बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इस वजह से राजनीतिक पार्टियाँ और गठबंधन बहुत सक्रिय हो गए हैं. हर कोई अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. बिहार की राजनीति में दो बड़े गठबंधन हैं: एक है सत्ताधारी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) और दूसरा है विपक्षी महागठबंधन. दोनों में बहुत सारी गतिविधियाँ चल रही हैं. .
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के लिए आज दोपहर बीजेपी के कई नेता सीएम आवास पहुंचे. इन नेताओं में बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया आदि थे.
बताया जाता है कि पहले बीजेपी दफ्तर में बैठक हुई उसके बाद ये लोग सीएम आवास पहुंचे. सीएम आवास में इनकी मुलाकात नीतीश कुमार से हुई. नीतीश कुमार से मुलाकात करने के लिए बीजेपी कोटे के मंत्री मंगल पांडेय और फिर प्रेम कुमार भी सीएम आवास पहुंचे. माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई है.
वहीँ कल महागठबंधन की पहली औपचारिक बैठक गुरुवार को पटना में आयोजित की जाएगी. विपक्ष की इस अहम बैठक में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और तीनों वाम दलों (सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई-एमएल) के साथ-साथ कुछ अन्य दलों के नेता भी शिरकत कर सकते हैं. बैठक का मुख्य एजेंडा सीट बंटवारा, चुनाव प्रचार की रणनीति और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर सहमति बनाना है. वहीं, चर्चा है कि राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के अध्यक्ष पशुपति पारस और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी को भी बैठक का न्यौता भेजा गया है. दोनों नेताओं की उपस्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा है, क्योंकि इनका रुख आगामी चुनाव में समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
1. चुनाव की तैयारी और रणनीति
बिहार में सभी पार्टियाँ और गठबंधन अपनी रणनीति बना रहे हैं. वे चाहते हैं कि चुनाव में उनकी स्थिति मजबूत हो. हाल ही में हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीसरी बार जीत हासिल की. महाराष्ट्र में भी NDA की सरकार बनी. इन जीतों के बाद अब सबकी नजर बिहार पर है.
बड़े नेता भी बिहार में सक्रिय हैं. पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिन के दौरे पर बिहार आए थे. अब 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मधुबनी आने वाले हैं. ये दौरे दिखाते हैं कि बिहार का चुनाव कितना महत्वपूर्ण है.
2. NDA में क्या हो रहा है?
NDA में मुख्य रूप से दो बड़ी पार्टियाँ हैं: BJP और जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU. बिहार में पिछले कई सालों से JDU का नेतृत्व रहा है, और BJP ने उसका साथ दिया है. लेकिन अब BJP चाहती है कि वह बिहार में NDA की मुख्य पार्टी बने.
नीतीश कुमार की स्थिति
नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं. लेकिन उनकी उम्र बढ़ रही है और उनकी सेहत भी ठीक नहीं बताई जा रही. इस वजह से लोग यह सोच रहे हैं कि क्या वे आगे भी नेतृत्व करेंगे. उनकी स्थिति पर सबकी नजर है.
BJP और JDU में तनाव
हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक बयान दिया. उन्होंने कहा कि बिहार के उपमुख्यमंत्री और BJP नेता सम्राट चौधरी चुनाव में NDA की जीत का झंडा फहराएँगे. इस बयान से विवाद हो गया. विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने तुरंत सवाल उठाया कि क्या BJP ने नीतीश कुमार को छोड़ दिया है. BJP को सफाई देनी पड़ी. इस घटना से BJP और JDU के बीच कुछ तनाव होने का अंदाज़ा मिलता है.
पशुपति कुमार पारस का NDA छोड़ना
14 अप्रैल, 2025 को केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के चाचा पशुपति कुमार पारस ने NDA से नाता तोड़ लिया. वे पहले लोक जनशक्ति पार्टी के एक हिस्से के नेता थे. उनके जाने से NDA में कुछ बदलाव हो सकते हैं.
3. महागठबंधन में क्या हो रहा है?
महागठबंधन में RJD, कांग्रेस, और वामपंथी पार्टियाँ जैसे CPI(ML) शामिल हैं. लेकिन इस गठबंधन में भी सब कुछ ठीक नहीं है.
आपसी अविश्वास
महागठबंधन की पार्टियों में एक-दूसरे पर भरोसा कम है. खासकर, कांग्रेस और वामपंथी पार्टियाँ डर रही हैं कि RJD सीट बँटवारे को आखिरी समय तक टालेगी. उन्हें लगता है कि RJD उन्हें कम सीटें देगी या ऐसी सीटें देगी जहाँ जीतना मुश्किल है.
कांग्रेस की शिकायत
कांग्रेस का कहना है कि उसे अक्सर ऐसी सीटें दी जाती हैं जहाँ जीत की संभावना कम होती है. फिर बाद में उसे कम सीटें जीतने के लिए दोषी ठहराया जाता है. 2020 के चुनाव में कांग्रेस को 70 सीटें मिली थीं, लेकिन वह केवल 19 सीटें जीत पाई.
CPI(ML) की नाराज़गी
CPI(ML) ने 2020 के चुनाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था. उसने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा और 12 सीटें जीतीं. लेकिन उसे लगता है कि उसके मजबूत कार्यकर्ताओं के बावजूद उसे कम सीटें दी जाती हैं.
RJD की मुश्किलें
RJD बिहार की एक बड़ी पार्टी है. लेकिन 2005 के बाद से वह अपने दम पर सरकार नहीं बना पाई. उसका वोट प्रतिशत स्थिर है, लेकिन वह बहुमत तक नहीं पहुँच पाती. 2015 और 2022 में उसने JDU के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई थी, लेकिन ये गठबंधन ज्यादा दिन नहीं चले. RJD को अब अपने दम पर सत्ता में आने की चुनौती है.
बातचीत जारी
इन समस्याओं के बावजूद महागठबंधन में बातचीत चल रही है. 15 अप्रैल, 2025 को RJD और कांग्रेस के नेताओं ने दिल्ली में मुलाकात की. आगे भी ऐसी चर्चाएँ होंगी.
4. छोटी पार्टियाँ और नए खिलाड़ी
बिहार में कुछ छोटी पार्टियाँ और नए लोग भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
प्रशांत किशोर का जन सुराज
प्रशांत किशोर पहले एक राजनीतिक रणनीतिकार थे. अब उन्होंने अपनी पार्टी जन सुराज बनाई है. लेकिन उनकी पार्टी को अभी ज्यादा समर्थन नहीं मिल रहा. वे बिहार में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचला बहुत तेज है. NDA और महागठबंधन दोनों अपने-अपने तरीके से तैयारियाँ कर रहे हैं. NDA में BJP का बढ़ता प्रभाव और नीतीश कुमार की स्थिति महत्वपूर्ण है. महागठबंधन में अविश्वास, सीट बँटवारे की समस्या, और RJD की सत्ता में वापसी की कोशिश अहम मुद्दे हैं. छोटी पार्टियाँ और नए खिलाड़ी भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
चुनाव नज़दीक आने के साथ ये सारी चीज़ें बिहार की राजनीति को और रोमांचक बनाएँगी. यह एक खुला मुकाबला होगा, और अभी बहुत सारे सवालों के जवाब मिलना बाकी है. बिहार की जनता किसे चुनेगी, यह देखना दिलचस्प होगा.







