अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें अपना ‘करीबी मित्र’ और ‘स्मार्ट नेता’ बताया है. साथ ही वाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने एक बार फिर दोहरा कि भारत दुनिया के सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी जोड़ा की टैरिफ को लेकर दोनों देशों की बातचीत अच्छी चल रही है. ट्रंप का इशारा अमेरिका और भारत के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement – BTA) वार्ता की ओर था. यह वार्ता 26 मार्च, 2025 से नई दिल्ली में शुरू हुई, जिसमें अमेरिकी सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक टीम भारत आई है. यह टीम 29 मार्च तक भारत में रहकर चर्चा करेगी. अब अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रधानमंत्री मोदी को दोस्त बताने और ‘बातचीत अच्छी चलने’ की जानकारी देने से कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर बात बन गई है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी कह चुके हैं कि वार्ता “अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है” और द्विपक्षीय समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा.
अगर द्विपक्षीय व्यापार समझौता हो गया तो भारत अमेरिका द्वारा 2 अप्रैल लगाए जाने वाले ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ से बच जाएगा. 2 अप्रैल की डेडलाइन से पहले दोनों देश ट्रेड डील पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर समझौता होता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. नहीं तो टैरिफ वॉर का खतरा बना रहेगा. चीन, कनाडा और यूरोपीय संघ के विपरीत, भारत ट्रम्प प्रशासन ने टैरिफ के मामले में बातचीत का रास्ता अपनाया है.
भारत कम कर सकता है टैरिफ
अमेरिका के जवाबी टैरिफ से बचने के लिए भारत ने 23 अरब डॉलर (लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये) के आयात पर टैरिफ कम करने का प्रस्ताव रखा है. सूत्रों का कहना है कि भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों जैसे बादाम, क्रैनबेरी, पिस्ता और अखरोट पर आयात शुल्क (टैरिफ) में कटौती का प्रस्ताव रखा है. साथ ही भारत अमेरिका से आयात होने वाली एलएनजी (LNG) पर भी इंपोर्ट ड्यूटी कम करने पर विचार कर रहा है. भारत ने हाल ही में अमेरिकी बॉर्बन व्हिस्की पर टैरिफ 150 फीसदी से घटाकर 100 फीसदी कर दिया था. मोटरसाइकिल और आईसीटी उत्पादों जैसे कुछ अमेरिकी सामानों पर शुल्क घटाया है, लेकिन अमेरिका इसे अपर्याप्त मानता है.
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध तेजी से विकसित हो रहे हैं. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार (वस्तु और सेवा सहित) वर्तमान में लगभग 190 अरब डॉलर का है. यह व्यापार दोनों देशों के लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि दोनों देश 2030 तक व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए टैरिफ में कमी, बाजार पहुंच, और निवेश सहयोग पर जोर दिया जा रहा है. 2024 में भारत से अमेरिका का निर्यात लगभग 117 अरब डॉलर था, जिसमें प्रमुख उत्पादों में रत्न और आभूषण (16%), फार्मास्यूटिकल्स (14%), पेट्रोलियम उत्पाद (12%), और मशीनरी शामिल हैं. अमेरिका से भारत का आयात लगभग 73 अरब डॉलर रहा, जिसमें ऊर्जा उत्पाद (तेल और गैस), विमानन उपकरण, और तकनीकी उपकरण प्रमुख हैं. भारत का ट्रेड सरप्लस लगभग 44 अरब डॉलर रहा. दोनों देशों के बीच सेवा व्यापार (आईटी, बीपीओ, और वित्तीय सेवाएं) भी महत्वपूर्ण है, जो कुल व्यापार का लगभग 40% हिस्सा है. भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिकी बाजार में अग्रणी हैं.
क्या होगा टैरिफ वार का असर
अगर अमेरिका भारत पर “रेसिप्रोकल टैरिफ” (Reciprocal Tariff) नीति लागू करता है तो इसका भारत और अमेरिका दोनों पर आर्थिक, व्यापारिक, और रणनीतिक प्रभाव पड़ेगा. भारत भी अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगा सकता है. दोनों देशों में टैरिफ वार शुरू होने का असर भारत के निर्यात पर होगा. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. कुल निर्यात का 18% अमेरिका ही जाता है. टैरिफ से भारत की जीडीपी वृद्धि पर मामूली असर पड़ सकता है, खासकर अगर वैकल्पिक बाजार (जैसे यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया) में अतिरिक्त पहुंच नहीं मिलती है.
अमेरिका भारत से 73 अरब डॉलर का आयात करता है, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाएं, और पेट्रोलियम शामिल हैं. अगर भारत जवाबी टैरिफ लगाता है तो अमेरिकी उपभोक्ताओं और व्यवसायों को ऊंची कीमतें चुकानी पड़ेंगी. अमेरिकी कंपनियां जो भारत में निवेश करती हैं या भारतीय आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर हैं वे टैरिफ वार से प्रभावित हो सकती हैं. भारत जवाबी नीतियों से इनके लिए बाजार पहुंच सीमित कर सकता है.







