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72 घंटे में चौथी बार थर्राई म्यांमार की धरती, 5.1 तीव्रता के भूकंप से फिर मचा हाहाकार, अब तक 1600 की हुई मौत

UB India News by UB India News
March 31, 2025
in खास खबर, दुर्घटना
0
72 घंटे में चौथी बार थर्राई म्यांमार की धरती, 5.1 तीव्रता के भूकंप से फिर मचा हाहाकार, अब तक 1600 की हुई मौत
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म्यांमा के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले के निकट रविवार को 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने यह जानकारी दी। यह देश में शुक्रवार को आए विनाशकारी भूकंप के बाद से जारी झटकों की श्रृंखला में ताजा झटका है। शुक्रवार को शहर के पास 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था जिसके कारण कई इमारतें ढह गई थीं और अन्य बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचा था। भूंकप के कारण अब तक 1,600 से अधिक लोगों की मौत होने और 3,400 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है। यह संख्या बढ़ने की आशंका है।

72 घंटे में लगा चौथा झटका

म्यांमार की धरती 72 घंटे में चौथी बार जोरदार भूकंप के झटकों से हिल गई है। रविवार को म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले के पास काफी ताकतवर भूकंप आया। इससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर इस बार 5.1 बताई गई है।  बचाव अभियान जारी है। 

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’40 टन सहायता सामग्री लेकर दो जहाज रवाना’

इससे पहले विनाशकारी भूकंप की चपेट में आए म्यांमार की मदद के लिए भारत हर संभव मदद कर रहा है. विदेश मंत्री जयशंकर ने शुक्रवार को जानकारी दी कि 40 टन सहायता सामग्री लेकर दो जहाज पड़ोसी मुल्क के लिए रवाना हो गए हैं. एस जयशंकर ने लिखा, “ऑपरेशन ब्रह्मा, आईएनएस सतपुड़ा और आईएनएस सावित्री 40 टन मानवीय सहायता लेकर यांगून बंदरगाह की ओर बढ़ रवाना.”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने जानकारी दी कि 80 सदस्यीय एनडीआरएफ खोज एवं बचाव दल भी नेप्यी ताव के लिए रवाना हुआ. ये दल म्यांमार में बचाव कार्यों में सहायता करेंगे. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के वरिष्ठ जनरल महामहिम मिन आंग ह्लाइंग से बात की. उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है.

क्यों आता है भूकंप 

भूकंप तब आता है जब धरती के अंदर प्लेटों में हलचल होती है. हमारी पृथ्वी की ऊपरी सतह कई टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है, जो लगातार धीमी गति से हिलती रहती हैं. जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे या ऊपर खिसकती हैं, या किसी जगह फंस जाती हैं, तो बहुत ज्यादा दबाव बन जाता है. जब यह दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है, तो प्लेटें अचानक खिसक जाती हैं और भूकंप के झटके महसूस होते हैं.

म्यांमार में शुक्रवार को आए विनाशकारी भूकंप का दहशत लोगों के दिल और दिमाग में काफी ज्यादा हावी है। 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप ने म्यांमार में भारी तबाही मचाई और करीब 1600 लोगों की मौत हो गई। अब भूवैज्ञानिक द्वारा आफ्टरशॉक्स के बारे में चेतावनी दी गई है। 

 

भूवैज्ञानिक जेस फीनिक्स के अनुसार, म्यांमार में आए इतनी अधिक तीव्रता वाले भूंकप से उतनी ऊर्जा निकली है जितनी 334 परमाणु बमों के विस्फोट से निकलती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए बताया है कि 7.7 तीव्रता वाले भूकंप के बाद इस क्षेत्र में लंबे समय तक आफ्टरशॉक्स आते रह सकते हैं।

10 किलोमीटर की गहराई में आया था भूकंपअमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र म्यांमार के मांडले शहर में था। यह भूकंप दोपहर के समय 10 किलोमीटर की गहराई में आया था। म्यांमार के स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, मरने वालों की संख्या अब तक 1600 हो चुकी है। वहीं USGS ने अनुमान लगाया है कि मरने वालों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो सकती है।

 

भूवैज्ञानिक फीनिक्स ने सीएनएन को बताया कि, म्यांमार के इस क्षेत्र में महीनों तक लोगों को आफ्टरशॉक्स का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट यूरोशियन प्लेट से टकराती जा रही है।भारत ने भेजी मदद

भारत ने म्यांमार में भूकंप से प्रभावित हुए लोगों की मदद के लिए मेडिकल यूनिट और बचाव दल भेजा है। भारत द्वारा कंबल, तिरपाल, हाइजीन किट, स्लीपिंग बैग, सोलर लैंप, खाने के पैकेट और किचन सेट जैसी आवश्यक सामग्री भेजी गई है।
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत दो C-17 विमान भेजे गए हैं जिनमें 118 सदस्यीय भारतीय सेना की चिकित्सा टीम, महिलाओं और बच्चों की देखभाल सेवा और 60 टन राहत सामग्री शामिल थी। यह विमान शनिवार को म्यांमार पहुंचा।
राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता भेजी गई

MEA प्रवक्ता रंधीर जयस्वाल ने कहा कि अब तक भारत से म्यांमार तक राहत सामग्री के पांच विमान पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना के दो जहाज INS सतपुरा और INS सवित्री 40 टन मानवतावादी सहायता लेकर यांगून के बंदरगाह पर पहुंच चुके हैं। साथ ही 118 सदस्यीय एक फील्ड अस्पताल को आगरा से म्यांमार भेजने की तैयारी की गई है।चीन ने भी मदद को बढ़ाया हाथ

भारत के अलावा चीन ने भी म्यांमार की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। चीन के चुन्नान प्रांत से 37 सदस्यीय दल म्यांमार की राजधानी यांगून पहुंच चुका है। चीन द्वारा भेजा गया दल भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली और ड्रोन जैसी सुविधाओं के साथ राहत एवं चिकित्सा सहायता प्रदान कर रहा है।म्यांमार की सैन्य सरकार का बयान

एक समाचार एजेंसी के अनुसार, म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रमुख ने 1644 से अधिक मौतों की पुष्टि की है। विनाशकारी भूकंप के कारण कई शहरों की सड़कें, पुल और अन्य पब्लिक अवसंरचनाएं बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है।
म्यांमार की सैन्य सरकार ने बताया कि, भूकंप के कारण घायल होने वालों की संख्या 2400 के करीब है। कई इलाकों में बचाव अभियान जोरों पर है, लेकिन क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के कारण कई स्थानों तक पहुंच पाना अभी काफी मुश्किल है।

म्यांमा के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले के निकट रविवार को 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने यह जानकारी दी। यह देश में शुक्रवार को आए विनाशकारी भूकंप के बाद से जारी झटकों की श्रृंखला में ताजा झटका है। शुक्रवार को शहर के पास 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था जिसके कारण कई इमारतें ढह गई थीं और अन्य बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचा था। भूंकप के कारण अब तक 1,600 से अधिक लोगों की मौत होने और 3,400 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है। यह संख्या बढ़ने की आशंका है।

72 घंटे में लगा चौथा झटका

म्यांमार की धरती 72 घंटे में चौथी बार जोरदार भूकंप के झटकों से हिल गई है। रविवार को म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले के पास काफी ताकतवर भूकंप आया। इससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर इस बार 5.1 बताई गई है।  बचाव अभियान जारी है। 

’40 टन सहायता सामग्री लेकर दो जहाज रवाना’

इससे पहले विनाशकारी भूकंप की चपेट में आए म्यांमार की मदद के लिए भारत हर संभव मदद कर रहा है. विदेश मंत्री जयशंकर ने शुक्रवार को जानकारी दी कि 40 टन सहायता सामग्री लेकर दो जहाज पड़ोसी मुल्क के लिए रवाना हो गए हैं. एस जयशंकर ने लिखा, “ऑपरेशन ब्रह्मा, आईएनएस सतपुड़ा और आईएनएस सावित्री 40 टन मानवीय सहायता लेकर यांगून बंदरगाह की ओर बढ़ रवाना.”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने जानकारी दी कि 80 सदस्यीय एनडीआरएफ खोज एवं बचाव दल भी नेप्यी ताव के लिए रवाना हुआ. ये दल म्यांमार में बचाव कार्यों में सहायता करेंगे. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के वरिष्ठ जनरल महामहिम मिन आंग ह्लाइंग से बात की. उन्होंने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है.

क्यों आता है भूकंप 

भूकंप तब आता है जब धरती के अंदर प्लेटों में हलचल होती है. हमारी पृथ्वी की ऊपरी सतह कई टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है, जो लगातार धीमी गति से हिलती रहती हैं. जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे या ऊपर खिसकती हैं, या किसी जगह फंस जाती हैं, तो बहुत ज्यादा दबाव बन जाता है. जब यह दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है, तो प्लेटें अचानक खिसक जाती हैं और भूकंप के झटके महसूस होते हैं.

म्यांमार में शुक्रवार को आए विनाशकारी भूकंप का दहशत लोगों के दिल और दिमाग में काफी ज्यादा हावी है। 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप ने म्यांमार में भारी तबाही मचाई और करीब 1600 लोगों की मौत हो गई। अब भूवैज्ञानिक द्वारा आफ्टरशॉक्स के बारे में चेतावनी दी गई है। 

 

भूवैज्ञानिक जेस फीनिक्स के अनुसार, म्यांमार में आए इतनी अधिक तीव्रता वाले भूंकप से उतनी ऊर्जा निकली है जितनी 334 परमाणु बमों के विस्फोट से निकलती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए बताया है कि 7.7 तीव्रता वाले भूकंप के बाद इस क्षेत्र में लंबे समय तक आफ्टरशॉक्स आते रह सकते हैं।

10 किलोमीटर की गहराई में आया था भूकंपअमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र म्यांमार के मांडले शहर में था। यह भूकंप दोपहर के समय 10 किलोमीटर की गहराई में आया था। म्यांमार के स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, मरने वालों की संख्या अब तक 1600 हो चुकी है। वहीं USGS ने अनुमान लगाया है कि मरने वालों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो सकती है।

 

भूवैज्ञानिक फीनिक्स ने सीएनएन को बताया कि, म्यांमार के इस क्षेत्र में महीनों तक लोगों को आफ्टरशॉक्स का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट यूरोशियन प्लेट से टकराती जा रही है।भारत ने भेजी मदद

भारत ने म्यांमार में भूकंप से प्रभावित हुए लोगों की मदद के लिए मेडिकल यूनिट और बचाव दल भेजा है। भारत द्वारा कंबल, तिरपाल, हाइजीन किट, स्लीपिंग बैग, सोलर लैंप, खाने के पैकेट और किचन सेट जैसी आवश्यक सामग्री भेजी गई है।
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत दो C-17 विमान भेजे गए हैं जिनमें 118 सदस्यीय भारतीय सेना की चिकित्सा टीम, महिलाओं और बच्चों की देखभाल सेवा और 60 टन राहत सामग्री शामिल थी। यह विमान शनिवार को म्यांमार पहुंचा।
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MEA प्रवक्ता रंधीर जयस्वाल ने कहा कि अब तक भारत से म्यांमार तक राहत सामग्री के पांच विमान पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना के दो जहाज INS सतपुरा और INS सवित्री 40 टन मानवतावादी सहायता लेकर यांगून के बंदरगाह पर पहुंच चुके हैं। साथ ही 118 सदस्यीय एक फील्ड अस्पताल को आगरा से म्यांमार भेजने की तैयारी की गई है।चीन ने भी मदद को बढ़ाया हाथ

भारत के अलावा चीन ने भी म्यांमार की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। चीन के चुन्नान प्रांत से 37 सदस्यीय दल म्यांमार की राजधानी यांगून पहुंच चुका है। चीन द्वारा भेजा गया दल भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली और ड्रोन जैसी सुविधाओं के साथ राहत एवं चिकित्सा सहायता प्रदान कर रहा है।म्यांमार की सैन्य सरकार का बयान

एक समाचार एजेंसी के अनुसार, म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रमुख ने 1644 से अधिक मौतों की पुष्टि की है। विनाशकारी भूकंप के कारण कई शहरों की सड़कें, पुल और अन्य पब्लिक अवसंरचनाएं बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है।
म्यांमार की सैन्य सरकार ने बताया कि, भूकंप के कारण घायल होने वालों की संख्या 2400 के करीब है। कई इलाकों में बचाव अभियान जोरों पर है, लेकिन क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के कारण कई स्थानों तक पहुंच पाना अभी काफी मुश्किल है।

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