ग्लोबल मार्केट से मिले मिले-जुले रूख के बावजूद सोमवार को शेयर बाजार घरेलू बेंचमार्क सूचकांक सोमवार को मामूली गिरावट के साथ खुले. निफ्टी पर सन फार्मा, SBI लाइफ इंश्योरेंस, अपोलो हॉस्पिटल्स, पावर ग्रिड कॉर्प, टाइटन कंपनी के शेयर फायदे में रहे, जबकि इंफोसिस, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टाटा मोटर्स के शेयर नुकसान में रहे. कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 201.02 अंक यानी कि 0.24 परसेंट की गिरावट के साथ 82,311.99 के लेवल पर कारोबार कर रहा है. जबकि निफ्टी 42.15 अंक यानी कि 0.19 परसेंट टूटकर 25,102.25,102.80 के लेवल पर है.
शुक्रवार को बाजार में गिरावट
इस दिन सेंसेक्स 689.81 अंक या 0.83 परसेंट की गिरावट के साथ 82,500.47 पर और निफ्टी 205.40 अंक या 0.81 परसेंट की गिरावट के साथ 25,149.85 पर बंद हुआ. BSE मिडकैप इंडेक्स में भी 0.5 परसेंट की गिरावट आई, जबकि BSE स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.7 परसेंट की गिरावट आई, जिससे दो दिनों की बढ़त टूट गई. जहां तक रही आज की बात, तो 14 जुलाई सोमवार को वैश्विक बाजार के मिले-जुले संकेतों के बाद सेंसेक्स और निफ्टी 50 के गिरावट के साथ खुलने की उम्मीद है. आज सुबह Gift निफ्टी में भी गिरावट दिख रही है, जो बाजार में सुस्ती के संकेत दे रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी 25,173.50 के आसपास कारोबार कर रहा, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से 48.4 अंक कम है.
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी पर कई चीजों का असर दिख सकता है, जिनमें जून 2025 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय यूनियन और मेक्सिको पर 30 परसेंट टैरिफ लगाने का फैसला, चीन के जून के व्यापार आंकड़े, HCLTech के पहली तिमाही के नतीजे, संस्थागत निवेश के रुझान, प्राथमिक बाजार की गतिविधियां और कमजोर वैश्विक संकेत शामिल हैं.
BSE, NSE के शेयर होल्डर्स को भारी नुकसान
अमेरिका की ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट (Jane Street) पर सेबी (SEBI) की कड़ी कार्रवाई के बाद महज एक महीने के अंदर बीएसई (BSE) और एनएसई (NSE) के शेयरधारकों को 1.4 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ा है. इसके अलावा सेबी द्वारा डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग (F&O) में पाई जाने वाली गड़बड़ियों की सफाई, घटता हुआ ट्रेडिंग वॉल्यूम और विश्लेषकों की निगेटिव रिपोर्ट्स भी प्रमुख कारण रहे हैं. इन दोनों एक्सचेंज के शेयरों में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली है.
SEBI ने 3 जुलाई को जेन स्ट्रीट पर भारत में ट्रेडिंग पर रोक लगाई और 4,840 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज कर दी. आरोप है कि इस फर्म ने जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से निफ्टी बैंक इंडेक्स (Nifty Bank Index) में हेरफेर किया. इसके बाद मार्केट में भारी घबराहट देखी गई और डेरिवेटिव्स का टर्नओवर तेजी से गिरा. कई ब्रोकरेज हाउस ने एक्सचेंज के शेयरों को डाउनग्रेड करना शुरू कर दिया, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि आगे और सख्त नियम आ सकते हैं.
BSE और NSE के शेयरों में बड़ी गिरावट
इकॉनमिस्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीएसई के शेयर 10 जून को 3,030 रुपये के हाई पर थे, लेकिन अब गिरकर अब 2,376 रुपये पर आ गए हैं. इसके मार्केट कैप में 26,600 करोड़ रुपये की कमी आई है. वहीं, एनएसई के शेयर हालांकि अभी तक लिस्ट नहीं हुए हैं, लेकिन प्राइमरी मार्केट में 21 जून को 2,590 रुपये थे, जो अब 2,125 रुपये पर पहुंच गए हैं. ऐसा होने से इसे 1.15 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल लॉस हुआ है. ये आंकड़े WWIPL द्वारा दिए गए हैं, जो अनलिस्टेड शेयरों की जानकारी देता है.







