जमीन के बदले नौकरी मामले में ED दफ्तर में आज राबड़ी देवी से पूछताछ होगी। पूर्व सीएम राबड़ी देवी ED दफ्तर पहुंच गईं हैं। उनके साथ मीसा भारती भी मौजूद हैं। दोनों एक ही गाड़ी में ED दफ्तर पहुंचीं हैं।
इसके साथ ही RJD सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को समन जारी किया है। दोपहर के बाद तेजप्रताप यादव भी ED दफ्तर पहुंचेंगे। पहली बार जमीन के बदले नौकरी मामले में पूछताछ के लिए तेजप्रताप को बुलाया गया है।
जानकारी के मुताबिक, ED ने लालू यादव को भी 19 मार्च को पूछताछ के लिए बुलाया है। वहीं, पटना में ED दफ्तर के बाहर समर्थकों की भीड़ जुट गई है। राजद समर्थक केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। इससे पहले 29 जनवरी को ईडी ने लालू से 10 घंटे तक पूछताछ की थी. पिछले साल 30 जनवरी को तेजस्वी यादव से भी ईडी ने 8 घंटे तक पूछताछ की थी.
‘BJP विधायक बोले- जैसी करनी वैसी भरनी’
लैंड फॉर जॉब मामले में पूर्व सीएम राबड़ी देवी को समन पर मंत्री श्रवण कुमार ने कहा है कि ‘कानून काम कर रहीं है। न्यायालय का मामला है।’ वहीं बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने कहा कि, ‘प्रत्येक क्रिया के विपरित प्रतिक्रिया होती है। सनातन संस्कृति कहती है कि जैसी करनी वैसी भरनी। जब इन लोगों को सत्ता शासन मिला तो दुरुपयोग किया। जमीन के बदले जॉब दिया। आज उसी में ईडी की कार्रवाई हो रही है। जिसने भी इस देश को लूटा है उसको लौटाना पड़ेगा। कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।’
इससे पहले लैंड फॉर जॉब केस में मंगलवार 11 मार्च को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई थी। लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और बेटी हेमा यादव सुनवाई के दौरान कोर्ट पहुंचे थे। सभी आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई थी।
जनवरी 2024 में लालू-तेजस्वी से हुई थी पूछताछ
लैंड फॉर जॉब्स मामले में 20 जनवरी 2024 को ED की दिल्ली और पटना टीम के अधिकारियों ने लालू और तेजस्वी यादव से 10 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की थी।
लालू प्रसाद से 50 से ज्यादा सवाल किए थे। उन्होंने ज्यादातर जवाब हां या ना में ही दिए थे। पूछताछ के दौरान कई बार लालू झल्ला भी गए थे।
वहीं, तेजस्वी से 30 जनवरी को लगभग 10-11 घंटे तक पूछताछ की थी।
क्या लैंड फॉर जॉब मामला?
लैंड फॉर जॉब स्कैम के तहत सीबीआई का आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए बड़ा घोटाला किया. इसके तहत रेलवे में नौकरी देने के नाम पर लालू परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन और प्रॉपर्टी ट्रांसफर कराई गई. जमीनों के बदले मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में जोन में बड़े पैमाने पर नौकरियां दी गईं. आरोप के अनुसार, लालू परिवार ने बिहार में 1 लाख स्क्वायर फीट से ज्यादा जमीन महज 26 लाख रुपए में हासिल कर ली थी, जबकि उस समय के सरकारी दर के अनुसार, जमीन की कीमत करीब 4.39 करोड़ रुपए थी. इतने कम पैसों में जमीन लेने के बाद ज्यादातर केस में जमीन मालिक को कैश में भुगतान किया गया.







