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गठबंधन से हिंदू वोटों का नुकसान, ठुकराने से मुस्लिम वोटों का बंटवारा………………

UB India News by UB India News
July 7, 2025
in पटना, बिहार
0
बिहार में ओवैसी से महागठबंधन को फायदा-नुकसान………

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समाज के किसी भी तबके में कोई उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं………

तेजस्वी यादव, मीरा कुमार और शत्रुघ्न सिन्हा की सुरक्षा घटी…..

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने लालू प्रसाद यादव को महागठबंधन में शामिल होने का ऑफर देकर सियासी हलचल मचा दी. यह प्रस्ताव सेक्युलर वोटों को एकजुट करने के लिए दिया गया है, लेकिन इस पर तेजस्वी यादव की चुप्पी और RJD का इनकार सवाल उठाता है कि क्या यह NDA को हराने की रणनीति है या MY समीकरण को तोड़ने का जाल? ओवैसी का यह कदम बिहार की सियासत को ध्रुवीकरण की ओर ले जा रहा है. दरअसल, AIMIM का दावा है कि यह कदम सेक्युलर वोटों को एकजुट कर NDA को हराने के लिए है, लेकिन RJD इसे BJP की ‘B-टीम’ के रूप में देखती है. 2020 में सीमांचल में पांच सीटें जीतने वाली AIMIM का यह ऑफर क्या वास्तव में सेक्युलर एकता की कोशिश है या RJD के MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को तोड़ने की चाल? पांच बिंदुओं में इस सियासी खेल को समझते हैं.

BJP की B-टीम के आरोप से मुक्ति की कोशिश- AIMIM पर लंबे समय से BJP की ‘B-टीम’ होने का आरोप लगता रहा है. खासकर RJD और महागठबंधन लगातार यह दावा करता रहा है. वर्ष 2020 में AIMIM ने सीमांचल में पांच सीटें जीतकर महागठबंधन को नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद राजद ने इनमें से चार विधायकों को तोड़कर RJD में शामिल करवा लिया था. राजनीति के जानकार कहते हैं कि इससे सबक लेकर ओवैसी का महागठबंधन को ऑफर इस छवि को तोड़ने की रणनीति है, ताकि अगर अलग लड़े और उनके विधायक चुने गए तो वह AIMIM न छोड़े. वहीं, AIMIM के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल इमान इस मामले में, हम सेक्युलर वोटों का बिखराव रोकना चाहते हैं. जाहिर है ओवैसी की यह कोशिश है कि इस प्रस्ताव से BJP के साथ किसी भी गुप्त गठजोड़ के आरोपों को वह खारिज करने में कामयाब हो. वहीं, दूसरी ओर RJD इसे सियासी चाल मानती है जिससे उनकी दुविधा बढ़ गई है.

सीमांचल में मुस्लिम वोटरों को सेक्युलर मैसेज

बिहार के सीमांचल क्षेत्र (किशनगंज, कटिहार, अररिया, पूर्णिया) में 30-68% मुस्लिम आबादी है जहां AIMIM ने 2020 में मजबूत प्रदर्शन किया था. ओवैसी का यह ऑफर सीमांचल के मुस्लिम वोटरों को सीधा-सीधा संदेश है कि उनकी पार्टी सेक्युलर गठबंधन के साथ खड़ी है. ओवैसी का दावा है कि उनकी पार्टी 24 सीटें जीत सकती है और उसकी दावेदारी 50 सीटों की है ऐसे में RJD पर दबाव बढ़ गया है कि वह इस प्रस्ताव को गंभीरता से ले या न ले. यही कारण है कि तेजस्वी यादव इन दिनों मुस्लिम वोटों को लामबंद करने के लिए आक्रामक दिख रहे हैं. उन्होंने हाल में ही वक्फ कानून पर बयान दिया कि-हिंदुस्तान किसी के बाप का नहीं. वहीं, दूसरी ओर मुहर्रम के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में भी मुहर्रम का ताजिया रबड़ी आवास पर जाना और रबड़ी देवी का पूजा-अर्चना करना बताता है कि आरजेडी मुस्लिम मतों को एकजुट रखने को लेकर बेहद गंभीर है, लेकिन AIMIM के प्रस्ताव पर वह असमंजस में है.

ओवैसी के महागठबंधन में शामिल होने की चाह, RJD का डर!

AIMIM ने पहले भी महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी, लेकिन RJD ने इसे ठुकरा दिया. लालू यादव और तेजस्वी यादव को डर है कि AIMIM के साथ गठबंधन से हिंदू वोटरों में नाराजगी बढ़ेगी और BJP इसे ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ के रूप में प्रचारित करेगी. RJD प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने AIMIM को ‘वोट कटुआ’ कहा और मनोज झा ने सुझाव दिया कि ओवैसी को चुनाव नहीं लड़ना चाहिए. यह डर RJD के MY समीकरण को बचाने और हिंदू वोटों को नहीं खोने की रणनीति से उपजा है. लेकिन इससे AIMIM को अकेले लड़ने का मौका मिल सकता है, जो आरजेडी और महागठबंधन के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है.

BJP को हराने का दावा, महागठबंधन की बेरुखी

असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि उनका लक्ष्य NDA को हराना है और महागठबंधन के साथ गठजोड़ इस लक्ष्य को मजबूत करेगा. लेकिन RJD को लगता है कि AIMIM का साथ लेने से सीमांचल में सीटों का बंटवारा होगा, क्योंकि AIMIM 25-30 सीटों की मांग कर रही है, जबकि RJD 8-10 से ज्यादा देने को तैयार नहीं. 2020 में AIMIM की वजह से RJD को कई सीटों पर नुकसान हुआ था और तेजस्वी इस जोखिम को दोहराना नहीं चाहते. वहीं, जानकारों की नजर में अगर महागठबंधन की बेरुखी दिखाता है तो ओवैसी के लिए थर्ड फ्रंट बनाने की राह बन जाएगी जो RJD के लिए नुकसानदायक हो सकता है. 

सियासी ध्रुवीकरण और सामाजिक तनाव का खतरा
मुहर्रम के दौरान सांप्रदायिक हिंसा और सनातन महाकुंभ जैसे आयोजनों ने बिहार में चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है. ओवैसी का ऑफर और तेजस्वी यादव का आक्रामक रुख धार्मिक ध्रुवीकरण को हवा दे सकता है. BJP सांसद जगदंबिका पाल ने RJD पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया, जबकि ओवैसी का कहना है कि वह सामाजिक एकता चाहते हैं. लेकिन बिहार में 18% मुस्लिम आबादी और 80% हिंदू आबादी के बीच बढ़ता तनाव सियासी रणनीतियों को जटिल बना रहा है. राजनीतिक-सामाजिक विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि ऐसी सियासत बिहार के सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती है और ऐसे में ओवैसी का महागठबंधन ऑफर लालू और तेजस्वी के लिए सियासी जाल है. इसे स्वीकारने से हिंदू वोटों का नुकसान और ठुकराने से सीमांचल में वोट बंटवारा हो सकता है, जबकि AIMIM अपनी छवि सुधारने और मुस्लिम वोटों को साधने की कोशिश में है. वहीं RJD की रणनीति MY समीकरण को बचाने की है.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने लालू प्रसाद यादव को महागठबंधन में शामिल होने का ऑफर देकर सियासी हलचल मचा दी. यह प्रस्ताव सेक्युलर वोटों को एकजुट करने के लिए दिया गया है, लेकिन इस पर तेजस्वी यादव की चुप्पी और RJD का इनकार सवाल उठाता है कि क्या यह NDA को हराने की रणनीति है या MY समीकरण को तोड़ने का जाल? ओवैसी का यह कदम बिहार की सियासत को ध्रुवीकरण की ओर ले जा रहा है. दरअसल, AIMIM का दावा है कि यह कदम सेक्युलर वोटों को एकजुट कर NDA को हराने के लिए है, लेकिन RJD इसे BJP की ‘B-टीम’ के रूप में देखती है. 2020 में सीमांचल में पांच सीटें जीतने वाली AIMIM का यह ऑफर क्या वास्तव में सेक्युलर एकता की कोशिश है या RJD के MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को तोड़ने की चाल? पांच बिंदुओं में इस सियासी खेल को समझते हैं.

BJP की B-टीम के आरोप से मुक्ति की कोशिश- AIMIM पर लंबे समय से BJP की ‘B-टीम’ होने का आरोप लगता रहा है. खासकर RJD और महागठबंधन लगातार यह दावा करता रहा है. वर्ष 2020 में AIMIM ने सीमांचल में पांच सीटें जीतकर महागठबंधन को नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद राजद ने इनमें से चार विधायकों को तोड़कर RJD में शामिल करवा लिया था. राजनीति के जानकार कहते हैं कि इससे सबक लेकर ओवैसी का महागठबंधन को ऑफर इस छवि को तोड़ने की रणनीति है, ताकि अगर अलग लड़े और उनके विधायक चुने गए तो वह AIMIM न छोड़े. वहीं, AIMIM के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल इमान इस मामले में, हम सेक्युलर वोटों का बिखराव रोकना चाहते हैं. जाहिर है ओवैसी की यह कोशिश है कि इस प्रस्ताव से BJP के साथ किसी भी गुप्त गठजोड़ के आरोपों को वह खारिज करने में कामयाब हो. वहीं, दूसरी ओर RJD इसे सियासी चाल मानती है जिससे उनकी दुविधा बढ़ गई है.

सीमांचल में मुस्लिम वोटरों को सेक्युलर मैसेज

बिहार के सीमांचल क्षेत्र (किशनगंज, कटिहार, अररिया, पूर्णिया) में 30-68% मुस्लिम आबादी है जहां AIMIM ने 2020 में मजबूत प्रदर्शन किया था. ओवैसी का यह ऑफर सीमांचल के मुस्लिम वोटरों को सीधा-सीधा संदेश है कि उनकी पार्टी सेक्युलर गठबंधन के साथ खड़ी है. ओवैसी का दावा है कि उनकी पार्टी 24 सीटें जीत सकती है और उसकी दावेदारी 50 सीटों की है ऐसे में RJD पर दबाव बढ़ गया है कि वह इस प्रस्ताव को गंभीरता से ले या न ले. यही कारण है कि तेजस्वी यादव इन दिनों मुस्लिम वोटों को लामबंद करने के लिए आक्रामक दिख रहे हैं. उन्होंने हाल में ही वक्फ कानून पर बयान दिया कि-हिंदुस्तान किसी के बाप का नहीं. वहीं, दूसरी ओर मुहर्रम के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में भी मुहर्रम का ताजिया रबड़ी आवास पर जाना और रबड़ी देवी का पूजा-अर्चना करना बताता है कि आरजेडी मुस्लिम मतों को एकजुट रखने को लेकर बेहद गंभीर है, लेकिन AIMIM के प्रस्ताव पर वह असमंजस में है.

ओवैसी के महागठबंधन में शामिल होने की चाह, RJD का डर!

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