बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए अब कुछ ही महीनों का वक्त बचा है और सभी दल सियासी गुणा-गणित में जुट गए हैं. इस चुनाव में मुख्य मुकाबला नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच ही हैं, लेकिन यहां ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी एक बड़ा फैक्टर माने जा रहे हैं. AIMIM का बिहार के सीमांचल क्षेत्र में मजबूत जनाधार रहा है. पिछले चुनाव में उन्होंने अकेले ही चुनाव लड़ते हुए 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी. हालांकि इनमें से 4 विधायक तेजस्वी यादव की पार्टी राजद (RJD) में शामिल हो गए थे.
हालांकि इस बार के विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी लालू-तेजस्वी का दिया वहां भूल चुके हैं और आरजेडी से खुद हाथ मिलाने को तैयार दिख रहे हैं. ओवैसी ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी ने बिहार में विपक्षी महागठबंधन के नेताओं से संपर्क साधा है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में NDA को सत्ता में लौटने से रोका जा सके.
ओवैसी ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, ‘हमारे प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने महागठबंधन के कुछ नेताओं से बातचीत की है और साफ तौर पर कहा है कि हम नहीं चाहते कि बीजेपी या एनडीए दोबारा बिहार में सत्ता में आए. अब यह उन दलों पर निर्भर करता है कि वे NDA को रोकना चाहते हैं या नहीं.’
ओवैसी ने कहा कि पार्टी सीमांचल के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों से भी उम्मीदवार उतारेगी. उन्होंने कहा, ‘अगर महागठबंधन तैयार नहीं है, तो मैं हर सीट से चुनाव लड़ने को तैयार हूं… अभी बताना जल्दी होगा कि कितनी सीटों पर लड़ेंगे, सही समय का इंतजार करें.’
वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना
ओवैसी ने बिहार में चल रहे ‘विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision)’ प्रक्रिया का विरोध करते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है. उन्होंने इस कवायद को ‘कानूनी रूप से संदिग्ध’ बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया ‘सच्चे मतदाताओं को आगामी चुनावों में मतदान से वंचित कर सकती है.’
AIMIM चीफ ने X पर पोस्ट करते हुए चुनाव आयोग पर ‘बिहार में NRC को पिछले दरवाजे से लागू करने’ का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, ‘अब मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए नागरिकों को सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि अपने माता-पिता की जन्म तिथि और स्थान भी साबित करना होगा. जबकि भारत में केवल तीन-चौथाई जन्म ही पंजीकृत होते हैं और सरकारी दस्तावेजों में भारी त्रुटियां होती हैं.’ उन्होंने यह भी दावा किया कि इस प्रक्रिया से गरीबों को मतदाता सूची से बाहर किया जा सकता है, जो संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा.
ओवैसी के इस बयान से बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है. जहां एक ओर महागठबंधन AIMIM की विश्वसनीयता पर सवाल उठा सकता है, वहीं दूसरी ओर NDA के खिलाफ एकजुट विपक्ष की रणनीति पर यह बयान अहम माना जा रहा है.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या महागठबंधन ओवैसी के इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है या फिर AIMIM बिहार चुनाव में अकेले अपने दम पर ताल ठोकती है.