संसद के मॉनसून सत्र में सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर होने वाली 16 घंटे की मैराथन चर्चा से पहले कांग्रेस पार्टी में आंतरिक तनाव की खबरें सुर्खियों में हैं. विशेष रूप से यह सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर इस बहस में हिस्सा लेंगे. सूत्रों के अनुसार थरूर के केंद्र सरकार के प्रति समर्थन और उनकी कुछ टिप्पणियों ने पार्टी नेतृत्व के साथ उनके रिश्तों में खटास पैदा की है, जिसके चलते उनके इस बहस में बोलने की संभावना कम है.
पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सेना की ओर से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऑपरेशन को पूरी तरह सफल बताते हुए कहा कि यह भारत की आतंकवाद के खिलाफ नई नीति को दर्शाता है.
शशि थरूर ने इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए इसे सटीक और सुनियोजित बताया था. उन्होंने इसके लिए मोदी सरकार की जमकर तारीफ की थी. उन्होंने एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि यह बहुत अच्छी तरह से किया गया. भारत ने वैध लक्ष्यों को निशाना बनाया. उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस की आधिकारिक रुख से अलग थी, क्योंकि पार्टी ने खुफिया विफलताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने के दावों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई थी.
कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों को तीन दिन के लिए संसद में उपस्थित रहने का व्हिप जारी किया है और बहस में गौरव गोगोई को विपक्ष की ओर से नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है. सूत्रों के अनुसार थरूर ने कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) कार्यालय को इस बहस में बोलने के लिए अपना नाम नहीं भेजा. पार्टी नेतृत्व ने उनसे संपर्क कर पूछा था कि क्या वह बोलना चाहते हैं, लेकिन थरूर ने मना कर दिया.
थरूर की सरकार के प्रति समर्थन की वजह से पार्टी के भीतर पहले से ही तनाव है. मई 2025 में केंद्र सरकार ने थरूर को ऑपरेशन सिंदूर के बाद वैश्विक मंचों पर भारत का पक्ष रखने के लिए सात-सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए चुना था, जिसके लिए कांग्रेस ने चार अन्य नेताओं के नाम सुझाए थे. इस फैसले पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई थी और जयराम रमेश ने टिप्पणी की थी कि कांग्रेस में होना और कांग्रेस का होना में जमीन-आसमान का अंतर है.
थरूर ने हाल ही में आपातकाल (1975) और इंदिरा गांधी की आलोचना करने वाले एक लेख के लिए भी पार्टी के कुछ नेताओं का गुस्सा झेला था. इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की ऊर्जा और गतिशीलता की तारीफ की थी, जिसे पार्टी ने असहजता के साथ देखा. कांग्रेस की रणनीति इस बहस में खुफिया विफलताओं और ट्रंप के दावों पर सरकार को घेरने की है. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे विपक्ष की अगुवाई करेंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर सरकार का पक्ष रखेंगे.
संसद के मॉनसून सत्र में सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर होने वाली 16 घंटे की मैराथन चर्चा से पहले कांग्रेस पार्टी में आंतरिक तनाव की खबरें सुर्खियों में हैं. विशेष रूप से यह सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर इस बहस में हिस्सा लेंगे. सूत्रों के अनुसार थरूर के केंद्र सरकार के प्रति समर्थन और उनकी कुछ टिप्पणियों ने पार्टी नेतृत्व के साथ उनके रिश्तों में खटास पैदा की है, जिसके चलते उनके इस बहस में बोलने की संभावना कम है.
पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सेना की ओर से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऑपरेशन को पूरी तरह सफल बताते हुए कहा कि यह भारत की आतंकवाद के खिलाफ नई नीति को दर्शाता है.
शशि थरूर ने इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए इसे सटीक और सुनियोजित बताया था. उन्होंने इसके लिए मोदी सरकार की जमकर तारीफ की थी. उन्होंने एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि यह बहुत अच्छी तरह से किया गया. भारत ने वैध लक्ष्यों को निशाना बनाया. उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस की आधिकारिक रुख से अलग थी, क्योंकि पार्टी ने खुफिया विफलताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने के दावों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई थी.
कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों को तीन दिन के लिए संसद में उपस्थित रहने का व्हिप जारी किया है और बहस में गौरव गोगोई को विपक्ष की ओर से नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है. सूत्रों के अनुसार थरूर ने कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) कार्यालय को इस बहस में बोलने के लिए अपना नाम नहीं भेजा. पार्टी नेतृत्व ने उनसे संपर्क कर पूछा था कि क्या वह बोलना चाहते हैं, लेकिन थरूर ने मना कर दिया.
थरूर की सरकार के प्रति समर्थन की वजह से पार्टी के भीतर पहले से ही तनाव है. मई 2025 में केंद्र सरकार ने थरूर को ऑपरेशन सिंदूर के बाद वैश्विक मंचों पर भारत का पक्ष रखने के लिए सात-सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए चुना था, जिसके लिए कांग्रेस ने चार अन्य नेताओं के नाम सुझाए थे. इस फैसले पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई थी और जयराम रमेश ने टिप्पणी की थी कि कांग्रेस में होना और कांग्रेस का होना में जमीन-आसमान का अंतर है.
थरूर ने हाल ही में आपातकाल (1975) और इंदिरा गांधी की आलोचना करने वाले एक लेख के लिए भी पार्टी के कुछ नेताओं का गुस्सा झेला था. इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की ऊर्जा और गतिशीलता की तारीफ की थी, जिसे पार्टी ने असहजता के साथ देखा. कांग्रेस की रणनीति इस बहस में खुफिया विफलताओं और ट्रंप के दावों पर सरकार को घेरने की है. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे विपक्ष की अगुवाई करेंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर सरकार का पक्ष रखेंगे.







