प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में 2 दिवसीय दौरे के दौरान प्रदेश को 48500 करोड़ से अधिक की योजनाओं की सौगात दी. वहीं इस दौरान पीएम मोदी ने एक बार फिर बिहार की धरती से न सिर्फ जनता बल्कि कई लोगों को बड़ा संदेश देने का काम किया है. दरअसल बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणनीति को मजबूत करने का मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ, बल्कि इसने विपक्षी दलों और भारत विरोधी ताकतों को भी कड़ा संदेश दिया. 29 और 30 मई को पटना और रोहतास के विक्रमगंज में पीएम मोदी ने विकास, सुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को जोर-शोर से उठाकर एक तीर से तीन निशाने साधे. यह दौरा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद उनका पहला बिहार दौरा था, ऐसे में इस दौरान पीएम मोदी ने रोहतास के बिक्रमगंज में अपने संबोधन के दौरान कहा कि मैं अपना वचन पूरा करने के बाद बिहार आया हूं.
दरअसल पीएम मोदी पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद 24 अप्रैल को पहले से तय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बिहार के मधुबनी पहुंचे थे. उस दौरान पीएम मोदी ने बिहार के मधुबनी से दुनिया और आतंकवादियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा था कि आतंकवादी चाहे कहीं भी छिप जाए भारत उनको बिल से निकालकर मारेगा. आतंकवादियों को ऐसी सजा दी जाएगी, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी. ऐसे में जब पहलगाम हमले के दोषियों को कड़ा जबाब देने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया तब देशभर में ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को लेकर गर्व का पर्व भी मनाया गया. देशभर में लोगों ने सेना के इस ऑपरेशन के लिए उनका आभार जताया है. ऐसे में अब पीएम मोदी ऑपरेशन सिंदूर को सफलता के बाद जैसे ही बिहार पहुंचे उन्होंने फिर से पूरी दुनिया को बड़ा संदेश दिया है.
एक संबोधन और सध गए कई समीकरण!
रोहतास के बिक्रमगंज में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया ने अभी ऑपरेशन सिंदूर में भारत की ताकत का केवल एक छोटा सा हिस्सा देखा है. भारत ने तो अभी सिर्फ अपने तरकश का एक तीर छोड़ा है. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. अगर आतंकवाद फिर से सिर उठाएगा, तो भारत उसे बिल से खींचकर नष्ट कर देगा. पीएम मोदी ने बिहार के रोहतास में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह धरती बाबू वीर कुंवर सिंह की है. हमारी सीमा पर तैनात बीएसएफ के जवान सुरक्षा की अभेद चट्टान हैं. 10 मई को सीमा पर इम्तियाज शहीद हुए, मैं इस वीर सपूत को सलाम करता हूं. ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन ने भारत की ताकत देखी है. यह तो हमारे तरकश का एक ही तीर है. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई न रुकी है और न रुकेगी. आतंकवाद फन उठाएगा तो उसे कुचल दिया जाएगा. हमारी लड़ाई देश के सभी दुश्मनों से है, चाहे वो सीमा पार हों या देश के भीतर. ऐसी में पीएम मोदी ने अपने बिहार दौरे के दौरान बिहार की जनता, देश और बिहार की विपक्षी पार्टियों और दुनिया को भी बड़ा मैसेज देते एक एक तीर से तीन निशाना साधा है.
पहला निशाना: बिहार चुनाव में एनडीए की स्थिति मजबूत
पीएम मोदी ने अपने दौरे की शुरुआत पटना में एक भव्य रोडशो और बीजेपी कार्यकर्ताओं की बैठक से की. उन्होंने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और ‘डबल इंजन’ सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने का मंत्र दिया. वहीं बिक्रमगंज से पीएम मोदी ने बिहार के लिए 48,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. इसमें नबीनगर सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट, बिहटा हवाई अड्डे का सिविल एनक्लेव आदि शामिल हैं. यह कदम बिहार की जनता को यह संदेश देता है कि एनडीए विकास और सुशासन के रास्ते पर अडिग है. सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार की मौजूदगी ने गठबंधन की एकजुटता को और मजबूत किया, जिससे विपक्ष की जातिगत राजनीति को चुनौती मिली. इसके साथ ही पीएम मोदी ने बिहार की जनता को बड़ा मैसेज दे दिया है कि डबल इंजन की सरकार में बिहार में विकास की बयार बहती रहेगी.
दूसरा निशाना: विपक्ष पर करारा प्रहार
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों, खासकर राजद और कांग्रेस, पर तीखा हमला बोला. उन्होंने विपक्ष के ‘जंगलराज’ और भ्रष्टाचार के आरोपों को फिर से उठाया, साथ ही उनकी जातिगत जनगणना की मांग को एनडीए की रणनीति से जोड़कर पलटवार किया. पीएम ने कहा कि उनकी सरकार सामाजिक न्याय और विकास के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे विपक्ष के पास जवाब देने को ज्यादा कुछ नहीं बचा. तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर जैसे नेताओं के तंज को उन्होंने बिना नाम लिए हुए विकास कार्यों के जवाब से खारिज किया.
तीसरा निशाना: भारत विरोधी ताकतों को कड़ा संदेश
विक्रमगंज की धरती से पीएम मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए भारत विरोधी ताकतों, खासकर आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को कड़ा संदेश दिया. मधुबनी में 24 अप्रैल को दिए गए उनके बयान, “आतंक के अड्डों को धूल में मिला देंगे,” को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ रुकने वाला नहीं है, आतंकवादियों को बिल से निकालकर मारने का काम करेगा. यह संदेश वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत स्थिति को बताने के लिए भी दिया गया.
बिहार में रैली के लिए PM मोदी ने बिक्रमगंज को ही क्यों चुना?
पीएम मोदी आज बिहार चुनाव का शंखनाद करने जा रहे हैं. वह बिहार के बिक्रमगंज से चुनाव का बिगुल फूंकेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां करोड़ों रुपए की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. यहां वह भारत के ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का बखान करेंगे. अब सवाल है कि आखिर पीएम मोदी ने अपनी रैली के लिए पूरे बिहार में बिक्रमगंज को ही क्यों चुना? चलिए जानते हैं पर्दे के पीछे की कहानी.
बीजेपी सूत्रों की मानें तो बिक्रमगंज चुनने का मकसद बहुत सियासी है. प्रारंभिक आकलन में यह पाया गया कि बिक्रमगंज में विधानसभा और लोकसभा सीटों का पिछला रिकॉर्ड बीजेपी के लिए अनुकूल नहीं रहा है. इतना ही नहीं, पूरे मगध-शाहाबाद क्षेत्र में सत्ता विरोधी लहर है. इसमें बिक्रमगंज भी शामिल है. यह बेल्ट 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव दोनों में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की राह में रोड़ा रही है.
बिक्रमगंज ही क्यों?
पिछले साल के लोकसभा चुनाव में एनडीए को बिहार में 10 सीटों का नुकसान हुआ था. इनमें से सात सीटें मगध-शाहाबाद बेल्ट की थीं. बिक्रमगंज काराकाट विधानसभा सीट के अंतर्गत आता है. यहां 2020 में भाजपा को सीपीआई (एमएल) एल ने हरा दिया था. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के अरुण सिंह ने 82,700 वोट हासिल कर भाजपा के राजेश्वर राज को हराया था. भाजपा को 64,511 वोट मिले थे.
पर्दे के पीछे की कहानी
क्यों खास है यह इलाका
शाहाबाद में चार लोकसभा सीटें हैं- आरा, सासाराम, करकट, बक्सर. और मगध में चार लोकसभा सीटें हैं- पटना, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, नवादा. शाहाबाद-मगध क्षेत्र में 55 विधानसभा सीटें हैं. इनमें से एनडीए केवल 10 सीटों पर जीत हासिल कर सका था. इन 10 सीटों में से बीजेपी ने पांच जीतीं, जबकि बाकी सहयोगियों ने जीती थीं.
यही वजह है कि बिहार चुनाव से सिर्फ पांच महीने पहले बीजेपी ने अपने सबसे बड़े फेस पीएम नरेंद्र मोदी कोसामने रखा है. वह इस क्षेत्र को राष्ट्रवाद और बिहार के विकास के मिश्रण से लुभाने की कोशिश कर रहे हैं. कोई आश्चर्य नहीं कि बड़े-बड़े पोस्टरों पर सिर्फ मोदी का चेहरा और “ना देश झुकेगा, ना बिहार का विकास रुकेगा” जैसे नारे हर कोने में दिखाई दे रहे हैं, पारंपरिक ‘सुशासन बाबू’ नीतीश कुमार की तस्वीर को छोड़कर.
बीजेपी का जीत वाला दांव
यही वजह है कि बिहार चुनाव से सिर्फ पांच महीने पहले बीजेपी ने अपने सबसे बड़े फेस पीएम नरेंद्र मोदी कोसामने रखा है. वह राष्ट्रवाद, पाकिस्तान संग हुए संघर्ष और बिहार के विकास के कॉकटेल के जरिए इस क्षेत्र को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं. कोई आश्चर्य नहीं कि केवल मोदी के चेहरे वाले बड़े पोस्टर और ‘न देश झुकेगा, न बिहार का विकास रुकेगा’ जैसे नारे हर गली-मोहल्ले में सजे हुए हैं, जबकि ‘सुशासन बाबू’ नीतीश कुमार की तस्वीर को दरकिनार कर दिया गया है.
पीएम मोदी क्या-क्या सौगात देंगे
पीएम मोदी इस क्षेत्र में सत्ता विरोधी लहर को खत्म करने के लिए विकास परियोजनाओं की घोषणा करने वाले हैं. वे बिक्रमगंज से 48,500 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. बिक्रमगंज मगध-शाहाबाद क्षेत्र के केंद्र में है. पटना-गया-डोभी चार लेन, गोपालगंज में एलिवेटेड रोड, सासाराम में अनुग्रह नारायण रोड तक स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग जैसी कई अन्य परियोजनाओं के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी इस क्षेत्र के वोटरों का विश्वास जीतने की कोशिश करेंगे.







