संसद के मानसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद 24 अप्रैल को बिहार के मधुबनी में पीएम नरेंद्र मोदी का संबोधन बार-बार उठा. संसद में अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पहलगाम हमले के जवाब में सेना की कार्रवाई को ‘विजय उत्सव’ बताया और बिहार का भी जिक्र करते हुए यहां के लोगों की भावनाओं को जोड़ा. पीएम मोदी से पहले कई अन्य सांसदों ने इस संदर्भ को अपनी बातों में शामिल किया जिससे यह साफ हुआ कि बिहार इस बहस का अहम हिस्सा बन गया है. बता दें कि चर्चा में कई सांसदों ने 24 अप्रैल के संबोधन का जिक्र किया. भाजपा के अनुराग ठाकुर ने दो बार बिहार का नाम लिया और बिहार में पीएम मोदी के संबोधन को ‘मजबूत भारत’ के संकल्प का उदाहरण बताया. कांग्रेस के गौरव गोगोई ने एक बार बिहार का हवाला दिया, लेकिन उनका संकेत सवाल उठाते हुए था कि क्या यह रणनीति चुनावी फायदा के लिए था. तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने भी एक बार बिहार का जिक्र किया और पीएम मोदी के बिहार में दिये गए बयान पर सवाल उठाए. कुल मिलाकर बिहार का नाम बार-बार आया जो इसकी अहमियत दिखाता है. अब सवाल उठता है कि संसद की बहस में बिहार केंद्र बिंदु क्यों बन गया?
जानकार कहते हैं कि बिहार का बार-बार जिक्र इसलिए हुआ, क्योंकि यह 2025 के विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है. पीएम का 24 अप्रैल के संबोधन में उन्होंने बिहार की सांस्कृतिक पहचान ‘सिंदूर’ से जोड़कर सेना की तारीफ की और लोगों के दिलों की भावनाओं को छुआ. यह राज्य एनडीए और विपक्ष दोनों के लिए अहम है जहां जेडीयू-बीजेपी गठबंधन और महागठबंधन के बीच कड़ी टक्कर कही जा रही है. बता दें कि आगामी अक्तूबर नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव है और यहां की 243 सीटों पर जीत की दावेदारी के साथ सत्ता का खेल तय करने की कवायद की जा रही है.
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को मधुबनी, बिहार में एक कार्यक्रम के दौरान 22 अप्रैल को पहलगाम हमले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था, “पहलगाम के दोषियों को मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है. आतंकियों को कल्पना से भी बड़ी सजा मिलकर रहेगी.” पीएम मोदी का यह बयान 28 और 29 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर के बहस के दौरान संसद में चर्चा में रहा. इसको लेकर अलग-अलग दलों के सांसदों ने अपनी-अपनी राय रखी जो चर्चा में रही. इसके बाद पीएम मोदी ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का संकेत दिया और दोषियों को सजा दिलाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता जताई.
जानकार कहते हैं कि बिहार का केंद्र में होने के पीछे की राजनीतिक रणनीति साफ है. बीजेपी बिहार में अपनी छवि ‘राष्ट्रवादी’ और ‘मजबूत’ सरकार की बनाना चाहती है. 24 अप्रैल का संबोधन उसी का हिस्सा था, जिसमें पीएम ने सेना की शक्ति और बिहार की भावनाओं को जोड़कर वोटरों को लुभाने की कोशिश की. इसके बाद ही 6 मई की रात से 10 मई की शाम तक ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया गया था. हालांकि, विपक्ष इसे सियासी स्टंट बता रहा है, लेकिन बीजेपी इसे देशभक्ति से जोड़कर जनता का समर्थन हासिल करना चाहती है. यह रणनीति 2025 के चुनाव में बीजेपी को बढ़त दिला सकती है.
बिहार की अहमियत का राज
बिहार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है जहां 40 लोकसभा सीटें हैं और सियासी समीकरण हमेशा पेचीदा रहे हैं. यहां की जनता भावनाओं से जुड़ती है और ‘सिंदूर’ जैसे प्रतीकों को जोड़कर ने पीएम मोदी के संबोधन ने लोगों के दिलो दिमाग को झकझोर दिया और पीएम मोदी की बातें जेहन में सेट कर गईं. इसके साथ ही बिहार का युवा वोटर भी ‘सिंदूर’ उजड़ने की बात से उद्वेलित हुए और ग्रामीण आबादी ‘सिंदूर उजाड़ने’ जैसे शब्द की भावनाओं से जुड़े. जाहिर है यह चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है और यही वजह है कि हर पार्टी की नजर इस राज्य पर टिकी है.संसद में पीएम का संबोधन और बहस में हिस्सा लेने वाले सांसदों का बार-बार बिहार का जिक्र किया जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में बिहार चुनावी रणनीतियों का केंद्र रहेगा.







