बिहार विधानसभा चुनाव आगामी अक्टूबर-नवंबर में संभावित है और इसको लेकर राजनीतिक-प्रशासनिक स्तर पर तैयारी भी जारी है. बिहार में आईएएस और आईपीएस अफसरों के तबादलों की नई सूची दो-चार दनों के अंतर पर आ रही है. वहीं, नीतीश सरकार ने बड़ा सियासी दांव भी चल दिया है और इसी क्रम में हाल में ही सवर्ण आयोग के गठन करने की घोषणा की गई थी.इसी कड़ी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपना कदम और आगे बढ़ते हुए एक के बाद एक कई आयोगों के गठन की घोषणा कर दी है. बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने अलग-अलग अधिसूचना जारी कर महादलित और एसस-एसटी आयोग और मछुआरा आयोग के गठन की भी घोषणा की है. उनके अध्यक्ष उपाध्यक्ष और सदस्यों के नाम जारी कर दिए गए हैं. बताया जा रहा है कि नीतीश सरकार ने आगामी चुनाव को देखते हुए यह फैसला लिया है.
दरअसल, बिहार में विभिन्न अयोगों के गठन की मांग लंबे समय से हो रही थी. पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और चिराग पासवान जैसे नेताओं ने कई बार इस को लेकर अपनी बात सार्वजनिक तौर पर रखी थी. अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से यही संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है कि उनकी मांगों को सुना गया है और एनडीए एकजुट है. बता दें कि बिहार में जो भी नये आयोग बने हैं उनमें जातिगत समीकरणों से लेकर सियासी गुणा-गणित का भी ध्यान रखा गया है. जाहिर है आगामी बिहार चुनाव को देखते हुए सियासी और जातिगत समीकरण दुरुस्त करने के लिए तमाम आयोग के पदों को भरने का काम जारी है.
मछुआरा आयोग के अध्यक्ष बने ललन कुमार
महादलित आयोग में बिहार वैशाली के राम नरेश कुमार भोजपुर के राम ईश्वर रजक, पटना के अजीत कुमार चौधरी, मुंगेर के मुकेश मांझी को सदस्य बनाया गया है, जबकि राज्य अनुसूचित जाति आयोग में औरंगाबाद के ललन राम पटना के रूबल रविदास और नालंदा के संजय कुमार को सदस्य बनाया गया है. इसके साथ ही मछुआरा आयोग का गठन भी किया गया है जिसको लेकर पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने अधिसूचना जारी की. इसमें पूर्वी चंपारण के चूड़ी हरवा टोला के ललन कुमार को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है. इसके अतिरिक्त पश्चिम चंपारण जिले के निवासी शैलेंद्र कुमार को राज्य अनुसूचित जन जाति यानी एसटी कमिशन का अध्यक्ष बनाया गया है.
बहुत बड़ा वोट बैंक है निषाद समाज
मछुआरा समाज के हितों को देखते हुए मछुआरा आयोग का गठन किया गया है जो मछुआरों के कल्याण, सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए काम करेगा. पूर्वी चंपारण के ललन कुमार को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि बक्सर के अजीत चौधरी को उपाध्यक्ष बनाया गया है. इसके अतिरिक्त समस्तीपुर के विद्यासागर सिंह निषाद, पटना के राजकुमार और भागलपुर की रेणु सिंह को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है. बता दें कि निषाद समाज में शामिल मछुआरों के सभी उपजातियों के समूह को मिलाकर करीब 8 से 9 प्रतिशत जनसंख्या बताई जाती है. इसका मतलब यह कि यह एक बहुत बड़ा वोट बैंक भी है.
भाजपा का ‘मछुआरा प्लान’ जानिये
बता दें कि मछुआरा समाज और मछुआरा वोट बैंक को लेकर भारतीय जनता पार्टी भी लगातार सक्रिय रही है. बीते दिनों भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने इस बात के संकेत दिए थे कि मछुआरा आयोग का गठन होने जा रहा है. इतना ही नहीं मछुआरा समाज को लेकर भाजपा ने बड़ा दांव चला है और जून-जुलाई में कई प्रमंडलों और जिलों में मछुआरा सम्मेलन भी करने का फैसला किया है. अभी तक के कार्यक्रम तय कार्यक्रम के अनुसार, आगामी 10 जून को मुजफ्फरपुर, 14 जून को कटिहार, 18 जून को दरभंगा, 22 जून को मोतिहारी, 26 जून को समस्तीपुर, 30 जून को खगड़िया और 10 जुलाई को पटना में मछुआरा सम्मेलन आयोजित किया जाना है.







