डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिससे उथल-पुथल मची है. यूक्रेन युद्ध हो या फिर गाजा में टकराव का मामला हो, ट्रंप ने अपने फैसलों से दुनिया को चौंकाया है. राष्ट्रपति ट्रंप के जिस फैसले ने पूरी दुनिया को एक साथ प्रभावित किया वह है सभी देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाना. बरमूडा से लेकर बोत्सवाना और यूरोप से लेकर चीन तक इसकी चपेट में आ गए. ट्रंप सरकार का सबसे ज्यादा टकराव चीन के साथ हुआ है. अमेरिका के कदम पर पलटवार करते हुए बीजिंग ने भी जवाबी टैरिफ लगा दिया. इस तरह से दुनिया की दो बड़ी इकोनॉमी के बीच टकराव के हालात हैं. यह भारत जैसे देशों के लिए फायदे का सौदा हो सकता है. टैरिफ वॉर के बीच भारत और अमेरिका बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कर रहे हैं. दूसरी तरफ अब नई दिल्ली में चीन के राजदूत शू फेइहोंग की बातों से बीजिंग के रुख में नरमी आने के संकेत मिले हैं. इस तरह यदि सबकुछ ठीक रहा तो टैरिफ वॉर से भारत को फायदा ज्यादा और नुकसान कम होने वाला है.
दरअसल, भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 99 बिलियन डॉलर (₹845333 करोड़) तक पहुंच गया है. भारत की ओर से लगातार इसे कम करने पर बात होती है, लेकिन यह लगातार बढ़ता ही जा रहा है. अब चीन की ओर से भारत के साथ व्यापार घाटा को कम करने को लेकर स्पष्ट संकेत दिए गए हैं. नई दिल्ली में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि बीजिंग भारत से इंपोर्ट बढ़ाने को तैयार है. साथ ही उन्होंने चीनी कंपनियों के लिए इंडिया में निष्पक्ष और पारदर्शी बिजनेस एनवायरमेंट की मांग की है. बता दें कि अमेरिका के साथ तनाव बढ़ने के बाद चीन अब नए ट्रेड पार्टनर की तलाश में है, ऐसे में भारत के साथ व्यापार घाटे को कम करने के लिए इंपोर्ट बढ़ाने के संकेत दिया है.
भारत की चिंता दूर करने की कोशिश
अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव के बीच, बीजिंग ने नई दिल्ली से संपर्क साधते हुए कहा है कि वह इंडिया से ज्यादा से ज्यादा ज्यादा प्रीमियम गुड्स इंपोट करने को तैयार है. साथ ही भारत के व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारतीय व्यवसायों को चीनी बाजार में मदद करने के लिए तैयार है. हाल में आई रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन के बीच ट्रेड डेफिसिट बढ़कर रिकॉर्ड 99.2 बिलियन डॉलर हो गया है. चीन के साथ अरबों डॉलर का व्यापार घाटा भारत के लिए हमेशा से ही चिंता का सबब रहा है. अब ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को दिए इंटरव्यू में भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा है कि बीजिंग भारत की चिंताओं को दूर करने के लिए तैयार है.
टैरिफ वॉर पर क्या बोले चीनी राजदूत
चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने यह भी उम्मीद जताई कि भारत चीनी कंपनियों के लिए पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण बिजनेस माहौल उपलब्ध कराएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस टिप्पणी को दोहराते हुए कि प्रतिस्पर्धा को संघर्ष में बदलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, शू फेइहोंग ने कहा कि स्टेबल और को-ऑपरेटिव संबंधों के लिए संवाद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि चीन इस साल के अंत में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए तैयार है. अमेरिका के टैरिफ वॉर पर उन्होंने कहा कि चीन और भारत की जिम्मेदारी है कि वे सभी प्रकार के एकतरफा और संरक्षणवाद जैसे कदम का विरोध करें. व्यापार असंतुलन के मुद्दे पर शू फेइहोंग ने कहा कि साल 2024 में मिर्च, लौह अयस्क और सूती धागे जैसे भारतीय उत्पादों के चीन को निर्यात में 17%, 160% और 240% से अधिक की वृद्धि देखी गई.







