आप शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च को भूले नहीं होंगे. वही हिंडनबर्ग, जिसने अडानी ग्रुप के शेयरों की वाट लगा दी थी. ग्रुप की कुछ कंपनियां तो अभी तक उस गिरावट से उबर नहीं पाई हैं. अब उसी जैसी एक और शॉर्ट सेलिंग करने वाली फर्म ‘वाइसरॉय रिसर्च’ आ गई है और उसने निशाने पर लिया है भारतीय अरबपति अनिल अग्रवाल को. इस फर्म ने अपनी रिपोर्ट में वेदांता लिमिटेड की पैरेंट कंपनी वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resources) पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, वेदांता रिसोर्सेज का पूरा ढांचा किसी “पॉन्जी स्कीम” जैसा है, यानी ऐसा सिस्टम जिसमें नया पैसा लाकर पुराना कर्ज चुकाया जा रहा है, और यह सिस्टम लंबे समय तक टिक नहीं सकता. इसके बाद अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड के शेयर 4.5 फीसदी गिर गए.
रिपोर्ट में कहा गया है कि वेदांता रिसोर्सेज की हालत इतनी खराब है कि वह अपने खर्च चलाने के लिए वेदांता लिमिटेड से पैसा निकालती है. वाइसरॉय रिसर्च ने इसे एक “पैरासाइट” यानी परजीवी कंपनी बताया, जो खुद कोई बड़ा बिज़नेस नहीं करती, लेकिन वेदांता लिमिटेड से लगातार पैसा निकाल रही है. इसका असर ये होता है कि वेदांता लिमिटेड की सेहत भी खराब होती जा रही है.
निवेशकों को गुमराह कर रहा वेदांता: वाइसरॉय
वाइसरॉय की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वेदांता रिसोर्सेज के ऊपर जो ब्याज खर्च है, वह कंपनी की बताई गई ब्याज दरों से कहीं ज़्यादा है और यह खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. भले ही कंपनी ने कुछ कर्ज चुकाए भी हों या उनका स्ट्रक्चर बदला हो. इसके अलावा कंपनी के अलग-अलग यूनिट्स पर जो खर्च हो रहा है, उसे कैपिटलाइज़ कर दिया गया है, यानी खर्च को निवेश दिखाकर मुनाफा और एसेट वैल्यू को जबरदस्ती बढ़ा चढ़ाकर बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक यह एक बड़ी धोखाधड़ी है और निवेशकों को गुमराह करने वाली बात है.
इस पूरे मामले का सार यह है कि वेदांता रिसोर्सेज के पास अपने छोटे-छोटे कर्ज चुकाने तक का पैसा नहीं है, जब तक वह वेदांता लिमिटेड से पैसा न निकाले. लेकिन यही तरीका वेदांता लिमिटेड को भी खतरे में डाल रहा है. वाइसरॉय रिसर्च का कहना है कि यह एक खतरनाक सिस्टम है जो खुद को खत्म करने की तरफ बढ़ रहा है.
वित्तीय ज़ॉम्बी तक कह डाला
रिपोर्ट के अनुसार, वेदांता समूह लगभग दीवालिया होने की कगार पर है. कंपनी नए कर्ज, छुपाए गए खर्च और झूठे संपत्ति मूल्यांकन से स्थिति को बेहतर दिखाने की कोशिश कर रही है. कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं- जैसे फर्जी प्रोजेक्ट दिखाकर पैसा उठाना, अधिक ब्याज दिखाना, बैलेंस शीट से बाहर खर्च छुपाना, और गलत ऑडिटर्स रखना.
वेदांता रिसोर्सेज (VRL) अब कंपनियों के डी-मर्जर की योजना बना रही है, लेकिन रिपोर्ट मानती है कि इससे असली समस्या नहीं सुलझेगी. Viceroy का मानना है कि वेदांता एक “वित्तीय ज़ॉम्बी” बन चुकी है, जो कभी भी ढह सकती है. कोई भी एक जोखिम इसका पूरा ढांचा गिरा सकता है.
आप शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च को भूले नहीं होंगे. वही हिंडनबर्ग, जिसने अडानी ग्रुप के शेयरों की वाट लगा दी थी. ग्रुप की कुछ कंपनियां तो अभी तक उस गिरावट से उबर नहीं पाई हैं. अब उसी जैसी एक और शॉर्ट सेलिंग करने वाली फर्म ‘वाइसरॉय रिसर्च’ आ गई है और उसने निशाने पर लिया है भारतीय अरबपति अनिल अग्रवाल को. इस फर्म ने अपनी रिपोर्ट में वेदांता लिमिटेड की पैरेंट कंपनी वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resources) पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, वेदांता रिसोर्सेज का पूरा ढांचा किसी “पॉन्जी स्कीम” जैसा है, यानी ऐसा सिस्टम जिसमें नया पैसा लाकर पुराना कर्ज चुकाया जा रहा है, और यह सिस्टम लंबे समय तक टिक नहीं सकता. इसके बाद अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड के शेयर 4.5 फीसदी गिर गए.
रिपोर्ट में कहा गया है कि वेदांता रिसोर्सेज की हालत इतनी खराब है कि वह अपने खर्च चलाने के लिए वेदांता लिमिटेड से पैसा निकालती है. वाइसरॉय रिसर्च ने इसे एक “पैरासाइट” यानी परजीवी कंपनी बताया, जो खुद कोई बड़ा बिज़नेस नहीं करती, लेकिन वेदांता लिमिटेड से लगातार पैसा निकाल रही है. इसका असर ये होता है कि वेदांता लिमिटेड की सेहत भी खराब होती जा रही है.
निवेशकों को गुमराह कर रहा वेदांता: वाइसरॉय
वाइसरॉय की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वेदांता रिसोर्सेज के ऊपर जो ब्याज खर्च है, वह कंपनी की बताई गई ब्याज दरों से कहीं ज़्यादा है और यह खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. भले ही कंपनी ने कुछ कर्ज चुकाए भी हों या उनका स्ट्रक्चर बदला हो. इसके अलावा कंपनी के अलग-अलग यूनिट्स पर जो खर्च हो रहा है, उसे कैपिटलाइज़ कर दिया गया है, यानी खर्च को निवेश दिखाकर मुनाफा और एसेट वैल्यू को जबरदस्ती बढ़ा चढ़ाकर बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक यह एक बड़ी धोखाधड़ी है और निवेशकों को गुमराह करने वाली बात है.
इस पूरे मामले का सार यह है कि वेदांता रिसोर्सेज के पास अपने छोटे-छोटे कर्ज चुकाने तक का पैसा नहीं है, जब तक वह वेदांता लिमिटेड से पैसा न निकाले. लेकिन यही तरीका वेदांता लिमिटेड को भी खतरे में डाल रहा है. वाइसरॉय रिसर्च का कहना है कि यह एक खतरनाक सिस्टम है जो खुद को खत्म करने की तरफ बढ़ रहा है.
वित्तीय ज़ॉम्बी तक कह डाला
रिपोर्ट के अनुसार, वेदांता समूह लगभग दीवालिया होने की कगार पर है. कंपनी नए कर्ज, छुपाए गए खर्च और झूठे संपत्ति मूल्यांकन से स्थिति को बेहतर दिखाने की कोशिश कर रही है. कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं- जैसे फर्जी प्रोजेक्ट दिखाकर पैसा उठाना, अधिक ब्याज दिखाना, बैलेंस शीट से बाहर खर्च छुपाना, और गलत ऑडिटर्स रखना.
वेदांता रिसोर्सेज (VRL) अब कंपनियों के डी-मर्जर की योजना बना रही है, लेकिन रिपोर्ट मानती है कि इससे असली समस्या नहीं सुलझेगी. Viceroy का मानना है कि वेदांता एक “वित्तीय ज़ॉम्बी” बन चुकी है, जो कभी भी ढह सकती है. कोई भी एक जोखिम इसका पूरा ढांचा गिरा सकता है.