डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, तभी से उन्होंने चीन को लेकर सख्त रवैया अपना रखा है. इस बार उन्होंने 5 साल पहले दुनियाभर में तबाही मचाने वाले जिन्न को एक बार फिर बाहर निकाला है और ड्रैगन पर हमला किया है. अमेरिकी सरकार ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति का मुद्दा फिर से बाहर निकालकर चीन को कटघरे में खड़ा कर दिया है. ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब इस मामले को दबाया नहीं जाएगा, बल्कि दुनिया को ‘कोविड का सच’ बताया जाएगा.
दरअसल व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर अब कोविड-19 लैब-लीक थ्योरी को लेकर एक नया पेज लॉन्च किया गया है। इसमें पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन और पूर्व मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फौसी पर कोरोना वायरस की लीक थ्योरी को दबाने का आरोप लगाया गया है। इस पेज को शुक्रवार को लॉन्च किया गया। इसमें कहा गया है कि कोविड 19 महामारी का कारण बनने वाला वायरस SARS-CoV-2 चीन के वुहान स्थित संक्रामक रोग की लैब से निकला है। यह एक मानव निर्मित वायरस है।
लैब में रिसाव से फैला वायरस
व्हाइट हाउस की वेबसाइट का यह पेज कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति को लेकर एक लंबी बहस को फिर से शुरुआत कर रहा है। जबकि इसकी जांच संघीय एजेंसियों, वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों और कांग्रेस समितियों द्वारा की गई है। जनवरी में, सीआईए ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें निष्कर्ष निकाला गया कि लैब में रिसाव की संभावना है, लेकिन उस निर्णय में विश्वास कम जताया गया है।
सीआईए ने पहले कहा था कि उसके पास यह निर्धारित करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है कि वायरस की उत्पत्ति कहां से हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि वह सभी परिकल्पनाओं पर विचार कर रहा है जिसमें यह थ्योरी भी शामिल है कि यह खतरनाक वायरस वुहान के बाजार में जानवरों से लोगों में फैला।
नया वेबपेज उस वेबसाइट पर है जो कोविड-19 वैक्सिनेशन के लिए संसाधन के तौर पर काम करती थी। अब इस पर एक बैनर लगा है जिस पर लिखा है: “लैब लीक, कोविड-19 की असली उत्पत्ति।” बैनर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी दिखाया गया है।
बाइडेन और फौसी ने सच्चाई छिपाने की कोशिश की
‘लैब-लीक’ पेज पर पूर्व मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. फौसी और तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन पर कोरोनावायरस की उत्पत्ति को छिपाने का भी आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि पिछले प्रशासन ने सच्चाई को छिपाने की पूरी कोशिश की।
व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा, “यह वेबसाइट कोविड-19 की वास्तविक उत्पत्ति को दर्शाती है और यह भी बताती है कि कैसे डेमोक्रेट्स और मीडिया ने वैकल्पिक स्वास्थ्य उपचारों और लैब-लीक थ्योरी को बदनाम किया।”
लैब-लीक थ्योरी क्या है?
यह संदेह है कि कोरोनावायरस गलती से या किसी और तरह से मध्य चीन के शहर वुहान की एक प्रयोगशाला से बाहर आया होगा। सबसे पहले कोरोना वायरस के मामले यहीं सामने आए थे। इस थ्योरी के समर्थक वुहान में एक खास बाइलॉजिकल रिसर्च फैसिलिटी की ओर इशारा करते हैं। वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) एक दशक से अधिक समय से चमगादड़ों में कोरोनावायरस का अध्ययन कर रहा है। यह संस्थान हुआनान वेट मार्केट से 40 मिनट की ड्राइव दूर है, जहां सबसे पहले कोरोना वायरस संक्रमण के मामले आने शुरू हुए। जो लोग इस थ्योरी को मानते हैं, उनका कहना है कि यह वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) लैब से लीक होकर वेट मार्केट में फैला होगा।
ट्रंप का बाइडेन पर प्रहार
वेबसाइट पर एक बैनर है, जिसमें लिखा है- ‘लैब लीक: द ट्रू ओरिजिन्स ऑफ कोविड-19’, और साथ ही ट्रंप की तस्वीर के साथ यह दावा किया गया है कि पिछली सरकारें और मीडिया ‘सच को छिपाने, भ्रम फैलाने और गैर-जवाबदेही’ के एक अभियान में शामिल थे.
5 बड़े दावे…
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- कोरोना वायरस में एक ऐसी जैविक विशेषता है, जो प्रकृति में नहीं पाई जाती.
- सभी कोविड मामले एक ही स्रोत से फैले, जबकि पहले की महामारियों में कई स्पिलओवर घटनाएं होती थीं.
- वुहान लैब में जीन संशोधन (गेन ऑफ फंक्शन रिसर्च) का इतिहास रहा है, जिसमें सुपर-वायरस बनाए जाते थे.
- 2019 की शरद ऋतु में लैब के कुछ शोधकर्ता कोविड जैसे लक्षणों से बीमार पड़े थे.
- अब तक वायरस की प्राकृतिक उत्पत्ति का कोई स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया.
अब दुनिया की निगाहें जिनपिंग पर हैं. क्या वे इस बार फिर से चुप रहेंगे या कोई ठोस जवाब देंगे? ट्रंप तो पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर चुके हैं और इस बार वे पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं लगते.







