दोराहे पर खड़े हैं और उन्हें यह तय करना है कि किस रास्ते पर जाना है. बातचीत और परामर्श ही सही रास्ता है, क्योंकि टकराव के जरिए संघर्ष से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है.
बीजिंग लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है, जिसमें फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया, ताइवान और वियतनाम द्वारा दावा किए जाने वाले हिस्से भी शामिल हैं. चीन और फिलीपींस ने कई मौकों पर इन मुद्दों को सुलझाने के प्रयास किए हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली है.
चीन फिलीपींस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
दक्षिण चीन सागर को लेकर लड़ाई के बीच दोनों देशों के बीच अच्छा खासा ट्रेड भी है. चीन फिलीपींस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. फिलीपींस को चीनी निवेश पर निर्भरता को लेकर चिंता है, खासकर बुनियादी ढांचे और खनन जैसे क्षेत्रों में. इसके अलावा, दक्षिण चीन सागर में चल रहे क्षेत्रीय विवाद आर्थिक सहयोग को जटिल बनाते हैं, क्योंकि दोनों देश विवादित जलक्षेत्र में संसाधनों के लिए होड़ में लगे हैं.
चीन और फिलीपींस ने 1975 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए. दोनों देशों के बीच संबंध वर्षों से मुख्यत मधुर और सौहार्दपूर्ण रहे हैं. संबंधों के शुरुआती दशकों में कई द्विपक्षीय समझौतों और संधियों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें 1992 में एक द्विपक्षीय निवेश (बीआईटी) और 1999 में एक दोहरा कराधान समझौता (डीटीए) शामिल है.







