बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के चौथे दिन भी SIR के मुद्दे पर विपक्ष के विधायकों का हंगामा जारी रहा. दरअसलउप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जैसे ही SIR के विषय में बोलना शुरू किया. तेजस्वी यादव ने हस्तक्षेप किया. तेजस्वी यादव के हस्तक्षेप के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक शुरू हो गई. भाकपा माले के विधायक वेल में पहुंचे. SIR के विरोध में पूरा विपक्ष वेल में पहुंचा गया. विपक्ष ने SIR के मुद्दे को लेकर सदन में पर्चे बांटे. इसके बाद मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष सदन से बाहर निकल गए. विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई.
तेजस्वी की मांग पर बोले विजय चौधरी- किसी बिहारी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं कटेगा
बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र चल रहा है. यह काफी अहम माना जा रहा है. नीतीश कैबिनेट का यह आखिरी सत्र है. इसके बाद तमाम राजनीतिक दल चुनाव में जाएंगे. आज सत्र का चौथा दिन है. इससे पहले के तीनों में हंगामेदार रहे हैं. ऐसे में आज भी सदन में सरकार व विपक्ष में टकराव की संभावना है.
तेजस्वी यादव ने कहा कि कल सदन में जो हुआ वह ठीक नहीं हुआ. हम लोग सब सदन में आते हैं इसलिए ताकी हमारा राज्य आगे बढ़े. हम लोगों से कोई गलती हुई तो माफी चाहते हैं.
इस दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार एसआईआर पर चुप्पी तोड़ें. आश्वासन दें कि किसी बिहारी का नाम मतदाता सूची से नहीं कटेगा. कल (बुधवार) जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव ने एसआईआर का विरोध किया, चंद्र बाबू नायडू की पार्टी ने विरोध किया.
बाबा साहेब का संविधान खतरे में: तेजस्वी
सदन में आरजेडी नेता ने कहा कि एसआईआर में आधार-पैन क्यों नहीं है? दस्तावेज वेसे लिए जा रहे जो गरीबों के पास नहीं हैं. करोड़ों की संख्या में प्रवासी बिहारी, मजदूर हैं. उन लोगों को फॉर्म भरने में परेशानी हो रही. ऑनलाइन काम नहीं हो पा रहा. वोट की ताकत बहुत बड़ी होती है, बाबा साहेब का संविधान खतरे में है. मतदाता सूची से नाम काटकर वोटिंग अधिकार गरीबों से छीनने की कोशिश है.
तेजस्वी ने कहा कि चुनाव आयोग का काम निष्पक्ष चुनाव कराना है. एसआईआर की प्रक्रिया ठीक नहीं है. चुनाव आयोग ने कहीं नहीं कहा कि घुसपैठिए वेरिफिकेशन के दौरान मिले. तब बीजेपी एनडीए के नेता कैसे कह रहे कि घुसपैठिए मिले हैं?
काला कुर्ता पहनकर विपक्ष ने किया प्रदर्शन
उधर सदन शुरू होने से पहले विधानसभा पोर्टिको में महागठबंधन के विधायकों ने काला कुर्ता पहनकर एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन किया. उनके हाथों में बैनर-पोस्टर थे. सदस्यों ने बिहार और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. मांग है कि एसआईआर को वापस लिया जाए. एनडीए सरकार हटाओ, वोटबंदी नहीं चलेगी जैसे नारों के साथ एसआईआर के खिलाफ विधानसभा से प्रस्ताव पारित करने की मांग की.
सदन में मंत्री विजय चौधरी ने तेजस्वी यादव की मांग पर बोलते हुए कहा कि सरकार आश्वस्त करती है कि बिहार के किसी वैध वोटर का नाम नहीं कटेगा. मामला न्यायालय में है, इसलिए चर्चा का औचित्य नहीं है, लेकिन आसन का निर्णय सर्वोपरि है. नेताप्रतिपक्ष ने कहा कि यह SIR का विरोध नहीं है. उन्होंने बिहार सरकार से मांग की है कि सरकार आश्वासन दे कि किसी का नाम नहीं कटेगा. सरकार आश्वस्त करती है कि किसी वैध वोटर का नाम नहीं कटेगा
तेजस्वी यादव जताया खेद
बिहार विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि कल की चर्चा को पूरा करने का मौका दिया जाए. तेजस्वी यादव ने कहा कि अध्यक्ष महोदय, जनता के हक की बात करना चाहते हैं. अगली बार कौन आएगा, कोई नहीं जानता. कल जो हुआ, वह उचित नहीं था. इस पांच वर्ष में सदन में हमसे कोई गलती हुई होगी तो हम माफी मांगते हैं. हम कहेंगे कि कल की घटना के लिए दोनों पक्षों से माफी मांगनी चाहिए.
सीएम सुनिश्चित करें कि SIR में किसी बिहारी का नाम न कटे: तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने कहा कि हम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री जी यह सुनिश्चित करें के बिहार में SIR के दौरान किसी बिहारी का नाम वोटर लिस्ट से न कटे, क्यों कि हर बिहारी को वोट देने का अधिकार है. तेजस्वी यादव ने कहा कि EC ने सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दिया उसमें घुसपैठिया का कहीं जिक्र नहीं था. अगर कोई घुसपैठिया आया तो इसके लिए सरकार दोषी है. चांदबाबू नायडू ने भी हमारे मुद्दे पर हमारा साथ दिया. नौ से दस महीने लगे थे जब हमने जातीय जनगणना करवाया था. तब BJP के लोग कहते थे कि हमारे पास नहीं आए. अब इस 25 दिन में साढ़े आठ करोड़ वोटरों के पास BLO कैसे पहुंच गए. आपने समय दिया इसके लिए हम दिल से आभार व्यक्त करते हैं.
सदन में बन गया शायरी का माहौल
वहीं इस दौरान कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद ख़ान ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने जिस तार्किक तरीक़े से बात रखी है, उसके लिए सभी को सोचना चाहिए. एक शायरी के दौरान शकील अहमद ख़ान ने अपनी बात रखी. इस दौरान जैसे ही शकील अहमद खान ने शायरी के जरिये अपनी बात रखी, वैसे ही विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने भी शायरी पढ़कर जवाब दिया.
उपमुख्यमंत्री के कारण नहीं चल पाया था सदन: महबूब आलम
वहीं विधानसभा की कार्यवाही के दौरान माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने कहा कि कल उपमुख्यमंत्री के अभद्र आचरण के कारण विधानसभा की कार्यवाही स्थगित हुई और अहम मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई थी.
बुधवार को कई विधेयक पारित
बिहार विधानसभा में बुधवार को कई महत्वपूर्ण विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, जिससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े बदलावों का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि, इस दौरान विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर हंगामा जारी रखा और अंततः सदन से बहिर्गमन कर दिया.
कृषि विश्वविद्यालय में पारदर्शिता और श्रमिकों के लिए बेहतर शर्तें
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2025 पेश किया. इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य भागलपुर के सबौर स्थित विश्वविद्यालय में सभी संकाय सदस्यों की भर्ती बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से सुनिश्चित करना है. कृषि विभाग का भी प्रभार संभाल रहे सिन्हा ने बताया कि इससे विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और शोध कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी.
इसके बाद, श्रम संसाधन मंत्री संतोष कुमार सिंह ने बिहार दुकान स्थापना (रोजगार विनियमन एवं सेवा शर्त) विधेयक, 2025 पेश किया. यह विधेयक दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लाया गया है. विधेयक के पारित होने के बाद सिंह ने बताया कि यह साप्ताहिक सवेतन अवकाश को अनिवार्य करता है और प्रति वर्ष सात दिनों का सवैतनिक बीमारी अवकाश (सिक लीव) भी प्रदान करता है.
श्रमिकों से प्रतिदिन नौ घंटे या सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकता. अब दस या अधिक श्रमिकों को रोजगार देने वाली दुकानों और प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण आवश्यक होगा, जबकि इससे कम कर्मचारियों वाली दुकानों और प्रतिष्ठानों को छूट दी जाएगी. मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण मानदंडों के अंतर्गत आने वाले व्यवसायों को नए नियमों के लागू होने के छह महीने के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
कौशल विकास और गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा पर भी फोकस
विधानसभा ने राज्य में जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भी एक विधेयक पारित किया. इस विश्वविद्यालय का लक्ष्य युवाओं को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करना है, जिससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा.
इसके अतिरिक्त, बिहार विधानसभा ने बिहार प्लेटफॉर्म-आधारित गिग श्रमिक (पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) विधेयक, 2025 को भी स्वीकृति दी. यह विधेयक राज्य सरकार को सभी अंशकालिक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग श्रमिकों को पंजीकृत करने और उन्हें बीमा कवरेज सहित सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने में सक्षम बनाएगा. श्रम संसाधन मंत्री ने बताया कि ड्यूटी के दौरान दुर्घटनावश मौत होने पर श्रमिक के परिवार को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी. दुर्घटना के कारण अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में, एक सप्ताह से अधिक समय तक रहने पर 16,000 रुपये और इससे कम अवधि के लिए 5,400 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.
सदन ने कारखाना (बिहार संशोधन) विधेयक, 2025 को भी ध्वनिमत से पारित कर दिया. इस विधेयक के कानून बनने के बाद राज्य के कारखानों में कार्यरत श्रमिक एक सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करने पर दोगुनी मजदूरी पाने के हकदार होंगे. विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि श्रमिकों के लिए दैनिक कार्य घंटों को 12 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन कुल मिलाकर साप्ताहिक कार्य घंटे 48 घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए.
विधानसभा में हंगामे और नोंकझोंक का माहौल
इससे पहले दिन में विधानसभा में नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला, जब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर बोलने के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हस्तक्षेप से सदन में तीखी बहस शुरू हो गई. दोपहर के भोजन के बाद जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तब विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए और तख्तियां लहराते हुए आसन के सामने आ गए .वे कुछ मिनटों के हंगामे के बाद सदन से बहिर्गमन कर गए. इस सबके बावजूद सरकार कई अहम विधेयकों को पारित कराने में सफल रही.
बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के चौथे दिन भी SIR के मुद्दे पर विपक्ष के विधायकों का हंगामा जारी रहा. दरअसलउप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जैसे ही SIR के विषय में बोलना शुरू किया. तेजस्वी यादव ने हस्तक्षेप किया. तेजस्वी यादव के हस्तक्षेप के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक शुरू हो गई. भाकपा माले के विधायक वेल में पहुंचे. SIR के विरोध में पूरा विपक्ष वेल में पहुंचा गया. विपक्ष ने SIR के मुद्दे को लेकर सदन में पर्चे बांटे. इसके बाद मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष सदन से बाहर निकल गए. विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई.
तेजस्वी की मांग पर बोले विजय चौधरी- किसी बिहारी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं कटेगा
बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र चल रहा है. यह काफी अहम माना जा रहा है. नीतीश कैबिनेट का यह आखिरी सत्र है. इसके बाद तमाम राजनीतिक दल चुनाव में जाएंगे. आज सत्र का चौथा दिन है. इससे पहले के तीनों में हंगामेदार रहे हैं. ऐसे में आज भी सदन में सरकार व विपक्ष में टकराव की संभावना है.
तेजस्वी यादव ने कहा कि कल सदन में जो हुआ वह ठीक नहीं हुआ. हम लोग सब सदन में आते हैं इसलिए ताकी हमारा राज्य आगे बढ़े. हम लोगों से कोई गलती हुई तो माफी चाहते हैं.
इस दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार एसआईआर पर चुप्पी तोड़ें. आश्वासन दें कि किसी बिहारी का नाम मतदाता सूची से नहीं कटेगा. कल (बुधवार) जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव ने एसआईआर का विरोध किया, चंद्र बाबू नायडू की पार्टी ने विरोध किया.
बाबा साहेब का संविधान खतरे में: तेजस्वी
सदन में आरजेडी नेता ने कहा कि एसआईआर में आधार-पैन क्यों नहीं है? दस्तावेज वेसे लिए जा रहे जो गरीबों के पास नहीं हैं. करोड़ों की संख्या में प्रवासी बिहारी, मजदूर हैं. उन लोगों को फॉर्म भरने में परेशानी हो रही. ऑनलाइन काम नहीं हो पा रहा. वोट की ताकत बहुत बड़ी होती है, बाबा साहेब का संविधान खतरे में है. मतदाता सूची से नाम काटकर वोटिंग अधिकार गरीबों से छीनने की कोशिश है.
तेजस्वी ने कहा कि चुनाव आयोग का काम निष्पक्ष चुनाव कराना है. एसआईआर की प्रक्रिया ठीक नहीं है. चुनाव आयोग ने कहीं नहीं कहा कि घुसपैठिए वेरिफिकेशन के दौरान मिले. तब बीजेपी एनडीए के नेता कैसे कह रहे कि घुसपैठिए मिले हैं?
काला कुर्ता पहनकर विपक्ष ने किया प्रदर्शन
उधर सदन शुरू होने से पहले विधानसभा पोर्टिको में महागठबंधन के विधायकों ने काला कुर्ता पहनकर एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन किया. उनके हाथों में बैनर-पोस्टर थे. सदस्यों ने बिहार और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. मांग है कि एसआईआर को वापस लिया जाए. एनडीए सरकार हटाओ, वोटबंदी नहीं चलेगी जैसे नारों के साथ एसआईआर के खिलाफ विधानसभा से प्रस्ताव पारित करने की मांग की.
सदन में मंत्री विजय चौधरी ने तेजस्वी यादव की मांग पर बोलते हुए कहा कि सरकार आश्वस्त करती है कि बिहार के किसी वैध वोटर का नाम नहीं कटेगा. मामला न्यायालय में है, इसलिए चर्चा का औचित्य नहीं है, लेकिन आसन का निर्णय सर्वोपरि है. नेताप्रतिपक्ष ने कहा कि यह SIR का विरोध नहीं है. उन्होंने बिहार सरकार से मांग की है कि सरकार आश्वासन दे कि किसी का नाम नहीं कटेगा. सरकार आश्वस्त करती है कि किसी वैध वोटर का नाम नहीं कटेगा
तेजस्वी यादव जताया खेद
बिहार विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि कल की चर्चा को पूरा करने का मौका दिया जाए. तेजस्वी यादव ने कहा कि अध्यक्ष महोदय, जनता के हक की बात करना चाहते हैं. अगली बार कौन आएगा, कोई नहीं जानता. कल जो हुआ, वह उचित नहीं था. इस पांच वर्ष में सदन में हमसे कोई गलती हुई होगी तो हम माफी मांगते हैं. हम कहेंगे कि कल की घटना के लिए दोनों पक्षों से माफी मांगनी चाहिए.
सीएम सुनिश्चित करें कि SIR में किसी बिहारी का नाम न कटे: तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने कहा कि हम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री जी यह सुनिश्चित करें के बिहार में SIR के दौरान किसी बिहारी का नाम वोटर लिस्ट से न कटे, क्यों कि हर बिहारी को वोट देने का अधिकार है. तेजस्वी यादव ने कहा कि EC ने सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दिया उसमें घुसपैठिया का कहीं जिक्र नहीं था. अगर कोई घुसपैठिया आया तो इसके लिए सरकार दोषी है. चांदबाबू नायडू ने भी हमारे मुद्दे पर हमारा साथ दिया. नौ से दस महीने लगे थे जब हमने जातीय जनगणना करवाया था. तब BJP के लोग कहते थे कि हमारे पास नहीं आए. अब इस 25 दिन में साढ़े आठ करोड़ वोटरों के पास BLO कैसे पहुंच गए. आपने समय दिया इसके लिए हम दिल से आभार व्यक्त करते हैं.
सदन में बन गया शायरी का माहौल
वहीं इस दौरान कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद ख़ान ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने जिस तार्किक तरीक़े से बात रखी है, उसके लिए सभी को सोचना चाहिए. एक शायरी के दौरान शकील अहमद ख़ान ने अपनी बात रखी. इस दौरान जैसे ही शकील अहमद खान ने शायरी के जरिये अपनी बात रखी, वैसे ही विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने भी शायरी पढ़कर जवाब दिया.
उपमुख्यमंत्री के कारण नहीं चल पाया था सदन: महबूब आलम
वहीं विधानसभा की कार्यवाही के दौरान माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने कहा कि कल उपमुख्यमंत्री के अभद्र आचरण के कारण विधानसभा की कार्यवाही स्थगित हुई और अहम मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई थी.
बुधवार को कई विधेयक पारित
बिहार विधानसभा में बुधवार को कई महत्वपूर्ण विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, जिससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े बदलावों का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि, इस दौरान विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर हंगामा जारी रखा और अंततः सदन से बहिर्गमन कर दिया.
कृषि विश्वविद्यालय में पारदर्शिता और श्रमिकों के लिए बेहतर शर्तें
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2025 पेश किया. इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य भागलपुर के सबौर स्थित विश्वविद्यालय में सभी संकाय सदस्यों की भर्ती बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से सुनिश्चित करना है. कृषि विभाग का भी प्रभार संभाल रहे सिन्हा ने बताया कि इससे विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और शोध कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी.
इसके बाद, श्रम संसाधन मंत्री संतोष कुमार सिंह ने बिहार दुकान स्थापना (रोजगार विनियमन एवं सेवा शर्त) विधेयक, 2025 पेश किया. यह विधेयक दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लाया गया है. विधेयक के पारित होने के बाद सिंह ने बताया कि यह साप्ताहिक सवेतन अवकाश को अनिवार्य करता है और प्रति वर्ष सात दिनों का सवैतनिक बीमारी अवकाश (सिक लीव) भी प्रदान करता है.
श्रमिकों से प्रतिदिन नौ घंटे या सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकता. अब दस या अधिक श्रमिकों को रोजगार देने वाली दुकानों और प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण आवश्यक होगा, जबकि इससे कम कर्मचारियों वाली दुकानों और प्रतिष्ठानों को छूट दी जाएगी. मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण मानदंडों के अंतर्गत आने वाले व्यवसायों को नए नियमों के लागू होने के छह महीने के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
कौशल विकास और गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा पर भी फोकस
विधानसभा ने राज्य में जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भी एक विधेयक पारित किया. इस विश्वविद्यालय का लक्ष्य युवाओं को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करना है, जिससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा.
इसके अतिरिक्त, बिहार विधानसभा ने बिहार प्लेटफॉर्म-आधारित गिग श्रमिक (पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) विधेयक, 2025 को भी स्वीकृति दी. यह विधेयक राज्य सरकार को सभी अंशकालिक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग श्रमिकों को पंजीकृत करने और उन्हें बीमा कवरेज सहित सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने में सक्षम बनाएगा. श्रम संसाधन मंत्री ने बताया कि ड्यूटी के दौरान दुर्घटनावश मौत होने पर श्रमिक के परिवार को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी. दुर्घटना के कारण अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में, एक सप्ताह से अधिक समय तक रहने पर 16,000 रुपये और इससे कम अवधि के लिए 5,400 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.
सदन ने कारखाना (बिहार संशोधन) विधेयक, 2025 को भी ध्वनिमत से पारित कर दिया. इस विधेयक के कानून बनने के बाद राज्य के कारखानों में कार्यरत श्रमिक एक सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करने पर दोगुनी मजदूरी पाने के हकदार होंगे. विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि श्रमिकों के लिए दैनिक कार्य घंटों को 12 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन कुल मिलाकर साप्ताहिक कार्य घंटे 48 घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए.
विधानसभा में हंगामे और नोंकझोंक का माहौल
इससे पहले दिन में विधानसभा में नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला, जब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर बोलने के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हस्तक्षेप से सदन में तीखी बहस शुरू हो गई. दोपहर के भोजन के बाद जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तब विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए और तख्तियां लहराते हुए आसन के सामने आ गए .वे कुछ मिनटों के हंगामे के बाद सदन से बहिर्गमन कर गए. इस सबके बावजूद सरकार कई अहम विधेयकों को पारित कराने में सफल रही.