PMCH में हुई मारपीट के बाद भाजपा नेता मनीष कश्यप को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। सोमवार रात 9.30 बजे से गुरुवार शाम 5 बजे तक वे अस्पताल में एडमिट रहे।
उन्होंने कहा, ‘मैं वहां एक 16 साल की नाबालिग का इलाज कराने गया था। बच्ची एक लाइलाज बीमारी से पीड़ित थी। तीन दिन से जांच के कारण उसका ट्रीटमेंट टाला जा रहा था।
हमने बच्ची का इलाज मांगा तो वहां 150-200 जूनियर डॉक्टर ने मुझे बेरहमी से पीटा। 3 घंटे तक बंधक बनाकर रखा। मुझे पीटते हुए वीडियो बनाया। कहा- ये अगर नेता बन गया तो ये हमें बार-बार डिस्टर्व करेगा। इसे मारो। इसके वीडियो को बाद में वायरल किया जाएगा।’
वहीं, BJP की तरफ से किसी नेता के नहीं आने और पार्टी में बने रहने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘दोस्तों के साथ मिलकर जल्द आगे का फैसला लूंगा।’
डिस्चार्ज होने के बाद मनीष कश्यप ने उस दिन का पूरा वाकया सुनाया। पढ़ें, कश्यप की जुबानी…
‘16 मई को मैंने PMCH में 16 साल की लड़की को इलाज करवाने के लिए भेजा था। उसे वहां उसी दिन एडमिट करवाया गया था। 19 मई तक उसका इलाज शुरू नहीं हो पाया था। 19 मई यानी सोमवार दोपहर 1.30 बजे के आसपास तीन लोगों के साथ PMCH गया था। जब इलाज शुरू करने के बारे में पता किया तो बताया गया कि जांच रिपोर्ट नहीं आई है, इसलिए इलाज शुरू नहीं हो पाया है।’
‘जब डॉक्टर से इलाज शुरू नहीं होने के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि जब जांच रिपोर्ट ही नहीं आई है, तो इलाज कैसे शुरू कर दें। क्या दवा चलवा दें। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इलाज शुरू हो पाएगा। उन्होंने कहा कि 48-72 घंटे के भीतर रिपोर्ट आती है।’
मैंने पूछा- रिपोर्ट आएगी तब इलाज शुरू हो जाएगा न। उन्होंने बताया हां। PMCH के भीतर से ही मैं 15 मिनट में रिपोर्ट लेकर आ गया। रिपोर्ट लाने के बाद उनका इगो हर्ट हो गया कि मैं 48 घंटे बोली और ये 15 मिनट में कैसे लेकर आ गया।
रिपोर्ट लाने के बाद जब मैंने उनसे पूछा कि अब तो रिपोर्ट आ गई। अब तो आपको समझ में आ गया होगा कि इसे कौन सी बीमारी है। इलाज शुरू कर दीजिए। तब उन्हें लगा कि मैंने उनकी डिग्री पर सवाल खड़ा कर दिया। मैंने कहा- बहन अब तो इलाज शुरू कर दीजिए। उन्होंने कहा, मैं बहन हूं क्या मैं डॉक्टर हूं। तब फिर से मैंने कहा डॉक्टर अब तो इलाज शुरू हो जाएगा ना।
इसके बाद वो मेरे ऊपर चिल्लाने लगी। मैं भी जोर-जोर से बोलने लगा कि आपके पास स्ट्रेचर नहीं है। व्हील चेयर नहीं है। हाथ जोड़ कर विनती करता हूं कि पहले उसकी जान बचाइए। इसके बाद मैंने कहा- जा रहा हूं सुपरिटेंडेंट से कंप्लेन करने। उन्होंने कहा- जाइए जहां जाकर कंप्लेन करना है कर दीजिए।
इतना बोलने के बाद मैं डिप्टी सुपरिटेंडेंट से बात करने चला गया। बात कर ही रहा था कि लगभग 100-200 जूनियर डॉक्टर वहां आए और मेरे ऊपर हमला कर दिया। ये जूनियर डॉक्टर थे या कुछ और मुझे जानकारी नहीं। जिस वक्त हमला हुआ मैं सुपरिटेंडेंट और डिप्टी सुपरिटेंडेंट के चैंबर के बीच में खड़ा था।
करीब 3 घंटे तक जूनियर डॉक्टरों ने बंधक बनाए रखा
कश्यप ने बताया, ‘मुझे वहीं के जूनियर डॉक्टर ने 2.30 से 3 घंटे तक बंधक बनाया था। गार्ड्स और बॉडीगार्ड ने बदसलूकी नहीं की। ये लोग ज्यादातर आर्मी के रिटायर्ड जवान हैं। ये लोग मेरे साथ बदलसलूकी नहीं करते हैं। वहां मुझसे एक पेपर पर साइन करवाया गया। पेपर में क्या लिखवाया और लिखा गया मुझे नहीं मालूम है।’
‘पीरबहोर थाने की पुलिस पहुंची। सभी से बात की। पुलिस के साथ मेरे भी कुछ लोग पहुंचे। मेरे कुछ लोगों को अंदर घुसने भी नहीं दिया जा रहा था। बातचीत के बाद मुझे वहां से निकाला गया।’
लेडी डॉक्टर को धक्का देने का आरोप गलत
लेडी डॉक्टर को धक्का देने का आरोप गलत है। अगर ऐसा है तो इसका सीसीटीवी फुटेज होगा, इसे देख लिया जाए। इसके रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक कर दिया जाए।
‘इन लोगों ने मुझे बहुत बेरहमी से पीटा। बहुत बुरा व्यवहार किया। जान से मारने की बात भी कह रहे थे। कह रहे थे अगर ये रहेगा, अगर नेता बन गया तो ये हमें बार-बार डिस्टर्व करेगा। इसे मारो। मारते हुए वीडियो बनाओ। इस वीडियो को बाद में वायरल किया जाएगा। ऐसी बातें वे कह रहे थे।

डॉक्टरों ने कहा- यहां से तुम्हें ठीक-ठाक ही निकलना होगा
‘मेरी तबीयत PMCH में ही खराब हो गई थी, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने कहा कि यहां से तुम्हें ठीक-ठाक निकलना है। चुपचाप गाड़ी में बैठना है और निकल जाना है। नहीं तो तुम्हारी गाड़ी भी तोड़ देंगे। वहां से निकलने के बाद रात 9.30 बजे मैं निजी हॉस्पिटल में एडमिट हो गया था।’
पुलिस कंप्लेन करने से कुछ नहीं होगा
कश्यप ने कहा, ‘कहां कंप्लेन दर्ज कराऊं। तमिलनाडु प्रकरण में सच दिखाया। मुझे 9 महीने तक जेल में रहना पड़ा। किससे कंप्लेन करूं। कौन सुनेगा। कंप्लेन कराके 10 डॉक्टर पर कार्रवाई कराके मैं क्या कर लूंगा। मुझे पूरे बिहार की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था को सही कराना है। इस व्यवस्था के लिए 10-12 डॉक्टर पर शिकायत दर्ज कराने से क्या हो जाएगा।’
PMCH का पूरा सिस्टम कोलेप्स
कश्यप ने कहा, ‘PMCH का सिस्टम पूरी तरह से कोलेप्स कर चुका है। पता नहीं कैसे एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल है। मुझसे मारपीट के अगले दिन आरा के कुछ पासवान लोग भी गए थे, उनके साथ भी मारपीट हुई थी।
इसके पहले एक महिला के साथ मारपीट हुई। PMCH में जो भी पत्रकार जाएगा उसके साथ मारपीट होगी। बिहार के किसी भी अस्पताल में जाएंगे तो आपके साथ मारपीट ही होगी।
ये लोग पत्रकारों से डरते हैं। बिहार के सारे सदर अस्पताल का हेड PMCH है। सदर अस्पताल और PMCH में सुधार होना चाहिए।’

समर्थक बोले तो BJP से इस्तीफा देंगे
‘जो साथ खड़े हैं उनको भी धन्यवाद, जो साथ खड़े नहीं हैं, उन्हें भी धन्यवाद। इस समय मैं केवल इतना ही बोलूंगा। मेरे हॉस्पिटल के नीचे जो खड़े हैं, जो मुझसे मिल रहे हैं, उन्हें उम्मीद है कि बिहार में कुछ बेहतर बदलाव होना चाहिए। ये वो नहीं हैं, जिन्हें दिन-रात बिहार को लूटना है। जिन्हें फुर्सत नहीं है मनीष कश्यप का हाल जानने का।’
आगे क्या करना है, इसके लिए अपने दोस्तों, समर्थकों के साथ बैठूंगा। तब निर्णय लूंगा। 2024 में 2-4 लोगों के साथ निर्णय लिया था। इस बार सबकी राय से आगे का निर्णय लूंगा। वे कहेंगे तो BJP से इस्तीफा दे दूंगा।
बच्ची को गंभीर बीमारी, उसकी जान कीमती है
बच्ची के बारे में बस इतना ही बताऊंगा कि वो चंपारण की है। बच्ची को GBS नामक बीमारी है। इसमें कमर से नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर देता है। डॉक्टर ने बताया कि इसका एक इंजेक्शन 24-30 हजार रुपए का होता है। इसका ट्रीटमेंट 2-3 महीने तक चलता है। ये बहुत महंगा इलाज है। PMCH में इसका फ्री में इलाज होता है। इससे ज्यादा मैं उस बच्ची के बारे में नहीं बताना चाहूंगा। बच्ची का स्वस्थ होकर PMCH से आना बेहद जरूरी है। प्राइवेट अस्पताल में इस इलाज का खर्च 10 लाख से भी ज्यादा का है।







